मणिपुर के इंफाल पूर्व-कांगपोकपी सीमा पर उग्रवादियों ने लकड़ी बीनने वालों पर हमला कर 3 लोगों की हत्या कर दी। आक्रोशित लोगों ने सीएम वाई खेमचंद सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। क़रीब हफ़्ते भर पहले ही हिंसा में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई थी।
मणिपुर में सीएम आवास के बाहर शव रखकर प्रदर्शन
मणिपुर में सोमवार को ताज़ा हिंसा में तीन लोगों की हत्या कर देने के बाद राज्य में तनाव बढ़ गया। हमले के बाद आक्रोशित लोग दो मृतकों के शव लेकर इंफाल पहुंचे और उन्हें मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के बाबूपारा स्थित आवास के मुख्य द्वार के बाहर रख दिया। विरोध के दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इंफाल में कई जगह सड़कें जाम की गईं और बाजार-दुकानें बंद रहीं। राज्य में मई 2023 से जारी हिंसा के बीच हाल के दिनों में यह एक और गंभीर घटना है।
मणिपुर में हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार सुबह संदिग्ध उग्रवादियों के हमले में तीन लोगों की हत्या के बाद राजधानी इंफाल में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। हमले का शिकार हुए लोग अपने गांव के आसपास की पहाड़ियों में लकड़ी बीनने गए थे। इसी दौरान उन पर गोलीबारी की गई। घटना इंफाल पूर्व और कांगपोकपी जिले की सीमा के पास कांगपोकपी जिले के खोंगबल सुनुरोक उयोक इलाके में हुई। यह जगह इंफाल पूर्व के नोंगशुम गांव के नजदीक है।
16 लोग लकड़ी बीनने गए थे, तभी हुआ हमला
मीडिया रिपोर्टों में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि कुल 16 लोग अपने गांव के पास पहाड़ियों में लकड़ी बीनने गए थे। इसी दौरान संदिग्ध उग्रवादियों ने उन पर घात लगाकर गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई। हमले में तीन अन्य लोग घायल हुए हैं। तीनों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, घटना के बाद तीन लोग लापता भी बताए गए। हालाँकि, हमले के पीछे किसका हाथ है और इसके पीछे क्या कारण थे, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल हमलावरों को संदिग्ध उग्रवादी बताया गया है।
मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव रखकर प्रदर्शन
तीन लोगों की हत्या के बाद इंफाल में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने दो मृतकों के शव मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के बाबूपारा स्थित आवास के मुख्य द्वार के बाहर रख दिए। प्रदर्शनकारी राज्य में लगातार हो रही हिंसा और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर नाराज थे। उनका विरोध तब हुआ है, जब मणिपुर के अलग-अलग इलाक़ों में गोलीबारी, आगजनी और नागरिकों की मौत की घटनाएँ सामने आ रही हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए कई राउंड आंसू गैस के गोले छोड़े। बाद में दोनों शवों को जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ले जाया गया।मुख्यमंत्री आवास और वहां तक पहुंचने वाले रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। घटना के बाद मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह घायलों का हाल जानने के लिए इंफाल के एक निजी अस्पताल पहुंचे। हालांकि, उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया।
इंफाल में सड़क जाम, बाजार और दुकानें बंद
हमले के विरोध में इंफाल के कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। खुराई लामलोंग में लोगों ने सड़क जाम कर दी। वहीं, महिलाओं के एक समूह ने ईमा कीथेल बाजार में प्रदर्शन किया।घटना के बाद राजधानी इंफाल में नाराजगी का माहौल रहा। कई बाजार और दुकानें बंद रहीं। इससे सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ। प्रदर्शनकारियों की नाराजगी का मुख्य कारण राज्य में जारी हिंसा और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता है।
चस्साद गांव में 15 से ज्यादा घर जलाए गए
लकड़ी बीनने वालों पर हमले से पहले भी मणिपुर के दूसरे हिस्सों में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार देर रात कामजोंग जिले के चस्साद गांव में कुकी समुदाय के लोगों के कम से कम 15 घरों में आग लगा दी गई। इस घटना के लिए भी संदिग्ध उग्रवादियों पर आरोप लगाया गया है। घर जलाए जाने के बाद कई नागरिकों को अपना घर छोड़कर जंगलों और पास के सेना शिविर की ओर जाना पड़ा। रविवार को इसी गांव पर हुए एक अलग हमले में कुकी समुदाय के एक नागरिक की मौत हो गई और चार अन्य लोग गोली लगने से घायल हुए थे। इन घटनाओं ने प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
उपमुख्यमंत्री ने हिंसा की निंदा की
मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने चस्साद गांव में हुई हिंसा की निंदा की। उन्होंने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना जताई और घायल लोगों तथा विस्थापित परिवारों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने घरों में आग लगाने की घटना को अस्वीकार्य अपराध बताया। साथ ही, जिला प्रशासन, राज्य पुलिस और सुरक्षा बलों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने, नागरिकों और उनकी संपत्ति की सुरक्षा करने तथा घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने के निर्देश देने की बात कही। अधिकारियों के मुताबिक, प्रभावित इलाके में स्थिति नियंत्रित करने के लिए असम राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल और कामजोंग पुलिस की संयुक्त टीम तैनात की गई है।कामजोंग में तीन नागा नागरिक घायल
कामजोंग जिले में शनिवार रात एक अन्य घटना भी हुई। अधिकारियों के मुताबिक, जिले के मुख्यालय के पास प्रतिद्वंद्वी सशस्त्र समूहों के हमले में तंगखुल नागा समुदाय के तीन नागरिक गोली लगने से घायल हो गए। यह घटना चस्साद गांव में घर जलाए जाने और नागरिकों पर हमले की घटनाओं से अलग बताई गई है। इस तरह राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लगातार सामने आ रही घटनाओं में नागरिकों की मौत, गोली लगने से घायल होने और घरों को जलाए जाने की ख़बरें शामिल हैं। इन घटनाओं के बीच सोमवार को इंफाल-कांगपोकपी सीमा पर हुए हमले ने एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया।
मई 2023 से हिंसा की चपेट में है मणिपुर
मणिपुर मई 2023 से लंबे समय से जातीय हिंसा और तनाव का सामना कर रहा है। इस दौरान राज्य के अलग-अलग इलाकों में हिंसक झड़पें, गोलीबारी, आगजनी और लोगों के विस्थापन की घटनाएं सामने आती रही हैं। हाल के दिनों में भी राज्य में हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं। करीब एक सप्ताह पहले हुई हिंसा में कम से कम नौ लोगों की मौत हुई थी। अब लकड़ी बीनने गए तीन लोगों की हत्या और इसके बाद हुए विरोध प्रदर्शन ने स्थिति को फिर गंभीर बना दिया है।
आम लोगों की सुरक्षा पर उठे सवाल
मणिपुर की ताज़ा घटनाओं में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आम नागरिक अपने रोजमर्रा के काम के दौरान भी हिंसा का शिकार हो रहे हैं। लकड़ी बीनने गए लोगों पर गोलीबारी, गाँवों में घरों को आग लगाने और नागरिकों के घायल होने की घटनाओं ने प्रभावित इलाक़ों में भय और असुरक्षा बढ़ाई है। मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव रखकर किया गया प्रदर्शन भी इसी नाराजगी को दिखाता है। लोगों का गुस्सा केवल सोमवार के हमले तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य में लंबे समय से जारी हिंसा और सुरक्षा को लेकर बनी चिंता से जुड़ा है।
फिलहाल घायलों का इलाज चल रहा है और कुछ लोगों के लापता होने की खबर है। सुरक्षा बल प्रभावित इलाकों में तैनात हैं। मणिपुर में शांति बहाल करने की चुनौती के बीच ताजा घटनाएं यह सवाल फिर सामने लाती हैं कि नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हिंसा प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।