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केजरीवाल रविवार को कुरुक्षेत्र में, हरियाणा का रास्ता 'आप' तय कर पाएगी?

हरियाणा में विधानसभा चुनाव 2024 में होंगे लेकिन आम आदमी पार्टी (आप) अभी से चुनाव मोड में आ गई है। आप प्रमुख अरविन्द केजरीवाल 29 मई को कुरुक्षेत्र में एक रैली को संबोधित करने वाले हैं। पंजाब विधानसभा के चुनाव नतीजे आने के बाद ही आप ने अपने हरियाणा मिशन की शुरुआत कर दी थी। केजरीवाल मूल रूप से हरियाणा में भिवानी के रहने वाले हैं। लेकिन हरियाणा में पार्टी की यूनिट ठीक से खड़ी न होने के कारण बात आगे नहीं बढ़ सकी।
केजरीवाल ने दिल्ली महिला आयोग की चेयरमैन स्वाती मालीवाल के पूर्व पति नवीन जयहिन्द को हरियाणा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था लेकिन नवीन कोई करिश्मा दिखा नहीं सके। फरीदाबाद से उन्होंने चुनाव लड़ा और जमानत जब्त हो गई। इसके बाद हरियाणा से ही जुड़े आप के राज्यसभा सदस्य सुशील गुप्ता को हरियाणा का प्रभारी बनाया गया लेकिन पार्टी जिन्दा नहीं हो सकी। हरियाणा में आप के पास अभी दमदार नेताओं की कमी है। कांग्रेस की हालत भले ही अन्य राज्यों में पतली हो लेकिन हरियाणा में उसकी स्थिति बेहतर है। हरियाणा में राजनीति जाट वोटरों के आसपास घूमती है। कांग्रेस के पास भूपिंदर सिंह हुड्डा जैसा कद्दावर नेता है।
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हरियाणा को लेकर केजरीवाल ने 'हरियाणा में भी केजरीवाल' और 'अब बदलेगा हरियाणा' जैसे नारे दिए हैं। पार्टी के सूत्रों ने कहा कि नगर निगम और पंचायती राज चुनावों से पहले चुनावी बिगुल फूंकने के लिए कुरुक्षेत्र में रैली का आयोजन किया जा रहा है।

कुरुक्षेत्र रैली को सफल बनाने के लिए पार्टी ने पूरी ताकत लगा दी है। आप के राज्य नेतृत्व ने जिलों में लगभग 1,500 बैठकें कोने-कोने में कीं और दावा किया कि रैली में लगभग दो लाख लोग शामिल होंगे। आप के हरियाणा प्रभारी सुशील गुप्ता ने कहा, रैली ऐतिहासिक होगी और हरियाणा की राजनीति में बदलाव का संदेश देगी। 
उन्होंने कहा कि रैली का आयोजन भ्रष्टाचार, बढ़ती बेरोजगारी, अपराध, स्कूलों और अस्पतालों की खराब स्थिति सहित बुनियादी मुद्दों पर चर्चा के लिए किया जा रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या पंजाब में पार्टी की जीत से उसे हरियाणा में मदद मिलेगी, राज्यसभा सांसद ने कहा, हरियाणा में आप के पक्ष में लहर है। बहरहाल, पंजाब में सत्ता हासिल करने के बाद आप ने हरियाणा में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं और पार्टी नेताओं ने कहा कि लोगों के जल्द ही पार्टी में शामिल होने की संभावना है।

आप अब तक 2019 के विधानसभा चुनावों में हरियाणा में कोई खास उपस्थिति दर्ज कराने में नाकाम रही, जहां उसे 46 विधानसभा सीटों में से केवल 59,839 वोट मिले।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पंजाब में जीत से पार्टी को हरियाणा में पैठ बनाने में मदद मिल सकती है, लेकिन केजरीवाल को चंडीगढ़ और एसवाईएल के अनसुलझे मुद्दों पर विवादों का मुकाबला करने के लिए हरियाणा और पंजाब के बीच संतुलन बनाना होगा।
आप की रैली का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है कि क्योंकि सत्तारूढ़ बीजेपी भी सिरसा में एक रैली आयोजित कर रही है और कांग्रेस के भूपिंदर सिंह हुड्डा उसी दिन फतेहाबाद में एक 'विपक्ष आपके समक्ष' कार्यक्रम आयोजित करेंगे।

जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) भी 29 मई को टोहाना में एक रैली करने की योजना बना रही थी, लेकिन अब ऐसी खबरें हैं कि वह इस कार्यक्रम को स्थगित कर सकती है।

कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में पोलिटिकल साइंस के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ रामजी लाल का कहना है कि पंजाब जीतने के बाद, आप को हरियाणा में विस्तार की संभावनाएं तलाशना चाहिए। चूंकि हरियाणा भी कृषि आंदोलन का केंद्र था। आप सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ गुस्से को भुनाने की कोशिश कर सकती है। उन्होंने कहा, चूंकि कांग्रेस आंतरिक कलह से पीड़ित है और चौटाला परिवार में बंटवारे के बाद आईएनएलडी ठीक नहीं हो सकी, आप को एक फायदा है, लेकिन लोग यह भी देख रहे होंगे कि केजरीवाल चंडीगढ़ और एसवाईएल के मुद्दों पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।

 

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पंजाब चुनाव नतीजे आने के बाद हरियाणा में कांग्रेस के पूर्व नेता अशोक तंवर ने आप में शामिल होने की घोषणा की थी। तंवर हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे थे। अशोक तंवर की भूपिंदर सिंह हुड्डा से पटी नहीं तो तंवर को कांग्रेस छोड़कर जाना पड़ा। हरियाणा के पूर्व मंत्री निर्मल सिंह भी तंवर के साथ आप में आए थे। कांग्रेस छोड़ने के बाद अशोक तंवर ने अपनी पार्टी बनाई थी। उसके बाद वो तृणमूल कांग्रेस में चले गए। अब टीएमसी छोड़क आप का दामन थाम लिया है। देखा जाए तो आप में शामिल होने वाले नेता बहुत दमदार नहीं हैं। आम आदमी पार्टी को अभी भी एक ऐसे लोकप्रिय चेहरे की तलाश है जो आप को हरियाणा में जमीन पर खड़ा कर सके।
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