पंजाब के चुनाव में चरणजीत सिंह चन्नी को क्या जानबूझकर हराया गया। क्या नवजोत सिंह सिद्धू ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी की?
सदियों से हुकुम मानने वाले जल्दी से दलितों को नेता नहीं मानते। बहुजन आंदोलन से दलितों में विभाजन बढ़ा है और पंजाब में भी रामदासिया बनाम मजहबी का सवाल है। दूसरी बात अब दलित पहले जैसा नहीं है कि जब चाहो भेड़ की तरह पीछे हांक दो। कैप्टन अमरिन्दर सिंह के समय में दलितों के साथ न्याय नहीं हुआ था।