धूम धड़ाके के साथ शुरू हुआ क्रिकेट का प्रीमियर लीग समाप्त हो गया है। यह जिस तेजी से शुरू हुआ वैसा बना नहीं रहा लेकिन अंत तक आते आते खिलाड़ियों, टीमों और टीम के मैनेजरों की अच्छी परीक्षा लेकर चैंपियन तय गया। कई नए लोग उभरे तो कई अस्त भी हुए। यहां हर बार की तरह क्रिकेट के समानांतर कई ‘खेल’ भी चलते रहे। कह सकते हैं कि आखिर में खिलाड़ियों की प्रतिभा और मेहनत सब पर भारी रही। पर कुल मिलाकर इस सीजन बाजार की दिलचस्पी कम लगी। 

सट्टेबाजी वाली कंपनियों पर पाबंदी का असर

प्रसारण के लिए नई और अनेक भाषाओं का सहारा लेने और टीवी या नेट जैसे अनेक माध्यमों से लोगों तक पहुँचने की कोशिश हुई लेकिन लगता नहीं कि बाजार संतुष्ट रहा। एक तो विज्ञापन कम दिखे और जिन आंकड़ों को जता और बताकर विज्ञापन वसूले जाते हैं वे तो इस बार एकदम कम दिखे। आँकड़े जाहिर न होना अपने आपमें बताता है कि इस बार दर्शक कम आये- मैदानों में नहीं मोबाइल, नेट और टीवी के माध्यम से। इस बार ड्रीम-11 और न जाने किन-किन नामों से हल्की सट्टेबाजी वाली कंपनियों पर पाबंदी का असर दिखा जिनके चलते नौजवान हर गेंद और हर खिलाड़ी ही नहीं मैच से जुड़ी हर बात पर नजर रखते थे और बोली लगाते थे- भले उसमें काफी डाटा खपता हो और किसी रेस्तरां मे भोजन के बिल पर हल्की रियायत भर का लाभ हो।
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वैभव सूर्यवंशी चमके

पर आँकड़ों के आने न आने का मतलब आईपीएल की लोकप्रियता या क्रिकेट का क्रेज समाप्त होना नहीं है और अब टूर्नामेंट बीतते बीतेते बाजार जिस तरह नए पुराने सितारों को घेरने लगा है वह बताता है कि यही खेल सबसे ऊपर है। पिछले दिनों हॉकी के दिग्गज अजितपाल सिंह ने कबूल किया कि आज क्रिकेट का रोमांच उनके ऊपर भी हावी है। और इस आईपीएल में कोई चमका है तो वह वैभव सूर्यवंशी है। उसकी टीम हार गई लेकिन निजी उपलब्धियों के बल पर एक साथ पाँच पाँच ट्राफियां जीतने वाला यह किशोर क्रिकेट प्रबंधकों और दुनिया भर के प्रेमियों की नजर में तो आया ही है विज्ञापन कंपनियों का दुलारा बना है। उसे घेरने की तैयारी बड़े पैमाने पर है। और अचरज नहीं कि आने वाले कुछ ही दिनों में वह काफी सारे विज्ञापनों में आने लगे। अभी वह ‘कंप्लान’ हेल्थ ड्रिंक और एक डिजिटल वैलेट के लिए विज्ञापन करने के साथ झारखंड राज्य के लिए भी एक विज्ञापन में आ रहे हैं।

वैभव का आईपीएल का रेट भी अभी बहुत नहीं है- वे एक करोड़ से कुछ ही ऊपर में बिके थे। लेकिन अभी उनका कोई ब्रांड मैनेजर नहीं है और परिवार के लोग ही बातें फाइनल करेंगे।

सचिन, धोनी या विराट कोहली की राह पर वैभव

बाजार के जानकारों के अनुसार हेल्थ प्रोडक्ट, खेल सामग्री और जूतों के लगभग एक दर्जन ब्रांडों की तरफ से उनको घेरने की तैयारी है। उनके बारे में उनकी अच्छी संभावनाएँ और खेल का स्तर तो है ही आगे अनेक वर्षों तक खेलने की संभावना भी है। पर बाजार के लिए सबसे बड़ी बात अभी तक उनका किसी ब्रांड के विज्ञापन के लिए मात्र 50 लाख से एक करोड़ रुपये लेना ही है। जाहिर है कि इस आईपीएल के बाद वह रेट बहुत पीछे रह जाएगा क्योंकि पूरी प्रतियोगिता में उनकी ही चर्चा छाई रही है और पूरी दुनिया के क्रिकेटर उनकी प्रतिभा पर मोहित हैं। कंपनियाँ यह भी चाहेंगी कि हर साल का करार करने की जगह कई सालों का करार एक बार ही कर लिया जाए। अब बात कहाँ तक जाती है और उनको कितने विज्ञापन मिलते हैं कितनी कमाई शुरू होती है इस पर काफी लोगों की नजर होगी। निश्चित रूप से उनके खेल पर ज्यादा नजर होगी पर यह सवाल रहेगा कि सचिन, धोनी या विराट कोहली की तरह वे भी कमाई का रिकार्ड बनाने तक पहुंचते हैं या नहीं।
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ब्रांड में विराट कोहली अव्वल

