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क्रिकेट: गंदा है पर धंधा है ये!

क्रिकेट ही खेलों की दुनिया की सबसे बड़ी सट्टेबाज़ी का भी पोषक, नियंत्रक और निर्यातक है। अनुमान है कि इसमें क़रीब सौ अरब डालर सालाना का अवैध कारोबार होता है। इसमें अंतर्राष्ट्रीय माफ़िया का सीधा दख़ल है। खिलाड़ियों को प्रलोभन देकर या ब्लैकमेल करके गुनहगार बना लिया जाता है। भारत के पूर्व क्रिकेटर व कप्तान अज़हरुद्दीन, मनोज प्रभाकर व श्रीसंत समेत कई खिलाड़ी इस मामले में दंडित हो चुके हैं। 
शीतल पी. सिंह

दुनिया में ऐसा कितनी बार होता है जब सौ करोड़ लोग किसी खेल के लिए टीवी से चिपक जाएँ, इंटरनेट में इधर-उधर तलाश करते छटपटाते पाए जाएँ? ऐसा होता है, ऐसा तब-तब होता है जब हिंदुस्तान और पाकिस्तान आपस में किसी अंतराष्ट्रीय टूर्नामेंट में क्रिकेट मैच खेलते हैं, ख़ासकर तब जब वह क्रिकेट का वर्ल्ड कप हो!दक्षिण एशिया में क्रिकेट धर्म है और जब मैच भारत और पाकिस्तान के बीच होता है, तब यह युद्ध में बदल जाता है जहाँ हार का मतलब है हारने वाले देश की एक बड़ी आबादी की कुछ समय की मौत!
क्रिकेट के ऊपरी पायदान पर सिर्फ़ 12 देश हैं। जिसमें से भारत में इसके कद्रदान सबसे ज़्यादा हैं 133 करोड़ लोगों का देश, पाकिस्तान में क़रीब 21.2 करोड़ लोग और बांग्लादेश में क़रीब 16.1 करोड़ लोग मिलकर इसे दुनिया की सबसे बड़ी खेल परिघटना बना देते हैं! ख़ासकर तब जब इसमें भारत किसी मुक़ाबले में होता है। 
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भारत में क्रिकेट अंग्रेज़ी राज के साथ आया। 1962 तक इंग्लैंड में भद्रजन इसे बिना पैसा लिए खेलते थे और मज़दूर पैसा लेकर! क्रिकेट में बहुत सारा पैसा पिछले एक-डेढ़ दशक में ही आया है और ख़ासकर भारत में। अर्थव्यवस्था के करवट लेते ही दर्शकों की बहुत बड़ी संख्या होने के कारण यह बड़े मुनाफ़े के धंधे में बदल गया। भारतीय खिलाड़ी इस खेल में यूरोपियन फ़ुटबॉलरों और अमरीकी बास्केटबॉल खिलाड़ियों के बराबर धन पाने लगे। एक मैच के औसत पच्चीस लाख रुपये! हाल यह हो गया कि क्रिकेट जहाँ पैदा हुआ वहाँ के इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड का टर्नओवर 2013-14 में क़रीब दशमलव .125 अरब डालर था जबकि भारत का इसका क़रीब तीस गुना 2.99 अरब डालर।
बुकर पुरस्कार विजेता उपन्यासकार अरविंद अडिगा ने लिखा भी था कि क्रिकेट भारत में कैपिटल्ज्म का इंजन बन गया है। पाकिस्तान में एक क्रिकेटर प्रधानमंत्री बन चुका है और बांग्लादेश और भारत में कई खिलाड़ी संसद के सदस्य हैं।
क्रिकेट खेलने वाले देशों की कुल आबादी क़रीब दो अरब है। आईपीएल के टेलीविज़न राइट्स 2018-2022 के लिए ढाई बिलियन डॉलर से ज़्यादा में बिके हैं। रूपर्ट मर्डोक के स्टार इंडिया ने इसे ख़रीदा है। फ़ोर्ब्स 2019 की लिस्ट के अनुसार विराट कोहली दुनिया में सबसे क़ीमती एथलीट हैं! क्रिकेट पर बनी लगान नाम की एक हिंदी फ़िल्म 2001 में ऑस्कर पुरस्कार के लिये नामित हो चुकी है।

