रूस से तेल खरीदने को लेकर अब अमेरिकी सांसद द्वारा भारत को 'धमकी' दिए जाने के मामले में भारत में बवाल मच गया है। रूसी तेल पर प्रतिबंध लागने वाले बिल के पास होने के बाद अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन को रूस से तेल खरीदना बंद करने की चेतावनी देते हुए कहा कि दोनों देशों को अपना बर्ताव सुधारना चाहिए और अपना तेल-गैस कहीं और से खरीदना चाहिए। ब्लूमेंथल के इस बयान को कांग्रेस ने भारत के खिलाफ अमेरिकी धमकी बताया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अमेरिकी दबाव के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से पर्याप्त राजनीतिक जवाब नहीं दिया जा रहा है।

यह नया बवाल तब खड़ा हुआ जब अमेरिकी हाउस ऑफ़ रिप्रजेंटेटिव्स ने रूस के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंधों वाले एक व्यापक विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। भारत और चीन उन देशों में शामिल हैं जिन पर यह प्रावधान लागू किया जा सकता है। हालाँकि, यहाँ यह साफ़ करना ज़रूरी है कि अमेरिकी विधेयक अभी भारत पर 100 फीसदी टैरिफ अपने-आप नहीं लगाता। यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को ऐसा टैरिफ़ लगाने का अधिकार देता है। विधेयक अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है।
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ब्लूमेंथल ने भारत, चीन से क्या कहा?

रूस पर दबाव बढ़ाने वाले विधेयक पर अमेरिका के हाउस ऑफ़ रिप्रजेंटेटिव्स में मतदान के बाद सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन को सीधे संबोधित किया। उन्होंने कहा, 'चीन और भारत, बेहतर होगा कि आप अपने व्यवहार में सुधार लाएं। अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदें। तुष्टीकरण कोई रणनीति नहीं है।'

ब्लूमेंथल डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर हैं और इस विधेयक के प्रमुख समर्थकों में रहे हैं। यह विधेयक दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर है और रूस तथा ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर दबाव डालकर मास्को की ऊर्जा आय को कम किया जा सकता है और यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सकता है।

कांग्रेस ने क्या आरोप लगाया?

अमेरिकी सीनेटर ब्लूमेंथल के बयान और अमेरिकी विधेयक के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस ने कहा कि अमेरिका की ओर से भारत को रूस से तेल न खरीदने की खुली चेतावनी दी जा रही है और भारत पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का रास्ता तैयार किया जा रहा है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अमेरिकी दबाव के सामने सरकार की प्रतिक्रिया कमजोर है।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिकी सीनेटर ने भारत से कहा है कि वह अपना व्यवहार सुधारे और रूस से तेल खरीदना बंद करे। पार्टी ने आरोप लगाया कि ऐसी धमकी के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी की ओर से कोई सार्वजनिक जवाब नहीं आया।

कांग्रेस ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार अमेरिका को खुश करने के लिए कई फ़ैसले ले रही है। पार्टी ने यूपीआई शुल्क, पाकिस्तान के साथ युद्धविराम और अमेरिकी टैरिफ़ के मुद्दों को एक साथ जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "अमेरिका की भारत को खुली धमकी! भारत समेत पाँच देशों पर 100% टैरिफ़ वाला बिल कांग्रेस में पास होने के बाद US सिनेटर ब्लूमेंथल- 'भारत के लिए बेहतर होगा कि आप सुधार जायें। अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदें'। इस धमकी के बावजूद मोदी जी के मुँह से एक शब्द नहीं फूट रहा - लानत है।" कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने भी कहा कि 'प्रधानमंत्री खामोश रहें.. इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा?'

क्या भारत पर लग गया 100% टैरिफ?

अभी भारत पर 100 फीसदी टैरिफ नहीं लगा है। अमेरिकी संसद ने जिस विधेयक को मंजूरी दी है वह राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से तेल या गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। यह कोई तत्काल लागू हो चुका 100 फीसदी शुल्क नहीं। ट्रंप के पास इस अधिकार का इस्तेमाल करने का निर्णय रहेगा।

अमेरिकी सीनेट इस विधेयक को पहले ही 86-11 के वोट से पारित कर चुकी थी। हाउस ऑफ़ रिप्रजेंटेटिव्स में इसे 262-159 वोटों से मंजूरी मिली। अब इसे कानून बनने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर की जरूरत है। विधेयक में रूस के अधिकारियों, बैंकों और उसकी ऊर्जा सप्लाई को जारी रखने वाले तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ यानी प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तेल टैंकरों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके अलावा ईरान पर भी प्रतिबंधों को बढ़ाने की व्यवस्था है।

भारत क्यों निशाने पर है?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने और पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद बढ़ाई।
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भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसके तेल आयात का मुख्य आधार देश की ऊर्जा सुरक्षा, क़ीमत और उपलब्धता है। भारत का तर्क रहा है कि बड़ी आबादी और बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए उसे भरोसेमंद और किफायती ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना ज़रूरी है। नई दिल्ली ने यह भी साफ़ किया है कि वह केवल रूस से ही तेल नहीं खरीदता, बल्कि अलग-अलग देशों से अपनी ऊर्जा जरूरतों के मुताबिक़ तेल लेता है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत की ऊर्जा खरीद बदलती बाजार परिस्थितियों पर आधारित है।

भारत ने अमेरिका को क्या जवाब दिया?

अमेरिकी संसद में विधेयक पारित होने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार घटनाक्रम पर नज़र रख रही है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ भारत 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा खरीद जारी रखेगा। मंत्रालय ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर इस मुद्दे पर बातचीत हुई है। भारत ने अमेरिका को यह भी बताया है कि प्रस्तावित कदमों का असर केवल दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। भारत ने अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का संकल्प भी जताया है।