इस मामले में अभी भी विराट कोहली सबसे आगे हैं। देश के लिए टेस्ट और ट्वेंटी ट्वेंटी खेलना छोड़ने और कप्तानी के चक्कर से मुक्त होने का उनका दांव सही बैठा है। इस आईपीएल में वे जिस सहज भाव और ऊर्जा के साथ खेले हैं उसने उनकी टीम को चैंपियन बनाने में मदद की है लेकिन उनका ब्रांड वैल्यू भी बढ़ाया है। कहा जाता है कि उनके ब्रांड मैनेजरों ने अब छोटी रकम वाले करार खत्म करने का नोटिस दे दिया है। उनके अच्छे और मझोले स्तर के विज्ञापनों से उनको साल का 5 से 10 करोड़ रुपये तक मिल जाते हैं। और उनकी साल की कमाई दो हजार करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है जो उन्हें दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ियों की सूची में शामिल कराता है। कोहली और बाजार का रिश्ता अच्छा बैठ चुका है और उनकी 34 करोड़ की सोशल मीडिया फ़ॉलोइंग उनको अन्य खिलाड़ियों से ही नहीं, फिल्मी स्टारों और राजनेताओं से ऊपर पहुंचाती है। खेल, फिटनेस, तेज दौड़ और फैशन के साथ ही पारिवारिक विज्ञापनों में भी उनकी लोकप्रियता है क्योंकि वे अनुष्का को साथ रखते हैं और एक लोकप्रिय धर्मगुरु के पास जाते हैं। उनका गुडविल खेल से ऊपर पहुंचता है। उनके पास कितने और कौन-कौन ब्रांड हैं, यह सूची बहुत बड़ी है। लेकिन अब उनके पास ज्यादा मूल्य वाले क़रार होंगे और इस आईपीएल ने उनकी पोजीशन को मजबूत किया है।
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महेंद्र सिंह धोनी का रिटायरमेंट क्यों नहीं?

बाजार और विज्ञापन के चलते ही महेंद्र सिंह धोनी ने न तो इस बार अपने रिटायरमेंट की घोषणा की न एक भी मैच में उतरे। सस्पेंस जरूर बना रहा। अब चेन्नई के प्रशंसक ही नहीं देश और दुनिया के क्रिकेट प्रेमियों में उनको चाहने वाले हैं लेकिन बाजार के हिसाब में वे बस कृपा के पात्र रह गए हैं। हाल में ही भारत को विश्व कप दिलाने वाले कप्तान सूर्यकुमार यादव अभी बाजार और अपने टीम मैनेजरों की नजर से ओझल नहीं हुए हैं लेकिन बाजार अब उन पर दांव लगाना बंद सा कर चुका है। विराट कोहली के बाद विज्ञापन जगत के लिए दुलारे बने ऋषभ पंत और हार्दिक पण्ड्या इस बार अपना बाजार कमजोर करने में ‘सफल’ रहे। अब इनमें से ऋषभ के लिए खबर है कि वे भी कोहली की तह कप्तानी छोड़कर खेल पर ध्यान देने जा रहे हैं पर पण्ड्या का मामला उलझ गया है। अपनी प्रतिभा को उन्होंने खुद भी बहुत नष्ट किया है। शुभमन गिल और के एल राहुल पर भी बाजार का काफी दांव लगा है लेकिन उन्होंने किसी तरह इसे संभाला है। अभिषेक शर्मा, यशस्वी जायसवाल और ईशान किशन जैसों ने भी मौके का पूरा लाभ नहीं लिया। लेकिन विराट कोहली अपनी प्रतिष्ठा बचाने और बढ़ाने में कामयाब रहे जरूर पर इस बार का असली चैंपियन वैभव सूर्यवंशी ही है।