बीएमसी चुनाव में धारावी के वार्ड 183 से कांग्रेस उम्मीदवार आशा दीपक काले ने जीत हासिल की। इस जीत ने सभी को चौंका दिया है। क्योंकि मुंबई में महायुति प्रचंड जीत की ओर बढ़ रही है। आशा दीपक काले ने शिवसेना (शिंदे गुट) की उम्मीदवार वैशाली शेवाले को 1,450 वोटों के अंतर से हराया। वैशाली शेवाले पूर्व सांसद राहुल शेवाले की भाभी हैं।

आशा काले ने अपनी जीत के बाद कहा, "हमारी सांसद वर्षा गायकवाड़ और विधायक ज्योति गायकवाड़ के समर्थन से यह जीत मिली है। यह हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं की जीत है।"

यह जीत एशिया के सबसे बड़े झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र धारावी में कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है, जहां पार्टी को पहले सफलता नहीं मिल पाई थी। यह नतीजा केंद्रीय मुंबई में स्थापित राजनीतिक गढ़ों को चुनौती देने का संकेत दे रहा है।

आशा दीपक काले कांग्रेस की एक साधारण कार्यकर्ता हैं। लेकिन यहां से कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ और विधायक ज्योति गायकवाड़ ने उन्हें पार्टी का टिकट दिलाने और उनके लिए लगातार प्रचार करने की जिम्मेदारी निभाई। यही वजह है कि आशा दीपक काले को यह जीत हासिल हुई। धारावी में कांग्रेस की यह पहली जीत है, जो एशिया के सबसे बड़े झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। यहां पहले कांग्रेस को सफलता नहीं मिल पाई थी, जहां शिवसेना जैसे प्रतिद्वंद्वी मजबूत रहे हैं। 

सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं आशा दीपक काले

उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और चुनाव कवरेज से पता चलता है कि आशा के पास पहले से कोई बड़ा राजनीतिक पद (जैसे पूर्व पार्षद, पार्टी पदाधिकारी या अन्य चुनावी इतिहास) नहीं था। वे मुख्य रूप से एक सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में जानी जाती हैं, जो लंबे समय से पार्टी की स्थानीय इकाई से जुड़ी हैं। धारावी जैसे गरीब और घनी आबादी वाले इलाके में वे सामाजिक कार्य करती रही हैं। उन्होंने पानी, सफाई, विकास, रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट और बुनियादी सुविधाओं जैसे स्थानीय मुद्दों पर पहले भी आवाज उठाई है। उनकी उम्र लगभग 45 वर्ष बताई जा रही है और वे एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी पहचानी जाती हैं।

यह जीत उन्हें मुंबई की स्थानीय राजनीति में एक उभरती हुई महत्वपूर्ण शख्सियत बनाती है, खासकर उन केंद्रीय वार्डों में जहां कांग्रेस महायुति (बीजेपी-शिवसेना) गठबंधन को चुनौती देना चाहती है। 

धारावी में जीत की अन्य वजह

धारावी एशिया की विशाल झुग्गी बस्ती है। जहां की ज़मीन को अडानी समूह को फिर से इस इलाके के विकास के लिए दे दी गई है। इस ज़मीन पर बसे लोगों को दूसरी जगह बसाया जा रहा है। कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना दिया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने अडानी समूह को ज़मीन दिलाने में हुए कथित घोटाले और जनविरोधी शर्तों को निशाना बनाया। धारावी को न सिर्फ उजाड़ा जा रहा है, बल्कि यहां जो छोटे-छोटे उद्योग घरों में चल रहे थे, वे भी बर्बाद हो गए। बड़ी संख्या में यहां पेड़ काटे गए। इन मुद्दों ने यहां की आबादी को प्रभावित किया। इस गुस्से का फायदा कांग्रेस प्रत्याशी आशा दीपक काले को मिले। इस इलाके में शिवसेना शिंदे का गढ़ रहा है, लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा। धारावी की जीत ने स्थापित गढ़ों को चुनौती दी है। कोई साधारण कार्यकर्ता भी जीत सकता है, इस नतीजे ने वो उम्मीद बंधा दी है।
बीएमसी के कुल 227 वार्डों में मतदान हुआ था, जिसमें मतदान प्रतिशत 52.94% रहा, जो 2017 के 55.53% से कम है। शहर में 1.03 करोड़ से अधिक मतदाता थे और लगभग 1,700 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। मतगणना सुबह 10 बजे से 25 केंद्रों पर शुरू हुई है।