अपने बयानों से पहले भी कई बार कांग्रेस नेतृत्व को मुसीबत में डाल चुके झा पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने कहा था कि बीजेपी की कठपुतलियों द्वारा ऐसा प्रचार किया जा रहा है। लेकिन तब भी सवाल उठा था कि कांग्रेस आख़िर कब तक अध्यक्ष के चयन के सवाल से बचेगी।
राहुल ने युवक कांग्रेस और एनएसयूआई में आंतरिक चुनाव भी कराए। इससे वे युवा नेता जो अब तक पद के लिए बड़े नेताओं के सहारे थे, अपने दम पर आगे आने लगे और सरकार व संगठन के पदों को लेकर दावेदारी करने लगे जिससे वरिष्ठ नेताओं के अहं को चोट पहुंची।
पिछले डेढ़ साल में ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर अशोक तंवर, कुलदीप बिश्नोई, मिलिंद देवड़ा, जितिन प्रसाद, संदीप दीक्षित, सचिन पायलट जैसे कई नेता हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि पार्टी हाईकमान उनकी बात नहीं सुनता।
मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान और पंजाब से लेकर उत्तराखंड सहित कई राज्यों में पार्टी के क्षत्रपों में झगड़ा जोरों पर है और ऐसे में नेतृत्व संकट का मसला और गंभीर हो गया है। क्योंकि ऐसे झगड़े बढ़ने से पार्टी के अस्तित्व पर सवाल खड़ा हो रहा है।
कांग्रेस में नेतृत्व संकट का मसला अब एआईसीसी दफ़्तर से निकलकर न्यूज़ चैनलों और आम आदमी की जुबान तक आ चुका है। सवा सौै साल से ज़्यादा पुरानी इस पार्टी की ऐसी हालात पर कट्टर कांग्रेसी बेहद चिंतित हैं।