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बिहार चुनाव के वक़्त ही महबूबा को क्यों रिहा किया: कांग्रेस

जनसंघ के जमाने से कश्मीर से धारा 370 को हटाने की राजनीति कर रही बीजेपी ने 2019 में सत्ता में धमाकेदार वापसी करने के बाद इसे हटा ही दिया। लेकिन इसके साथ ही कश्मीर में उसके इस फ़ैसले की मुख़ालफत शुरू हुई और वहां के नेताओं को नज़रबंद करने से लेकर उनके रिहा होने तक एक साल का संघर्ष चला। 

अब रिहा हो चुके नेताओं ने एक बार फिर से कश्मीर में धारा 370 की बहाली को लेकर कमर कसी है तो दूसरी ओर बीजेपी ने सैकड़ों किमी. दूर बिहार में इसे चुनावी मुद्दा बना लिया है। 

शुक्रवार को बिहार में चुनावी जलसों को खिताब करने पहुंचे वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी ने हर सभा में धारा 370 को लेकर कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। मोदी ने कहा कि देश वर्षों से इसके हटने का इंतजार कर रहा था लेकिन ये लोग इसकी बहाली की बात कर रहे हैं। 

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मोदी के भाषणों के बाद जैसे ही यह ख़बर न्यूज़ चैनलों और वेबसाइट्स पर चलने लगी कि बीजेपी बिहार चुनाव में धारा 370 को मुद्दा बनाएगी तो कांग्रेस ने आगे आकर इसका जवाब दिया। 

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि महबूबा मुफ़्ती को बिहार के चुनाव के वक़्त ही क्यों रिहा किया गया। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह बीजेपी की चाल है क्योंकि वह हर मुद्दे पर बात करना चाहती है लेकिन बिहार के मुद्दों पर बात नहीं करना चाहती। 

उन्होंने इस ओर इशारा किया कि हो सकता है कि महबूबा के धारा 370 को लेकर दिए जा रहे बयान बिहार चुनाव में बीजेपी की मदद करें। सुरजेवाला ने ‘आज तक’ से कहा, ‘महबूबा मुफ़्ती किस राजनीतिक दल की सहयोगी थीं। नरेंद्र मोदी (बीजेपी) की। महबूबा मुफ़्ती के साथ मिलकर सरकार किसने बनाई थी। नरेंद्र मोदी (बीजेपी) ने।’ 

सुरजेवाला ने पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती पर हमला बोला और आरोप लगाया कि वह हमेशा पाकिस्तान का शुक्रिया अदा करती रही हैं। 

महबूबा मुफ़्ती की रिहाई का क्या मतलब है, देखिए, वीडियो- 

'ख़ून देने के लिए तैयार'

इससे पहले महबूबा ने शुक्रवार को एक बार फिर केंद्र सरकार को धारा 370 हटाने के लिए घेरा और कहा कि कश्मीर से इसे ख़त्म करना एक तरह का डाका डालना है और केंद्र को इसे वापस करना ही होगा। महबूबा ने कहा कि इस बार नेताओं को अपना ख़ून देने की ज़रूरत पड़ेगी तो ऐसा करने वाली वह पहली नेता होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह 370 की वापसी तक चुनाव नहीं लड़ेंगी। 

370 के लिए जुटे राजनीतिक दल 

राज्य के प्रमुख नेताओं की रिहाई के बाद इन दिनों जम्मू और कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे और धारा 370 और 35 ए की बहाली के लिए आंदोलन की बुनियाद तैयार की जा रही है। हाल ही में पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेन्स और कुछ अन्य दलों की बैठक के बाद इनके प्रमुख नेताओं ने कहा था कि वे अपनी मांग को लेकर अंतिम दम तक संघर्ष करते रहेंगे। 

इन दलों ने एकजुट होकर 'पीपल्स एलायंस फ़ॉर गुप्कर डिक्लेरेशन' का गठन किया है। श्रीनगर के गुप्कर इलाक़े में स्थित पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला के घर पर हुई बैठक में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती, पीपल्स कॉन्फ्रेन्स के सज्जाद लोन, पीपल्स मूवमेंट पार्टी के जावेद मीर और सीपीआई (एम) के मुहम्मद यूसुफ़ तारीगामी भी मौजूद रहे थे।

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अब कोशिश इस बात की है कि 'पीपल्स एलायंस फ़ॉर गुप्कर डिक्लेरेशन' को एक गठबंधन का आकार दिया जाए और उसके बाद संवैधानिक रास्ते पर चलकर अपने हक़ की आवाज़ को बुलंद किया जाए। 

अपने आवास पर बैठक के बाद फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने इस गठबंधन का एलान करते हुए कहा था कि 5 अगस्त, 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर की जो स्थिति थी, उसे फिर से बहाल करने के लिए संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि मौजूदा स्थिति किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है और इसे हर हाल में बदलना होगा। 

विधानसभा चुनाव की गुंजाइश नहीं

जेलों में बंद अधिकतर नेताओं की रिहाई के बाद यह माना जा रहा था कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया शुरू कर सकती है लेकिन अब ऐसा होता नहीं दिख रहा है। क्योंकि जम्मू-कश्मीर में ज़िला विकास परिषद की स्थापना की जा रही है, जिसके प्रतिनिधि सीधे जनता के बीच से चुने जाएंगे। इसका मतलब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अभी केंद्र-शासित प्रदेश बने रहेंगे और इन्हें इनके पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने की संभावना अभी नहीं है।

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