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शिव सेना के बदले सुर, बोली- सत्ताधारियों में राहुल का ख़ौफ़

बीते कुछ दिनों में राहुल गांधी की लीडरशिप पर सवाल उठाने वाली शिव सेना ने अपने सुर बदल लिए हैं। शिव सेना ने अपने ताज़ा संपादकीय में लिखा है कि दिल्ली के सत्ताधारियों में राहुल गांधी का ख़ौफ़ है। 

महाराष्ट्र में मिलकर सरकार चला रहे शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर तब सवाल उठे थे जब सामना में एनसीपी प्रमुख शरद पवार की तारीफ़ में कसीदे काढ़े गए थे और शिव सेना ने उन्हें यूपीए का चेयरपर्सन बनाने की वकालत की थी। इसके अलावा एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा था कि राहुल गांधी में एकाग्रता की कमी है। 

शिव सेना सांसद संजय राउत ने भी कहा था कि कांग्रेस अब कमजोर हो चुकी है इसलिए विपक्षी दलों को साथ आने और यूपीए को मजबूत करने की ज़रूरत है। तब कांग्रेस खेमे में इस तरह की ख़बरों को लेकर नाख़ुशी जताई गई थी। लेकिन लगता है कि अब मामला ट्रैक पर आ रहा है और शिव सेना के मुखपत्र सामना के ताज़ा संपादकीय में राहुल गांधी की जमकर तारीफ़ की गई है। 

ताज़ा ख़बरें

सामना के संपादकीय में लिखा है, ‘राहुल फिर से कांग्रेस के अध्यक्ष बन रहे हैं, ये अच्छी बात है। बीजेपी के लिए मोदी के बिना और कांग्रेस के लिए गांधी के बिना कोई विकल्प नहीं है, इस सच को स्वीकार करना होगा। कुछ समय के लिए गांधी के दूर जाते ही पार्टी की पकड़ जहां थी, वहां से कमजोर ही हुई। अब फिर से गांधी आ रहे हैं।’ 

वाड्रा के मामले में टिप्पणी

संपादकीय में आगे लिखा है कि एक ओर राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद स्वीकार करने के लिए हामी भरी तो दूसरी ओर प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के घर आयकर विभाग का दस्ता पहुंच गया और यह बिल्कुल भी संयोग नहीं है। सामना आगे लिखता है कि राहुल फिर से कांग्रेस के अध्यक्ष बन रहे हैं और इसी पीड़ा से आगे बहुत कुछ होने वाला है। कुछ दिन पहले ही आयकर विभाग ने वाड्रा के दिल्ली स्थितर घर और दफ़्तर पर पहुंचकर उनसे घंटों तक पूछताछ की थी। 

देखिए, संजय राउत से खास बातचीत- 

बीजेपी पर हमला 

बीजेपी पर हमलावर होते हुए संपादकीय कहता है, ‘रॉबर्ट वाड्रा हमेशा से बीजेपी के निशाने पर रहे हैं लेकिन गत 6-7 सालों से केंद्र में उनकी सरकार है और गांधी परिवार के विरोध में हर तरह का शस्त्र प्रयोग किया जा चुका है। ये सिर्फ रॉबर्ट वाड्रा को लेकर है, ऐसा नहीं है। बीजेपी के विरोध में खड़े हर व्यक्ति पर इस प्रकार के हमले हो रहे हैं।’ 

निशाने पर ईडी

ईडी पर सवाल उठाते हुए संपादकीय में कहा गया है कि क्या देश के बीजेपी नेता और उन्हें धनापूर्ति करने वाले व्यापारी पाक साफ हैं और केंद्रीय जांच एजेंसी की दृष्टि में उनका व्यवहार साफ-सुथरा है? 

मुलुंड के एक नेता द्वारा ईडी को सौंपे गए सबूतों की बात कहते हुए इस जांच एजेंसी से पूछा गया है कि वह कुछ भ्रष्ट नेताओं के ख़िलाफ़ मिले सबूतों को लेकर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है? 

Shivsena praises rahul gandhi in samna editorial - Satya Hindi

‘पीएम केयर्स फंड’ पर सवाल

संपादकीय में यह भी पूछा गया है कि काले धन वालों ने ‘पीएम केयर्स फंड’ में गुप्त दान करके क्या खुद को शुद्ध करवा लिया है और इसकी जांच किस अदालत में होगी? शिव सेना ने मोदी सरकार की तीख़ी आलोचना करते हुए कहा है कि विरोधी दल से मतभेद हो सकते हैं लेकिन विरोधी दल का गला दबाकर उनके शव को दिल्ली के विजय चौक में लटकाने की नीति धक्कादायक है। 

संपादकीय में आगे लिखा है, ‘राहुल गांधी कमजोर नेता हैं’ का प्रचार करके भी राहुल खड़े हैं और सरकार पर लगातार हमले कर रहे हैं। दिल्ली के सत्ताधारियों को राहुल गांधी से डर लगता है। अगर ऐसा नहीं होता तो गांधी परिवार की बदनामी की सरकारी मुहिम नहीं चलाई गई होती।’

गठबंधन धर्म को निभाते हुए और राहुल का जोरदार समर्थन करते हुए सामना में लिखा गया है, ‘लड़ाका भले ही अकेला रहे उससे तानाशाह को डर लगता है और अकेला योद्धा प्रामाणिक होगा तो यह डर सौ गुना बढ़ जाता है। राहुल गांधी का डर सौ गुना वाला है।’

राजनीति से और ख़बरें

लोकसभा चुनाव 2019 के बाद से कांग्रेस लगातार कमजोर हो रही है। बिहार चुनाव में ख़राब प्रदर्शन के बाद उसे अपने सहयोगी आरजेडी और वाम दलों की खरी-खोटी सुननी पड़ी थी। साथ ही पार्टी के भीतर भी कई नेताओं ने इसे लेकर नाराज़गी जताई थी कि आलाकमान कई अहम मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहा है। 

शिव सेना सांसद संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत को ईडी द्वारा समन किए जाने के बाद महा विकास अघाडी सरकार के तीनों दल और नज़दीक आए हैं। वे जानते हैं कि बीजेपी उनकी सरकार को गिराने की लगातार कोशिश कर रही है और इसके लिए एजेंसियों का सहारा ले रही है।
लेकिन अब ऐसी ख़बरें हैं कि कांग्रेस में अध्यक्ष पद का संकट सुलझ सकता है। शिव सेना का यह ताज़ा रूख़ बताता है कि महा विकास अघाडी सरकार में शामिल दलों के बीच में रिश्ते ठीक हो रहे हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए राज्य की सत्ता में वापसी कर पाना मुश्किल होगा। 
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