देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति की समीक्षा करने और आगामी रणनीति तैयार करने के लिए विपक्षी दलों का गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) एक लंबे अंतराल के बाद आगामी 6 जून को एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य एजेंडा  "विपक्षी राजनीति - आगे की राह" (Opposition politics - the way forward) तय किया गया है।

बैठक की मुख्य वजह और चुनौतियाँ

विपक्षी दल लगातार महत्वपूर्ण राज्य खोने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि उनकी आपसी तालमेल और बेतुकी महत्वाकांक्षाओं  की वजह से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार अपनी पकड़ मजबूत करती जा रही है। इसके साथ ही, हाल के दिनों में क्षेत्रीय दलों की स्थिति भी काफी कमजोर हुई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में मुख्य रूप से वोटर लिस्ट (Electoral Rolls) और 'एसआईआर' (SIR) को लेकर विपक्ष की चिंताओं पर चर्चा हावी रह सकती है।

ममता बनर्जी और राहुल गांधी का रुख

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि देश को इस बात को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है कि चुनाव किस तरह से कराए जा रहे हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया था कि वहां भाजपा ने चुनाव को "चुरा" लिया है।
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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सत्ता से बेदखल होना पड़ा है। तब से ममता बनर्जी लगातार विपक्षी दलों की बैठक बुलाने की मांग कर रही थीं। हालांकि टीएमसी अक्सर गठबंधन से अलग और स्वतंत्र रुख अपनाती रही है, लेकिन चुनाव नतीजों के बाद से उसके तेवर काफी सुलह वाले नज़र आ रहे हैं। राहुल गांधी ने भी मतभेदों को भुलाकर "लोकतंत्र को बचाने" के लिए मिलकर काम करने की ज़रूरत पर बल दिया है।

गठबंधन के आंतरिक समीकरण और चुनौतियाँ

इस बैठक में कुछ क्षेत्रीय दलों की भूमिका बेहद दिलचस्प और देखने लायक होगी:
द्रमुक (DMK) का रुख: तमिलनाडु में डीएमके 'इंडिया' गठबंधन का एक प्रमुख हिस्सा रही है, लेकिन हाल ही में कांग्रेस ने डीएमके से अपने रिश्ते तोड़कर अभिनेता विजय की पार्टी TVK के साथ हाथ मिला लिया, जिसने तमिलनाडु में सरकार बनाई है। ऐसे में डीएमके का इस बैठक में शामिल होना काफी अहम रहेगा।
CPM की नाराज़गी: केरल में माकपा (CPM) को हाल ही में कांग्रेस के हाथों अपनी सत्ता गंवानी पड़ी है। सत्ता गंवाने के बाद से ही माकपा लगातार कांग्रेस पर हमलावर रुख अपनाए हुए है।

क्या विपक्ष का विश्वास बहाल हो पाएगा

6 जून को होने वाली 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की बैठक हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिका है। राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ एकजुट होने की इच्छा के बावजूद, राज्यों के स्तर पर पैदा हुए नए टकरावों के कारण पूर्ण तालमेल बैठाना एक अत्यंत कठिन चुनौती नजर आ रहा है। इस बैठक में डीएमके, सीपीएम, कांग्रेस और टीएमसी के बीच आपसी विश्वास बहाल करना ही सबसे बड़ा एजेंडा होगा।
इंडिया गठबंधन में इस समय डीएमके और कांग्रेस की ज़बरदस्त ठनी हुई है। हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने पुराने और भरोसेमंद साथी डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके (TVK) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में शामिल होने का फैसला किया। कांग्रेस के इस कदम से एम.के. स्टालिन की पार्टी डीएमके बेहद असहज और नाराज है। ऐसे में 6 जून की बैठक में डीएमके के लिए कांग्रेस के साथ मंच साझा करना और राष्ट्रीय स्तर पर फिर से किसी बड़े तालमेल के लिए हामी भरना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।

केरल में कांग्रेस और सीपीएम के रिश्ते कैसे सहज हो पाएंगे

दूसरी ओर, केरल के चुनावी नतीजों ने वामपंथी दल सीपीएम (CPM) और कांग्रेस के बीच कड़वाहट को चरम पर पहुंचा दिया है। केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) ने भारी बहुमत (102 सीटें) हासिल कर सीपीएम के नेतृत्व वाले एलडीएफ (LDF) को सत्ता से बेदखल कर दिया है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की हार और राज्य में सत्ता गंवाने के बाद से सीपीएम का शीर्ष नेतृत्व कांग्रेस पर लगातार हमलावर है। केरल में पारंपरिक रूप से आमने-सामने लड़ने वाले ये दोनों दल राष्ट्रीय स्तर पर वैचारिक रूप से एक साथ तो दिखते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सीपीएम के कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए कांग्रेस के साथ तुरंत सहज हो पाना फिलहाल नामुमकिन सा लग रहा है।
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पश्चिम बंगाल के समीकरण ने इस तालमेल को और पेचीदा बना दिया है। ममता बनर्जी के साथ सीपीएम और कांग्रेस दोनों का ही 'छतीस का आंकड़ा' रहा है। जहां एक तरफ कांग्रेस ने तमिलनाडु में डीएमके को झटका दिया और केरल में सीपीएम को हराया, वहीं बंगाल में कांग्रेस और वामदल मिलकर टीएमसी के खिलाफ लड़ते रहे हैं। इन परिस्थितियों में, 6 जून की बैठक में केवल 'लोकतंत्र बचाने' या 'सत्तारूढ़ दल के खिलाफ' जाने के बड़े बयानों पर सहमति बन सकती है, लेकिन राज्यों के वास्तविक नुकसान और बदले राजनीतिक हालातों को देखते हुए डीएमके और सीपीएम का कांग्रेस-टीएमसी के साथ पूरी तरह दिल से तालमेल बैठाना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।
इन तमाम आंतरिक मतभेदों और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच, 6 जून को होने वाली यह बैठक 'इंडिया' गठबंधन के भविष्य और एकजुटता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।