पंजाब सीएम भगवंत मान को लेकर राज्य की विधानसभा में बड़ा हंगामा हो गया। विपक्षी कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने उन पर आरोप लगाया कि वह विधानसभा में नशे की हालत में आए। कांग्रेस ने उनके अल्कोहल टेस्ट की मांग करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया।

विवाद कैसे शुरू हुआ?

दरअसल, शुक्रवार को मज़दूर दिवस के मौक़े पर पंजाब विधानसभा की विशेष बैठक बुलाई गई थी। सदन की बैठक मजदूरों को सम्मान देने के लिए थी। शुरुआत शांतिपूर्वक हुई, लेकिन जल्दी ही विवाद शुरू हो गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कांग्रेस के विधायक सुखपाल सिंह खैरा पर आपत्ति जताई कि वे सदन में मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे। मान ने कहा कि सदन में अनुशासन का पालन करना चाहिए। किसी को भी पैर मोड़कर नहीं बैठना चाहिए। इसके जवाब में खैरा ने पिछली बैठक का जिक्र किया जिसमें मान की पत्नी विजिटर्स गैलरी में पैर मोड़कर बैठी थीं।
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अनुशासन को लेकर शुरू हुआ विवाद अल्कोहल के आरोप प्रत्यारोप तक पहुँच गया। सुखपाल सिंह खैरा ने सीधा आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान नशे की हालत में सदन में मौजूद हैं। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने इस आरोप का समर्थन किया और मांग की कि सदन के सभी विधायकों का अल्कोहल मीटर टेस्ट कराया जाए। 

बाजवा ने कहा, 'एक सम्मानित सदस्य ने राज्य के मुखिया पर बहुत गंभीर आरोप लगाया है। अगर यह सच है तो लोकतंत्र के लिए काला दिन है। सदन के दरवाजे बंद करके सभी सदस्यों का अल्कोहल टेस्ट कराया जाए।' हंगामा बढ़ने के बाद कांग्रेस के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। कांग्रेस ने इसको लेकर सदन के सीसीटीवी फुटेज को साझा किया है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने भी सदन के उस वीडियो को साझा करते हुए लिखा है, 'नशाखोरी के ख़िलाफ़ अभियान भी विफल रहा, यहाँ तक कि आज इस अभियान को चलाने वाले भी विफल रहे हैं।'

अकाली दल का हमला

शिरोमणि अकाली दल ने भी भगवंत मान पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने सदन के वीडियो जारी किए और कहा कि मज़दूर दिवस जैसे पवित्र मौके पर मुख्यमंत्री का शराब पीकर सदन पहुँचना बहुत शर्मनाक है। अकाली दल ने मांग की कि भगवंत मान पंजाब की जनता के सामने डोप टेस्ट कराएं ताकि सच सामने आए।

कांग्रेस नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस

सदन से बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रताप सिंह बाजवा और सुखपाल सिंह खैरा ने अपने आरोप दोहराए। खैरा ने कहा कि भगवंत मान कई अन्य कार्यक्रमों में भी नशे की हालत में दिखे हैं। बाजवा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपना विश्वास खो दिया है। ऐसी हालत में उन्हें सदन नहीं आना चाहिए था। पंजाब कांग्रेस ने मान का एक पुराना वीडियो भी साझा किया है।
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मुख्यमंत्री भगवंत मान का जवाब

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदन में हंगामे के बीच कहा कि यह विशेष सत्र मजदूर दिवस के लिए बुलाया गया है। उन्होंने सभी सदस्यों से अपील की कि वे बहसबाजी छोड़कर सदन की गरिमा बनाए रखें।

यह विशेष सत्र ऐसे समय पर बुलाया गया है, जब हाल ही में आप के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली है। विपक्ष का कहना है कि सरकार अपनी आखिरी सांसें ले रही है और मजदूरों के नाम पर राजनीति कर रही है। स्पीकर ने विपक्ष की अल्कोहल टेस्ट की मांग खारिज कर दी है।
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आप सरकार ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश और गलत प्रचार बताया है। बहरहाल, यह घटना पंजाब की राजनीति में नई बहस छेड़ गई है। अब यह चर्चा है कि सदन की गरिमा कैसे बनी रहे और ऐसे गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई होनी चाहिए।