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कमज़ोर जाँच के कारण बरी हुए अभियुक्त: पहलू ख़ान के परिजन

पहलू खान की लिंचिंग के मामले में सभी 6 अभियुक्तों के बरी होने के लिए परिजनों और इनके वकील ने जाँच की विफलता को ज़िम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि इस केस को हर स्तर पर कमज़ोर किया गया। आरोपियों के वकील ने भी माना कि पहलू ख़ान के बेटों पर गोतस्करी का केस दर्ज होने से उनकी दलील को मज़बूती मिली। पूरी जाँच प्रक्रिया वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली पूर्व की बीजेपी सरकार के दौरान चली। हालाँकि, गलहोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान भी पहलू ख़ान के बेटों के ख़िलाफ़ गो तस्करी का मामला दर्ज किया गया। अब पहलू ख़ान के परिजन इन्हीं कई बातों को लेकर ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कह रहे हैं।

गो तस्करी के शक में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डाले गए हरियाणा के नूँह के निवासी पहलू ख़ान मामले में अलवर की ज़िला अदालत ने बुधवार को ही फ़ैसला सुनाया है। इसमें कोर्ट ने सभी 6 अभियुक्तों को बरी कर दिया है। 1 अप्रैल, 2017 को 55 वर्षीय पहलू ख़ान जयपुर से पशु ख़रीदकर ला रहे थे तब बहरोड़ में कथित गो रक्षकों ने उन्हें गो तस्करी के शक में बुरी तरह पीटा था जिसके दो दिन बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी। पहलू ख़ान की हत्या के बाद पूरे देश में बवाल हुआ था और राजस्थान की तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार की देशभर में काफ़ी आलोचना हुई थी।

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कोर्ट के फ़ैसले के बाद पहलू ख़ान का बेटा इरशाद ने कहा कि जाँच के स्तर पर ही इस केस को कमज़ोर कर दिया गया था। यह आरोप लगाते हुए कि जाँच सही तरीक़े से नहीं की गई इरशाद ने अंग्रेज़ी अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' से कहा कि वह इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे। 

जाँच अधिकारी क्यों बदले गए: वकील 

अख़बार के अनुसार, ख़ान के परिवार को क़ानूनी सहायता देने वाले वकील क़ासिम ख़ान ने जाँच पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, 'इस मामले की जाँच करने वाले अधिकारी तीन बार बदले गए- पहली बार बहरोड़ के थानाधिकारी, फिर बहरोड़ के सर्कल ऑफ़िसर और आख़िर में सीआईडी क्राइम ब्रांच। हत्या के मामले में जाँच अधिकारी को इतनी बार बदलने की ज़रूरत क्या थी।' 

उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से जाँच इस तरह से की गई कि दो आरोप पत्र दाखिल किए गए और उनमें विरोधाभास थे। 

क़ासिम ख़ान ने कहा कि केस उसी समय कमज़ोर हो गया था जब सीआईडी क्राइम ब्रांच ने उन छह लोगों को क्लीन चिट दे दी थी जिनका नाम पहलू ख़ान ने मरने से पहले पीटने वाले के रूप में लिया था। उन्होंने कहा, 'यदि मरने वाले व्यक्ति द्वारा नाम लिए गए पीटने वाले 6 लोगों को पुलिस ने दोष मुक्त कर दिया तो केस अपने आप कमज़ोर हो गया।'

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बरी किए गए आरोपियों के वकील क्या बोले

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, बरी किए गए छह अभियुक्तों के वकील हुकुम चंद शर्मा ने कहा कि ख़ान के दो बेटों के ख़िलाफ़ एनिमल एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों से अदालत में उनकी इस दलील को मज़बूती मिली कि पहलू ख़ान भी एक पशु तस्कर था।

अख़बार के अनुसार, शर्मा ने कहा, 'मई में आरोप पत्र दाखिल किए जाने के बाद मैंने कोर्ट से कहा कि ख़ान के बेटों के ख़िलाफ़ गो तस्करी के लिए आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं। यदि पहलू ख़ान की मौत नहीं होती तो उसे भी आरोपी बनाया जाता। मैंने कोर्ट को बताया कि इससे साबित होता है कि ख़ान एक डेयरी फ़ार्मर नहीं बल्कि गो तस्कर था।'

शर्मा के अनुसार जिस निजी अस्पताल में पहलू ख़ान भर्ती हुआ था उसके डॉक्टरों के बयान और उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विरोधाभास के कारण भी बचाव पक्ष को कोर्ट में दलीलें रखने में मदद मिली।

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‘इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, शर्मा ने कहा, 'हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने कहा कि उसे (ख़ान) लंबे समय से हृदय की बीमारी थी और हार्ट अटैक आने के कारण उसकी मौत हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज है कि उसकी पसलियाँ टूट गई थीं और इस कारण उसकी मौत हो गई थी। इस विरोधाभास से हमारा पक्ष मज़बूत हुआ।'

इधर पिछली बीजेपी सरकार में गृह मंत्री रहे और फ़िलहाल राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया ने कहा, 'यह आरोप कि जाँच निष्पक्ष ढंग से नहीं की गई, यह पूरी तरह ग़लत है। यदि जाँच निष्पक्ष ढंग से नहीं हुई होती तो क्या आरोपी इतना ज़्यादा समय जेल में रहे होते? पुलिस ने बढ़िया जाँच की और आरोप पत्र दाखिल किया। कोर्ट के फ़ैसले को सबको सम्मान करना चाहिए।'

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