भारत में कुछ दिन पहले एक्स खाते बंद कर दिए गए थे और अब फ़ेसबुक पेजों पर कार्रवाई। ये वो पेज हैं जो या तो सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं, फिर आलोचना करते रहे हैं या व्यंग्य करते रहे हैं। मॉलीटिक्स, नेशनल दस्तक, राजीव निगम समेत कई फेसबुक पेज अचानक भारत में बंद हो गए। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने वाले कई अकाउंट्स और पेजों पर एक के बाद एक कार्रवाई हो रही है। पहले एक्स पर कई पैरोडी और व्यंग्य वाले खाते रोके गए थे।
सोशल मीडिया पर इसको लेकर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। कई लोगों ने लिखा, 'जो सरकार का गुणगान करेगा, वही बचेगा। बाकी सबको बैन कर दिया जाएगा।' ऐसे एक्स खातों पर हाल में जब कार्रवाई हुई तो कुछ यूजरों ने इसे 'डिजिटल इमरजेंसी' बताया था।
फेसबुक पेजों पर कार्रवाई किए जाने पर वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर सिंह ने एक्स पर पोस्ट किया, “सरकार जी ऐसा मत कीजिए। दोहा याद कीजिए –
निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।
यानी आलोचक को पास रखो। वो बिना पानी-साबुन के तुम्हारे स्वभाव को साफ कर देता है। आलोचना हमें अपनी कमियां दिखाती है और बेहतर बनाती है।"
वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने लिखा, “निंदनीय। हर दिन एक नया चैनल, एक नई साइट बंद हो रही है। लगता है सरकार संभल नहीं रही है, इसलिए यह सब हो रहा है।”
रणविजय सिंह ने लिखा, "आज कई लोगों का फेसबुक पेज भारत में बंद कर दिया गया। मॉलीटिक्स, नेशनल दस्तक, राजीव निगम और भी कई FB पेज सरकार का शिकार हुए। ये सभी वो पेज हैं, जिससे सरकार से सवाल किए जाते थे। जमीन के असल हालात दिखाए जाते थे। सरकार लगातार ऐसे पेज और हैंडल बैन कर रही है, जो सवाल करते हैं। कुछ दिन पहले ट्विटर पर भी कई हैंडल बैन हुए थे।"
उन्होंने आगे लिखा, "इसे देखकर ये साफ है- जो सरकार का गुणगान करेगा, वही बचेगा। बाकी सबको बैन किया जाएगा। इसका एक पैटर्न है- पहले किसी भी रेंडम कंटेंट पर नोटिस भेजा जाएगा। ऐसा दो-तीन बार होगा, फिर बैन। सरकार ने न्यूज चैनलों पर पहले ही कब्जा जमा रखा है। एक सोशल मीडिया बचा था, जिसपर इस तरह कब्जा किया जा रहा है।"

पहले एक्स खातों पर हुई थी कार्रवाई

हाल ही में एक्स पर भी कई अकाउंट्स भारत में रोक दिए गए। हाल में जिन खातों पर सरकार ने कार्रवाई करवाई है उनमें पैरोडी, व्यंग्य और पत्रकार वाले खाते शामिल हैं। पैरोडी और व्यंग्य वाले पॉपुलर अकाउंट्स में @Nehr_who, @DrNimoYadav, @indian_armada, @DuckKiBaat, @mrjethwani_ , @Doc_RGM शामिल हैं। जर्नलिस्ट और एक्टिविस्ट @ActivistSandeep (संदीप सिंह) का खाता भी इसमें शामिल है।
ऐसे खातों के पेज पर जाने पर भारत में लिखा आ रहा है 'withheld'। इन अकाउंट्स पर अब भारत से देखने पर मैसेज दिखता है- 'Account withheld in IN in response to a legal demand.' यानी कानूनी वजह से भारत में अकाउंट रोका गया है। ये अकाउंट्स भारत के बाहर नॉर्मल दिख रहे हैं। इसके साथ ही एक रिपोर्ट यह भी है कि फिलहाल आईटी मंत्रालय के पास ऐसी रोक लगाने का अधिकार है, लेकिन अब कई अन्य मंत्रालयों को भी यह अधिकार देने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा हो गया तो क्या ऐसी कार्रवाइयों की बाढ़ नहीं आ जाएगी? तो क्या यह 'डिजिटल इमरजेंसी' है? सोशल मीडिया पर तो कुछ इसी तरह की प्रतिक्रिया दी जा रही है।
ये अकाउंट्स सरकार की नीतियों, अल्पसंख्यक मुद्दों, विदेश नीति, LPG संकट और प्रधानमंत्री पर व्यंग्य करते थे। मीम्स, कार्टून और क्रिटिकल पोस्ट्स की वजह से ये काफी फेमस थे। स्क्रॉल की रिपोर्ट के अनुसार कारवां मैगजीन के एडिटर हरतोष सिंह बाल ने बताया कि 14 मार्च का एक ट्वीट भी ब्लॉक कर दिया गया। यह ट्वीट 2002 के इंडिया टुडे के कवर को प्रमोट कर रहा था, जिसमें नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ हेडलाइन थी – “Hero of Hatred”।

4PM न्यूज नेटवर्क ने भी शिकायत की कि पहले उनका नेशनल चैनल बंद कराया गया, फिर एंकर फिजा की इंस्टाग्राम रील हटवाई गई और फेसबुक पेज भी बंद कर दिया गया। उन्होंने लिखा, 'एक-एक करके हर प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया जा रहा है। इतना डर किस बात का है?'

कार्रवाई किस कानून के तहत?

रिपोर्टों के अनुसार ये कार्रवाई आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत की जा रही है। इस धारा के तहत केंद्र सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आदेश दे सकती है कि अगर कोई कंटेंट देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या विदेशी संबंधों के लिए खतरा है तो उसे ब्लॉक किया जाए। फिलहाल केवल आईटी मंत्रालय को यह अधिकार है, लेकिन खबर है कि गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी यह अधिकार देने पर विचार किया जा रहा है। अगर ऐसा हुआ तो सोशल मीडिया पर आलोचना करने वाले कंटेंट पर और ज्यादा कार्रवाई हो सकती है।
यह मामला फ्री स्पीच और सेंसरशिप पर बड़ा बहस छेड़ रहा है। आगे क्या होता है, यह देखना होगा कि क्या सरकार वजह बताएगी या और खाते भी प्रभावित होंगे।