राजस्थान का रोजगार संकट एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। कल्पना करें कि केवल 54,000 चपरासी पदों के लिए 18.5 लाख से अधिक लोग आवेदन कर रहे हैं। पीएचडी और एम.फिल जैसी उच्च डिग्री वाले लोग भी सरकारी नौकरियों के लिए कतार में खड़े होने को मजबूर हैं।