1939 में इंग्लैंड और साउथ अफ़्रीका के बीच क्रिकेट का एक मैच बारह दिन चला था। जिसमें एक दिन का रेस्ट था और एक दिन बरसात के चलते ख़राब हुआ था। इसके बाद टेस्ट मैच की मियाद पाँच दिन की रख दी गई। अब तो ट्वेंटी-ट्वेंटी तीन घंटों में नतीजा दे देता है। कम से कम चार नोबेल पुरस्कार विजेता इसके खिलाड़ी रहे (कालेज स्तर तक) वीएस नयपाल, हैरॉल्ड पिंटर, जेम्स जॉयस और सैमुएल बेकेट।मशहूर लेखिका वर्जीनिया वुल्फ़ का भी क्रिकेट खेलते हुए बचपन के समय का एक चित्र इसमें जोड़ा जा सकता है हालॉकि उन्हें नोबेल पुरस्कार नहीं मिल सका था। भारत ने 1932 में पहला टेस्ट मैच खेला था। 

क्रिकेट ही खेलों की दुनिया की सबसे बड़ी सट्टेबाज़ी का भी पोषक, नियंत्रक और निर्यातक है। अनुमान है कि इसमें क़रीब सौ अरब डालर सालाना का अवैध कारोबार होता है। इसमें अंतर्राष्ट्रीय माफ़िया का सीधा दख़ल है।
खिलाड़ियों को प्रलोभन देकर या ब्लैकमेल करके साथी गुनहगार बना लिया जाता है। वर्ष 2000 में साउथ अफ़्रीकी कप्तान हैन्सी क्रोनिये ने क़बूल किया था कि इंग्लैंड से एक मैच हारने के एवज़ में उन्हें भारतीय मूल के सट्टेबाज़ों ने एक लाख डालर नग़द दिये थे। पाकिस्तानी कप्तान सलमान बट और दो अन्य खिलाड़ी इंग्लैंड में 2011 में स्पॉट फ़िक्सिंग में जेल गये थे। भारत के पूर्व क्रिकेटर व कप्तान अज़हरुद्दीन, मनोज प्रभाकर व श्रीसंत समेत कई खिलाड़ी इस मामले में दंडित हो चुके हैं। 
धन के इस विशाल परिमाण के आकर्षण के चलते टेक्सन के करोड़पति एलन स्टैनफ़ोर्ड ने 2008 में क्रिकेट को हड़पने की कोशिश की थी। ऐसा ही प्रयास एक आस्ट्रेलियन सेठ कैरी पैकर ने 1977-79 में भी किया था, पर दोनों ही नाकामयाब हुए।

भारत में भी क्रिकेट पर क़ब्ज़े के लिये ज़बरदस्त जंगें हुई हैं। तमाम मामले कोर्ट्स में गये। कम्युनिस्ट दलों के अलावा हर दल के शीर्ष नेता इस युद्ध के लिए भागीदार हैं। ललित मोदी इसी के चलते यूपीए 2 के समय से ही देश छोड़कर भागे हुए हैं। केजरीवाल व अन्य कई लोग अरुण जेटली से इसी पर दिये गये बयान पर कोर्ट में माफ़ी माँग चुके हैं। 

क्रिकेट धर्म है तो उसके तमाम देवता भी हैं और कई अन्य देवत्व की राह में हैं। इनके तमाम भक्त भी हैं और उनके अलग मसले हैं। सबसे ज़्यादा बार क्रिकेट के ज़रिये एक अनवरत राजनैतिक मसले की परीक्षा तब-तब होती है जब भारत और पाकिस्तान मुक़ाबले में हों! कई बार यह ऐलान होता है कि भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट बंद पर फिर फिर यह ऐलान टूट जाता है क्योंकि गंदा है पर धंधा है ये!

शीतल पी. सिंह
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