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राजनाथ जी, ये कर दिया, शेर किसी और का, किसी और के नाम कर दिया

भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में शेरो-शायरी शुरू हो गई है। संकट के इस दौर में नेताओं का अंदाजे बयाँ बदल गया है। विपक्ष जहाँ शायरी में सवाल कर रहा है तो सत्ता पक्ष भी एक कदम आगे आकर शायरी में ही पलटवार कर रहा है। लेकिन इस सियासी मुशायरे के कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का दाँव उलटा पड़ गया।

मंज़र लखनवी के शेर को बताया ग़ालिब का

राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर पलटवार करने के लिए ट्वीट किया- 'हाथ में दर्द हो तो दवा कीजै, यदि हाथ ही दर्द हो तो क्या कीजै।

इस शेर को उन्होंने मिर्ज़ा ग़ालिब के शेर की तर्ज पर बताया। राजनाथ सिंह ने लिखा ‘मिर्ज़ा ग़ालिब का ही शेर थोड़ा अलग अंदाज़ में है’। जिसके बाद वो सबसे पहले तो कांग्रेस पार्टी और उनके नेताओं के निशाने पर आ गए। और बाद में लोगों ने भी उनको मंज़र लखनवी की याद दिला दी।
दरअसल, राजनाथ ने जो शेर ट्वीट किया है वो मंज़र लखनवी के शेर में बदलाव किया हुआ है। उससे ग़ालिब का कोई संबंध नहीं है। इस शेर का असल स्वरूप इस प्रकार है- 

दर्द हो दिल में तो दवा कीजै, और जो दिल ही न हो तो क्या कीजै।


मंज़र लखनवी

छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने लपेटा

छत्तीसगढ़ कांग्रेस की ओर से एक ट्वीट में लिखा, एक काबिल का ही शेर थोड़ा अलग अन्दाज में है.'सवालों' की आंच हो तो हवा कीजै,'सवाल' ही जब आंच हो तो 'कड़ी निंदा; कीजै..

सुरजेवाला का भी शायराना पलटवार 

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी राजनाथ सिंह को निशाने पर लिया। सुरजेवाल ने लिखा - आदरणीय राजनाथ जी,सवाल पूछो तो सवाल पूछते हैं,हुकूमत वाले अब जुबान पूछते हैं,कुछ बाजुए ताक़त तो आज़माइए जनाब,हम हिंदुस्तान हैं, लाल आँख का अंजाम पूछते हैं।

कहाँ से हुई शुरुआत?

दरअसल ये पूरा सियासी मुशायरा राहुल गाँधी की शायरी के बाद से शुरू हुआ। राहुल गाँधी ने अमित शाह के सीमा वाले बयान पर तंज कसते हुए एक शायरी ट्वीट की थी- 
सब को मालूम है ‘सीमा’ की हक़ीक़त लेकिन, दिल के ख़ुश रखने को, ‘शाह-यद’ ये ख़्याल अच्छा है।
राहुल का यह ट्वीट मशहूर शायर मिर्जा ग़ालिब की उस शायरी की तर्ज पर है जिसमें कहा गया है - हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है।
राहुल ने इस शेर से अमित शाह के इस बयान पर तंज कसा है जिसमें उन्होंने भारत की सीमाओं के पूरी तरह सुरक्षित होने की बात कही थी। शाह ने रविवार को हुई बीजेपी की वर्चुअल रैली में भाषण के दौरान कहा था, ‘भारत की रक्षा नीति को वैश्विक स्तर पर स्वीकृति मिली है। पूरी दुनिया जानती है कि अमेरिका और इजरायल के बाद अगर कोई देश है, जो अपनी सीमाओं की रक्षा कर सकता है, वह भारत है।’ 

राजनाथ सिंह की शायरी पर लोगों की प्रतिक्रिया

कीर्तीश भट्ट ने लिखा है - ये फ़िक्र छोड़ कि कैसे गुज़ारा होगा।आ यहाँ आकर बैठ, आज मुशायरा होगा।
बिहार की जनअधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव ने लिखा, यह मंजर लखनवी का शेर है मिर्ज़ा ग़ालिब का नहीं याद है न आप अभी लखनऊ से सांसद हैं!
शमशेर मेमन नाम के ट्वीटर हैंडल ने लिखा है- रक्षामंत्री - मिर्जा गालिब और मजर लखनवी में फर्क नहीं पता कमाल है…बिल्कुल फेसबुकिया आशिकों वाला हाल है, शायरी किसी की भी क्रेडिट तो चीचा गालिब को ही दें
शिवम कुमार ने लिखा है-कल राजनाथ सिंह ने शायरी लिखी और नाम ग़ालिब चचा का दिया ,आज अगर मंजर लखनवी होते तो इसकी कड़ी निंदा करते , दरसअल ये पंक्तियां मंजर लखनवी की है , बस राजनाथ सिंह जी ने दिल की जगह हाथ रख दिया है ।
नितिन नाम के यूज़र ने लिखा है -राजनाथ सिंह जी "कड़ी" शायरी करते हुए।

राजनीति में शायरी नई नहीं

बता दें, राजनीति में शायराना अंदाज़ नया नहीं है। महाराष्ट्र में चुनाव के बाद जो सियासी उठपटक हुई थी। उसमें देश ने संजय राउत में एक शायर देख लिया था। वो हर बयान शायरी में ही दे रहे थे।
जिसके बाद बाकी नेताओं ने भी ट्विटर पर शायराना माहौल बना दिया था। इसके अलावा, अक्सर देश का बजट शायराना भाषण के बीच पेश किया जाता है। लेकिन कभी-कभी शायरी से यारी भारी भी पड़ जाती है। जैसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पड़ गई और लोगों ने कहा- चौबे जी चले थे छब्बे जी बनने दुबे जी बनके लौटे।

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