मोदी सरकार इस मामले में ग़लत साबित हो चुकी है कि लॉकडाउन से कोरोना का संक्रमण रुक जाएगा। अब उसे जल्द से जल्द आर्थिक गतिविधियों को शुरू करना चाहिए।
प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी के नेता भले ही अपनी पीठ ठोकते रहें मगर न केवल लॉकडाउन का फ़ैसला ग़लत साबित हो रहा है, बल्कि उसे लागू करने के तरीक़े में भी खामियाँ उभरकर सामने आई हैं।
तीसरा लॉकडाउन लागू होने के बाद जिन इलाक़ों में ढील दी गई है, वहाँ भी अब कोरोना के फैलने की आशंका बढ़ गई है, क्योंकि सोशल डिस्टेंसिंग का ठीक ढंग से पालन होना संभव नहीं रह गया है।
अगर इन मज़दूरों को उन्हीं प्रदेशों में सहायता और सुरक्षा प्रदान कर दी गई होती तो शायद बहुत सारे मज़दूर वहीं रुक जाते और आर्थिक गतिविधियों पर कम असर पड़ता। मगर सरकार के पास दूरदृष्टि होती तभी तो वह इन पहलुओं के बारे में सोच पाती। वह तो घोषणा करके भी उन लोगों तक सही समय पर मदद नहीं पहुँचा सकी जो अपने गाँवों-घरों में ही थे।
अब मोदी सरकार के पास इसके अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है कि लॉकडाउन को हटाकर आर्थिक गतिविधियों को शुरू करे। ज़ाहिर है कि वह फिर से बिना ठोस योजना के आगे बढ़ रही है या यूँ कहें कि अँधेरे में हाथ-पाँव मार रही है, इसलिए इसमें हर तरह के जोखिम हैं।