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पायलट पर एक्शन: प्रिया दत्त बोलीं - पार्टी ने दो युवा नेताओं को खो दिया

सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के पद से हटाने के बाद कांग्रेस में उनके सहयोगी नेताओं ने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद और पूर्व सांसद प्रिया दत्त ने पायलट पर की गई कार्रवाई को लेकर निराशा जाहिर की है। 

प्रिया दत्त ने ट्वीट कर कहा, ‘एक और दोस्त पार्टी छोड़ रहा है। सचिन और ज्योतिरादित्य अच्छे सहयोगी थे और दोस्त भी। लेकिन दुर्भाग्य से हमारी पार्टी ने असीम संभावनाओं वाले इन दोनों युवा नेताओं को खो दिया। दोनों ने ही मुश्किल वक्त में काफी मेहनत की है।’ 

प्रिया का स्पष्ट इशारा ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा मध्य प्रदेश में और सचिन पायलट द्वारा राजस्थान में विपक्ष में रहते हुए पार्टी को जीत दिलाने के लिए किए गए संघर्ष की ओर था।

सिंधिया और पायलट ने पार्टी को सत्ता में लाने के लिए जमकर पसीना बहाया लेकिन पार्टी आलाकमान ने मुख्यमंत्री पद पर चयन में वरिष्ठ नेताओं को तरजीह दी। हालांकि पायलट के पास तो प्रदेश अध्यक्ष का पद भी बरकरार रहा और वह सरकार में उप मुख्यमंत्री भी बने लेकिन सिंधिया को न तो सरकार में पद मिला और न ही संगठन में। 

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मध्य प्रदेश में सरकार और संगठन के दोनों ही अहम पद कमलनाथ के पास रहे जिससे ख़ुद की उपेक्षा होती देख सिंधिया ने बगावत का बिगुल फूंक दिया और नतीजतन कमलनाथ सरकार की विदाई हो गयी। 

प्रिया दत्त ने आगे कहा, ‘मैं ऐसा नहीं मानती कि महत्वाकांक्षी होना ग़लत है।’

इस मुद्दे पर देखिए, वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष का वीडियो - 

जितिन प्रसाद ने कहा कि पायलट उनके सहयोगी नहीं बल्कि दोस्त हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि इतने सालों में पायलट ने निष्ठा के साथ काम किया है।’ 

जितिन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हालात अभी भी सुधर सकते हैं लेकिन इन हालात के लिए वह दुखी हैं। 

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सहयोगियों से मिल रहे समर्थन को लेकर सचिन पायलट ने ट्वीट कर उनका आभार व्यक्त किया है। 

पायलट के क़रीबी और गहलोत मत्रिमंडल से हटाए गए विश्वेंद्र सिंह ने वीडियो संदेश के जरिए अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा, ‘सचिन पायलट, मुझे एवं मेरे साथी मंत्री रमेश मीणा को मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया है। जबकि हमने कांग्रेस के ख़िलाफ़ एक भी गलत बयान नहीं दिया है।’ उन्होंने पूछा है कि क्या लोकतंत्र में अपनी मांग रखना या आलाकमान का ध्यानाकर्षण करना भी गुनाह है?

यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में राहुल गांधी की यंग ब्रिगेड के नाम पर कई चेहरों को केंद्रीय मंत्री बनाया गया था। इनमें सिंधिया, पायलट, जितिन प्रसाद, मनीष तिवारी से लेकर कई नाम थे। लेकिन अब जिस तरह पहले सिंधिया और अब पायलट ने ख़ुद की उपेक्षा का सवाल उठाया है और बग़ावत का झंडा भी बुलंद किया है, उससे पार्टी के लिए कई सवालों का जवाब देना मुश्किल होगा। 
उधर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि उनकी सरकार गिराने के लिए बीजेपी द्वारा किए जा रहे षड्यंत्र में सचिन पायलट शामिल थे। गहलोत ने कहा कि कार्रवाई का फ़ैसला कांग्रेस हाईकमान के द्वारा लिया गया है। 

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