ओडिशा के बालासोर में फकीर मोहन ऑटोनॉमस कॉलेज की 20 वर्षीय छात्रा की सोमवार देर रात भुवनेश्वर के एम्स में मौत हो गई। इस छात्रा ने यौन उत्पीड़न की शिकायत पर कार्रवाई न होने के विरोध में शनिवार को आत्मदाह का प्रयास किया था। छात्रा ने कॉलेज के प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, लेकिन कॉलेज प्रशासन और आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं की तो उसने यह खतरनाक कदम उठाया। इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश फैला दिया है, और विपक्षी दलों ने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी इस पर बयान दिया है।

क्या थी घटना 

छात्रा बीएड कोर्स की द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। उसने 1 जुलाई को कॉलेज की आंतरिक शिकायत समिति को लिखित शिकायत दी थी, जिसमें शिक्षा विभाग के प्रमुख, प्रोफेसर समीर कुमार साहू पर यौन उत्पीड़न और अकादमिक करियर को बर्बाद करने की धमकी देने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के बावजूद, कॉलेज प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। निराश होकर, छात्रा ने 12 जुलाई को प्रिंसिपल के दफ्तर के बाहर पेट्रोल डालकर खुद को आग लगा ली। उसे 90% से अधिक जलने के कारण AIIMS भुवनेश्वर में भर्ती किया गया, जहां सोमवार रात 11:46 बजे उसकी मृत्यु हो गई। AIIMS के बयान के अनुसार, “तीव्र चिकित्सा और रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी सहित सभी संभव प्रयासों के बावजूद, उसे बचाया नहीं जा सका।”

राहुल गांधी ने बताया- घटना के लिए कौन जिम्मेदार 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक तीखा ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “ओडिशा में इंसाफ़ के लिए लड़ती एक बेटी की मौत, सीधे-सीधे BJP के सिस्टम द्वारा की गई हत्या है। उस बहादुर छात्रा ने यौन शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई - लेकिन न्याय देने के बजाय, उसे धमकाया गया, प्रताड़ित किया गया, बार-बार अपमानित किया गया। जिन्हें उसकी रक्षा करनी थी, वही उसे तोड़ते रहे।” राहुल गांधी ने बीजेपी सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया और इस घटना को सिस्टम की विफलता का प्रतीक बताया।
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छात्रा की शिकायत क्या थी 

छात्रा ने अपनी शिकायत में बताया था कि प्रोफेसर साहू पिछले छह महीनों से उसका यौन उत्पीड़न कर रहे थे। उनकी मांग पूरी न करने पर उसको नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी। उसने 1 जुलाई को सोशल मीडिया पर अपनी शिकायत साझा की थी, जिसमें उसने कहा था, “अगर मुझे इंसाफ नहीं मिला, तो मैं आत्महत्या कर लूंगी।” उसके पिता ने आरोप लगाया कि प्रिंसिपल ने उसकी बेटी पर शिकायत वापस लेने का दबाव डाला और प्रोफेसर ने छात्रों का एक समूह बनाकर उसे अपमानित किया।

सरकारी और पुलिस कार्रवाई 

घटना के बाद, ओडिशा पुलिस ने प्रोफेसर समीर कुमार साहू को गिरफ्तार कर लिया, और कॉलेज के प्रिंसिपल दिलीप कुमार घोष को निलंबित कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। ओडिशा के उच्च शिक्षा विभाग ने इस मामले की जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसका नेतृत्व उच्च शिक्षा निदेशक काली प्रसन्न मोहपात्रा कर रहे हैं। समिति को घटना के कारणों, प्रोफेसर की भूमिका, और कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया की जांच करने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने घटना पर अफसोस जताया और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है।

विपक्ष का विरोध और जनाक्रोश 

इस घटना ने ओडिशा में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। बीजू जनता दल (बीजेडी) और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री माझी और उच्च शिक्षा मंत्री सूरज सूर्यबंशी के इस्तीफे की मांग की है। बीजेडी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति से हस्तक्षेप करने की मांग की। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि बीजेपी सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है। सोमवार को, बीजेडी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बालासोर में जिला कलेक्टर के कार्यालय और मुख्यमंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन किए।
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया और ओडिशा के पुलिस महानिदेशक को तीन दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
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मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने X पर लिखा, “फकीर मोहन ऑटोनॉमस कॉलेज की छात्रा की मृत्यु की खबर से मैं अत्यंत दुखी हूँ। सरकार ने सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और विशेषज्ञ चिकित्सा दल ने अथक प्रयास किए, फिर भी पीड़िता का जीवन नहीं बच सका। मैं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूँ और उनके परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना करता हूँ।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि दोषियों को कानून के अनुसार सख्त सजा दी जाएगी।