दीपम विवाद में फ़ैसला देने वाले और डीएमके की ओर से संसद में महाभियोग का सामना करने वाले मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने कहा है कि वे अपने बाक़ी कार्यकाल में सनातन धर्म को दिल के क़रीब रखेंगे। उन्होंने चेन्नई में एक निजी अवॉर्ड समारोह में यह बात कही।

जस्टिस स्वामीनाथन ने उस कार्यक्रम में ये बातें कहीं जिसे धारा फाउंडेशन ने आयोजित किया था। इसमें 'दिव्य अवॉर्ड्स' दिए गए। समारोह की शुरुआत में जस्टिस स्वामीनाथन ने मंच पर लगे एक खंभे पर दीपक जलाया। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उन्होंने मजाक में कहा, 'कृपया बताएँ कि यह कोई सर्वे स्टोन तो नहीं है?' यह बात उन्होंने इसलिए कही क्योंकि इससे पहले उन्होंने मदुरै के पास एक पहाड़ी तिरुप्परंकुंड्रम पर दीपक जलाने के मामले में फ़ैसला दिया था। उस फ़ैसले में विवाद हुआ था, जिसमें एक खंभे को लेकर बहस हुई कि वह सर्वे स्टोन है या मंदिर का दीपस्तंभ।
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जस्टिस स्वामीनाथन ने अवॉर्ड पाने वालों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र में उत्कृष्टता बेहद ज़रूरी है, लेकिन चरित्र और दूसरों की सेवा करने की भावना भी उतनी ही अहम है। उन्होंने कहा, 'यह कार्यक्रम मुझे प्रेरित कर रहा है कि मैं अपने बाक़ी कार्यकाल में उत्कृष्ट काम करूं और सनातन धर्म को दिल में रखूं।'


जस्टिस स्वामीनाथन ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, 'मुझे उम्मीद है कि मेरे बाक़ी 4.5 साल के कार्यकाल में मेरा पद नहीं छीना जाएगा।' यह इशारा उस इंपीचमेंट प्रस्ताव की तरफ़ था, जो डीएमके और उसके सहयोगी दलों ने उनके ख़िलाफ़ लाया है। यह प्रस्ताव तिरुप्परंकुंड्रम के दीपक जलाने के फ़ैसले के कारण आया था। उस फ़ैसले में जस्टिस स्वामीनाथन ने मंदिर पक्ष का समर्थन किया था, जिससे कुछ राजनीतिक दलों में नाराज़गी हुई।

जस्टिस स्वामीनाथन ने कहा कि वे बाक़ी समय में अच्छा काम करना चाहते हैं और सनातन धर्म की भावना को दिल में रखकर न्याय करते रहेंगे। इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालास्वामी भी मौजूद थे।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब जस्टिस स्वामीनाथन के कुछ फैसलों और टिप्पणियों पर बहस चल रही है। कई लोग इसे उनकी व्यक्तिगत आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे जज के रूप में उनकी स्वतंत्रता का हिस्सा मानते हैं।

कौन हैं जस्टिस स्वामीनाथन और विवाद क्या?

जस्टिस स्वामीनाथन मद्रास हाई कोर्ट के जज हैं और मदुरै बेंच में काम करते हैं। उनके एक फ़ैसले पर विवाद है जो तमिलनाडु के मदुरै में थिरुप्परंकुंड्रम से जुड़ा है। यहाँ भगवान मुरुगन यानी सुब्रमण्यम स्वामी का बहुत पुराना मंदिर है। पहाड़ी पर एक पुराना पत्थर का खंभा है। इसे दीपथून या दीप स्तंभ के रूप में जाना जाता है। यहाँ सदियों से कार्तिगई दीपम यानी कार्तिक मास में दीया जलाने के त्योहार पर दीया जलाया जाता था। लेकिन पास में एक दरगाह भी है। कुछ सालों से विवाद है कि दीया ऊपर वाले खंभे पर जलाना चाहिए या नीचे वाले पर।
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दिसंबर 2025 में जस्टिस स्वामीनाथन ने एक केस में फ़ैसला दिया कि मंदिर की परंपरा के अनुसार ऊपर वाले दीपथून पर दीया जलाया जाए। उन्होंने मंदिर कमिटी को आदेश दिया कि ऐसा करें और अगर नहीं तो याचिकाकर्ता खुद 10 लोगों के साथ सीआईएसएफ़ यानी सुरक्षा बल की मदद से दीया जला सकते हैं। तमिलनाडु सरकार ने इस आदेश का पालन नहीं किया, तो जज ने उन्हें फटकार लगाई। बाद में हाई कोर्ट की बड़ी बेंच ने भी इस फ़ैसले को सही ठहराया।

डीएमके ने क्या किया?

डीएमके और इंडिया गठबंधन के सांसदों ने संसद में इम्पीचमेंट मोशन दाखिल किया। यानी जस्टिस स्वामीनाथन को जज की पोस्ट से हटाने की मांग की। दिसंबर 2025 में 120 से ज़्यादा सांसदों के हस्ताक्षर के साथ यह मोशन लोकसभा स्पीकर को दिया गया। उनका आरोप है कि जज ने पक्षपात किया, निष्पक्ष नहीं रहे, और धार्मिक सद्भाव बिगाड़ा। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि उन्होंने एक खास समुदाय के वकीलों को फायदा दिया, लेकिन मुख्य वजह दीपम वाला फैसला ही है।
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क्यों इतना विवाद?

एक तरफ हिंदू भक्त कहते हैं कि यह पुरानी परंपरा है और जज ने सही फैसला दिया। दूसरी तरफ डीएमके सरकार कहती है कि इससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है, और जज ने व्यक्तिगत विश्वास से फैसला किया। यह मामला अब राजनीतिक हो गया है और जज के खिलाफ इम्पीचमेंट की मांग जारी है, लेकिन अभी कोई फैसला नहीं हुआ।

जस्टिस स्वामीनाथन ने एक मंदिर परंपरा को बचाने का फ़ैसला दिया, जिससे डीएमके नाराज़ हो गई और इम्पीचमेंट की कोशिश की। जज ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि बाकी समय शांति से काम कर पाएंगे।