राजे के नेतृत्व में बीजेपी को 2018 के विधानसभा चुनाव में हार मिली थी। उसके बाद से ही उन्हें किनारे लगाने की लगातार कोशिश की गई। नेता विपक्ष की कुर्सी से दूर रखा और केंद्र की राजनीति में लाते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बनाया गया लेकिन राजे राजस्थान छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुईं।