मणिपुर में बीजेपी सरकार के गठन के तुरंत बाद फिर हिंसा भड़क उठी। कुकी विधायकों के सरकार में शामिल होने का विरोध क्यों है?
मणिपुर में दोबारा बीजेपी सरकार बनते ही फिर हिंसा भड़क उठी है। कई जगहों पर गुरुवार शाम से ही हिंसा शुरू हो गई। चुराचांदपुर जिले में शुक्रवार को सामान्य जीवन पूरी तरह ठप हो गया। कुकी-जो समुदाय के दो संगठनों ने राज्य में सरकार बनने के विरोध में पूरी तरह बंद का ऐलान किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल भी किया है। यह विरोध इसलिए है क्योंकि कुकी-जो समुदाय के कुछ विधायक नई सरकार में शामिल हुए हैं। बुधवार को ही राज्य में राष्ट्रपति शासन ख़त्म हुआ है और बीजेपी नेता युमनम खेमचंद सिंह ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
सरकार में कुकी ज़ो समुदाय के विधायकों के शामिल होने के विराध में प्रतर्शन हुए। अधिकारियों के अनुसार, कुकी-जो बहुल इलाक़ों में यह बंद सुबह से ही लागू हो गया। जिले के मुख्यालय शहर में बंद समर्थकों ने लाठियां लेकर सड़कों पर उतरकर कई जगहों पर वाहनों को रोका। बाद में सड़कों पर वाहन बिल्कुल नहीं दिखे। बाजार बंद रहे। सरकारी दफ्तरों और स्कूल-कॉलेजों में बहुत कम लोग पहुंचे।
कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन यानी केएसओ की चुराचांदपुर इकाई ने शुक्रवार से 24 घंटे का पूरा बंद बुलाया। वहीं, जॉइंट फोरम ऑफ सेवन यानी जेएफ7 ने कुकी-जो इलाकों में सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक बंद लागू किया। शहर के तुइबोंग इलाके में बंद का असर सबसे ज्यादा दिखा। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। सुरक्षा बलों को शहर के महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात किया गया है।
कुकी वुमेन ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स यानी केडब्ल्यूओएचआर ने भी एक बड़ी जनरैली निकालने की घोषणा की। यह रैली कुकी-जो विधायकों के सरकार में शामिल होने के खिलाफ है। संगठन का कहना है कि मौजूदा हालात में कुकी-जो विधायकों का सरकार बनने में हिस्सा लेना स्वीकार्य नहीं है। यह रैली कुकी महिलाओं की एकजुट आवाज है कि वे ऐसी राजनीतिक घटनाओं के खिलाफ हैं।
तुइबोंग फॉरेस्ट गेट के पास भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, इसके जवाब में सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े। दो प्रदर्शनकारी घायल हुए। यह झड़प शुक्रवार सुबह 3 बजे तक चली।
विधायकों पर हमले की चेतावनी
इस बीच, इंडिजिनस ट्राइब्स एडवोकेसी कमिटी (फेरजवाल और जिरीबाम जिला) ने विधायक एन सनाते को धमकाने, अपमानित करने या उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि सरकार में शामिल होना फेरजवाल और जिरीबाम के आदिवासी लोगों की सामूहिक राय का अपमान होगा। कमिटी ने मणिपुर के हमार, कुकी और जोमी जनजातियों के हितों का समर्थन किया और कहा कि हाल की राजनीतिक घटनाओं को इन तीनों जनजातियों के बीच दुश्मनी नहीं फैलानी चाहिए।
यह सब तब हुआ जब विधायक एन सनाते और एल एम खौते बुधवार को इंफाल गए थे। वे एनडीए टीम के साथ सरकार बनाने का दावा पेश करने में शामिल हुए। ये दोनों कुकी-जो-हमार विधायक डिप्टी चीफ मिनिस्टर नेमचा किप्गेन के साथ गुरुवार को 12वीं मणिपुर विधानसभा के 7वें सत्र में वर्चुअली शामिल हुए।दो दिन पहले ही सरकार बनी है
मणिपुर में क़रीब एक साल बाद राष्ट्रपति शासन ख़त्म हुआ है। बुधवार को युमनम खेमचंद सिंह ने मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। नगा पीपुल्स फ्रंट यानी एनपीएफ के नेता एल. दिक्हो और नेमचा किप्गेन ने भी उप-मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके अलावा, बीजेपी के गोविंदास कोंथौजम और नेशनल पीपुल्स पार्टी के लोकेन ने भी मंत्री के रूप में शपथ ली। पहले मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह थे। उनके कार्यकाल में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी।
हिंसा कब और क्यों शुरू हुई?
3 मई 2023 को मणिपुर हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद हिंसा शुरू हुई थी जिसमें मैतेई समुदाय को एसटी का दर्जा देने पर विचार करने की सिफारिश की गई थी। कुकी-जो और अन्य आदिवासी समुदायों ने इसका विरोध किया, क्योंकि इससे उनकी नौकरियों, आरक्षण और भूमि अधिकारों पर असर पड़ सकता था। 3 मई 2023 को पहाड़ी जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला गया, जिसके बाद इंफाल घाटी और पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क गई। घरों में आगजनी, लूटपाट, हत्याएं, महिलाओं के साथ अपराध जैसी घटनाएं हुईं। अब तक 260 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 60,000 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। हजारों घर जले या नष्ट हुए।कुकी समूहों ने बीरेन सिंह पर पक्षपात का आरोप लगाया और उनके इस्तीफे की मांग की। धीरे-धीरे बीजेपी के अंदर भी असंतोष बढ़ा। कई विधायकों ने बीरेन सिंह को राजनीतिक बोझ बताया। अक्टूबर 2024 में 19 बीजेपी विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी और बीरेन सिंह को हटाने की मांग की। नवंबर में खेमचंद सिंह ने खुद बीरेन सिंह से इस्तीफा देने को कहा था।
फरवरी 2025 में स्थिति बिगड़ी। कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी की। बीजेपी के कई विधायक दिल्ली पहुंचे और नेतृत्व से मिले। 9 फरवरी 2025 को बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया। 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। विधानसभा निलंबित कर दी गई।
बहरहाल, मणिपुर की यह हिंसा अब लगभग 33 महीने पुरानी हो चुकी है। मौतें और विस्थापन बहुत बड़े पैमाने पर हुए, और नई सरकार बनने के बावजूद चुराचांदपुर जैसे इलाकों में अभी भी तनाव और छोटी-मोटी हिंसा देखी जा रही है। शांति की पूरी बहाली के लिए दोनों समुदायों के बीच विश्वास बहाली और राजनीतिक समाधान बहुत जरूरी है।