ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में बुधवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति हो गई जब विपक्षी दल बीजू जनता दल यानी बीजेडी के कार्यकर्ताओं ने बालासोर की एक कॉलेज छात्रा के आत्मदाह के विरोध में लोक सेवा भवन को घेरने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़प हुई। इसमें पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। इस हंगामे में पूर्व मंत्री प्रणब प्रकाश दास और प्रीति रंजन घड़े जैसे बीजेडी के कई वरिष्ठ नेता घायल हो गए, जबकि 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

बालासोर के फकीर मोहन कॉलेज की 20 वर्षीय बी.एड. द्वितीय वर्ष की छात्रा ने 12 जुलाई को कथित तौर पर अपने कॉलेज के एक प्रोफेसर द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायत पर कार्रवाई न होने के कारण खुद को आग लगा ली थी। 95 प्रतिशत जलने के कारण उसे पहले बालासोर जिला अस्पताल में भर्ती किया गया, फिर भुवनेश्वर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में स्थानांतरित किया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया और बीजेडी ने इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता करार देते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और शिक्षा मंत्री सूर्यबंशी सूरज के इस्तीफे की मांग की।
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बीजेडी का प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई

बीजेडी ने इस घटना के विरोध में बालासोर में सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक आठ घंटे का बंद आयोजित किया। इस कारण जिले में सामान्य जनजीवन ठप हो गया। बाजार, शैक्षणिक संस्थान बंद रहे और चेन्नई-हावड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग सहित प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। बीजेडी कार्यकर्ताओं ने बालासोर के जालेश्वर, बस्ता, सोरो, बलियापाल और भोगराई जैसे क्षेत्रों में टायर जलाकर और सड़कें अवरुद्ध कर विरोध प्रदर्शन किया।

भुवनेश्वर में बीजेडी कार्यकर्ता मास्टर कैंटीन स्क्वायर से लोक सेवा भवन और ओडिशा विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे। लोअर पीएमजी स्क्वायर के पास पुलिस ने उनकी राह रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग की थी। जब प्रदर्शनकारियों ने पहली बैरिकेड तोड़ दी और दूसरे बैरिकेड को पार करने की कोशिश की तो पुलिस ने पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस दौरान हुई झड़प में बीजेडी के वरिष्ठ नेता प्रणब प्रकाश दास, प्रीति रंजन घड़े, डैनी घड़े और बोबी दास को चोटें आईं। प्रीति रंजन घड़े को पहले कैपिटल अस्पताल ले जाया गया और बाद में भुवनेश्वर के उत्कल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा निषेधाज्ञा का उल्लंघन किए जाने के कारण 100 से अधिक बीजेडी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। नवीन पटनायक ने कहा है कि उनका प्रोटेस्ट शांतिपूर्वक था, लेकिन पुलिस पानी की बौछारें और बल का इस्तेमाल किया।

बीजेडी की मांग क्या है?

बीजेडी ने इस मामले में न्यायिक जांच की मांग की है और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यबंशी सूरज और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। बीजेडी के वरिष्ठ नेता संजय दासबुर्मा ने कहा, 'यह केवल शुरुआत है। हमारी आवाज़ को पुलिस बल से दबाया नहीं जा सकता। हम तब तक प्रदर्शन करेंगे जब तक न्यायिक जांच का आदेश नहीं दिया जाता और मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते।'

बीजेडी उपाध्यक्ष देबी प्रसाद मिश्रा ने कहा, 'लोग इस अन्याय के ख़िलाफ़ ग़ुस्से में हैं। एक छात्रा को न्याय के लिए आग में कूदना पड़ा और सरकार ने उसकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया।' पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी इस घटना की निंदा की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, 'यह अत्यंत दुखद है कि एक नाकाम व्यवस्था ने किसी की जान ले ली। यह दुर्घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था का परिणाम है जो मदद करने के बजाय चुप रही।'
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विपक्ष का समर्थन और राजनीतिक तनाव

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भी इस घटना के ख़िलाफ़ एकजुटता दिखाई है। कांग्रेस ने 17 जुलाई को पूरे ओडिशा में बंद का आह्वान किया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीड़िता के पिता से फोन पर बात की और उन्हें न्याय का आश्वासन दिया। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'बालासोर में न्याय के लिए लड़ने वाली एक बहादुर बेटी की जान चली गई। यह समाज के लिए एक घाव है। मैंने उनके पिता से बात की और कांग्रेस पार्टी की ओर से हर कदम पर साथ देने का वादा किया।'

पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की मृत्यु एक षड्यंत्र थी और उसे कॉलेज में अपनी आवाज उठाने की सजा दी गई। उन्होंने कहा, 'उसे अकेले प्रिंसिपल के कमरे में क्यों बुलाया गया? वहां क्या हुआ? यह हत्या नहीं तो और क्या है?'
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सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस घटना पर दुख जताया और कहा कि दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा दी जाएगी। सरकार ने पीड़िता के परिवार को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और आरोपी प्रोफेसर की गिरफ्तारी की घोषणा की है। हालांकि, बीजेडी ने इसे नाकाफी बताया और कहा कि केवल मुआवजा और गिरफ्तारी से समस्या का समाधान नहीं होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इस मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय तथ्य-खोज समिति का गठन किया है।

इस घटना ने ओडिशा में महिलाओं की सुरक्षा और शैक्षणिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर कार्रवाई की कमी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बीजेडी और कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों ने सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। बालासोर में बंद के दौरान रेल सेवाएं भी प्रभावित हुईं, क्योंकि कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन किया।

बीजेडी ने घोषणा की है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन को और तेज करेंगे। कांग्रेस के नेतृत्व में 17 जुलाई को प्रस्तावित ओडिशा बंद से तनाव और बढ़ने की आशंका है। इस बीच, पुलिस ने भुवनेश्वर में लोक सेवा भवन और विधानसभा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है।