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फ़ोटो साभार: ट्विटर/चरणजीत सिंह चन्नी

पंजाब महाधिवक्ता देओल ने दिया इस्तीफ़ा, सिद्धू इन्हें हटवाना चाहते थे

पंजाब के महाधिवक्ता एपीएस देओल ने सोमवार को अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को सौंप दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने वरिष्ठ अधिवक्ता की नियुक्ति का शुरुआत से ही विरोध किया था। वह लगातार उनको हटाने की मांग करते रहे थे। जिन मांगों को लेकर सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा तक दे दिया था, हालाँकि स्वीकार नहीं हुआ, उनमें भी उनकी यह मांग शामिल थी। 

कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री पद से हटने के तुरंत बाद अतुल नंदा के इस्तीफ़े से पद खाली हुआ था और तब एपीएस देओल को नियुक्त किया गया था। सिद्धू पंजाब के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी इकबाल सिंह सहोटा के साथ ही उनके प्रतिस्थापन की मांग करते रहे हैं। इस तरह एपीएस देओल बमुश्किल एक महीने तक महाधिवक्ता पद पर रहे। 

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कहा जा रहा है कि यह फ़ैसला पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस आलाकमान के बीच लगातार बैठकों का नतीजा है। देओल की नियुक्ति ने पार्टी के भीतर भी एक बहस छेड़ दी थी। ऐसा इसलिए क्योंकि वह 2015 में कोटकपूरा और बहबल कलां में बेअदबी और पुलिस फायरिंग मामले में दो आरोपी पुलिसकर्मियों- पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी सुमेध सिंह सैनी और महानिरीक्षक परमराज सिंह उमरानंगल- के वकील थे। 

ये मुद्दे राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील हैं। पंजाब में चुनाव से पहले कांग्रेस ने भी कार्रवाई का आश्वासन दिया था। सिद्धू भी यह बात लगातार दोहराते रहे हैं। 

हाल ही में सिद्धू ने कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर 13 बिन्दुओं का एक एजेंडा पार्टी अध्यक्ष को दिया था। उसमें उन्होंने कहा था कि 2017 में चुनाव पूर्व वायदे पूरे किए जाने चाहिए और जल्द से जल्द काम किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा था कि पंजाब में कांग्रेस को बचाने का यह अंतिम मौक़ा है और इसके बाद डैमेज कंट्रोल का कोई मौक़ा नहीं मिलेगा।

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बता दें कि सितंबर महीने में मुख्यमंत्री चन्नी द्वारा मंत्रिमंडल में नये मंत्रियों के शामिल करने और कई अधिकारियों की नियुक्ति के बाद सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका यह इस्तीफ़ा ऐसे समय में आया था जब लग रहा था कि पंजाब कांग्रेस में अब सबकुछ ठीक होने को है। तब जो तसवीरें आई थीं उनमें भी सिद्धू नये मुख्यमंत्री के साथ काफ़ी सहज और खुश दिखते रहे थे। यहाँ तक कि जिस कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ उनकी तनातनी चल रही थी उनको भी दरकिनार कर दिया गया था। उसी दौरान ख़बर आई थी कि सिद्धू नये मंत्रिमंडल में नियुक्ति को लेकर उनसे सलाह नहीं ली गई थी और पुलिस महानिदेशक और महाधिवक्ता की नियुक्ति से भी सिद्धू बेहद नाराज़ थे। समझा जाता है कि इन्हीं मसलों को लेकर चन्नी और सिद्धू में भी विवाद चला आ रहा है। क्या दोनों नेताओं के बीच विवाद को सुलझाने के लिए ऐसा समझौता हुआ है?

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