डीएमके विधायक अनीता राधाकृष्णन ने सीएम तमिलनाडु विजय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। विधायक को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया। डीएमके प्रमुख स्टालिन ने पार्टी विधायक की गिरफ्तारी प्रतिशोध प्रेरित बताया।
बढ़ रहा है टकरावः तमिलनाडु में टीवीके बनाम डीएमके
तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त भारी उबाल है। DMK के वरिष्ठ नेता और विधायक अनीता आर. राधाकृष्णन को तमिलनाडु पुलिस ने शुक्रवार (3 जुलाई 2026) को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई मद्रास हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किए जाने के तुरंत बाद की गई। राधाकृष्णन पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके (TVK) प्रमुख जोसेफ विजय (अभिनेता से नेता बने दलपति विजय) के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ टिप्पणी करने का आरोप है। बता दें कि तमिलनाडु में दलपति को कुछ लोग थलापति भी लिखते और कहते हैं। दोनों का अर्थ एक ही है लेकिन तमिल भाषा के हिसाब से सही शब्द दलपति है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, यह पूरा विवाद 20 जून को तिरुचेंदूर के पास अतूर में आयोजित एक सार्वजनिक बैठक से शुरू हुआ था। यह बैठक पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की जयंती के उपलक्ष्य में बुलाई गई थी। इस कार्यक्रम में भाषण देते हुए डीएमके विधायक अनीता राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक और भड़काऊ बयानबाजी की थी। इस बयान के बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत से उन्हें कोई राहत नहीं मिली।इस पूरे विवाद के बीच मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी.के. इलंथिरैयन ने भी राधाकृष्णन के भाषण पर नाराजगी जताई और कहा कि तमिलनाडु में 1967 से ही फिल्म उद्योग से जुड़े नेताओं ने शासन किया है, लेकिन एक वरिष्ठ राजनेता को मुख्यमंत्री के पद की गरिमा का सम्मान करना चाहिए था।
डीएमके का तीखा पलटवार: "यह तानाशाही है"
इस गिरफ्तारी के बाद डीएमके और सत्तारूढ़ टीवीके के बीच राजनीतिक जंग और तेज हो गई है। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताई है। स्टालिन ने एक्स पर लिखा- "एक पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक, जो अपने निर्वाचन क्षेत्र में जनता के काम और विकास कार्यों का निरीक्षण कर रहे थे, उन्हें इतनी जल्दबाजी में गिरफ्तार करने की क्या जरूरत थी? मुख्यमंत्री 'सिनेमाई एक्शन स्टाइल' में 'पुलिस राज' चला रहे हैं।"स्टालिन ने टीवीके सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए एक पुराना मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पूछा कि श्रीवैकुंठम से टीवीके (TVK) के एक विधायक के खिलाफ सामूहिक बलात्कार पीड़िता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर सरकार ने ऐसी तत्परता क्यों नहीं दिखाई? उन्होंने आगे कहा, "यह सरकार राज्य में हत्याओं, डकैतियों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने में नाकाम रही है, लेकिन मानहानि के मामलों में विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करने में व्यस्त है। अगर मानहानि पर गिरफ्तारियां होने लगीं, तो आज के कई मंत्रियों को जेल में होना चाहिए।"
डीएमके सांसद कनिमोझी ने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा: "यह कार्रवाई पूरी तरह से अराजक और प्रतिशोध से प्रेरित है। राधाकृष्णन को उस समय हिरासत में लिया गया जब वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों का निरीक्षण कर रहे थे। यह सरकार विपक्ष को दबाने के लिए दमनकारी हथकंडों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन डीएमके ऐसी तानाशाही के आगे कभी नहीं झुकेगी।"
TVK और सरकार का पक्ष: "कानून अपना काम कर रहा है"
टीवीके सरकार के रुख को अदालत और मंत्रियों के बयानों में साफ देखा जा सकता है। मद्रास हाई कोर्ट में सरकारी वकील ने राधाकृष्णन की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि एक 7 बार के विधायक और पूर्व मंत्री से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वे एक निर्वाचित मुख्यमंत्री के खिलाफ इतनी आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल करें। पुलिस का कहना था कि अगर तुरंत एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई न की जाती, तो डीएमके और टीवीके कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें हो सकती थीं।यह जुबानी जंग केवल राधाकृष्णन के बयान तक सीमित नहीं है। टीवीके नेता और मंत्री आधव अर्जुना ने एक दिन पहले ही डीएमके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने सितंबर 2025 में टीवीके की रैली के दौरान हुई करूर भगदड़ (जिसमें 41 लोगों की मौत हुई थी) का जिक्र करते हुए आरोप लगाया था कि डीएमके ने पुलिस की मदद से उनके लोगों को निशाना बनाया था ताकि उदयनिधि स्टालिन के राजनीतिक करियर को बचाया जा सके। अर्जुना ने धमकी भरे लहजे में कहा था, "मुझे करूर मामले का हिसाब चुकता करना है और कानून अपना काम करेगा।"
DMK बनाम TVK की नई जंग
तमिलनाडु की राजनीति में यह घटना एक बहुत बड़े बदलाव और टकराव का संकेत है। इस पूरे विवाद के पीछे के सियासी समीकरणों को समझना बेहद जरूरी है:
- राजनीतिक समीकरणों का बदलना: अभिनेता विजय ने अपनी पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) बनाकर राज्य की राजनीति में कदम रखा और हालिया राजनीतिक उथल-पुथल के बीच वे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे हैं। लंबे समय से राज्य की सत्ता पर काबिज या मुख्य दावेदार रही डीएमके के लिए टीवीके (TVK) का यह उभार एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है।
- प्रतिशोध की राजनीति के आरोप: डीएमके का आरोप है कि मुख्यमंत्री विजय अब अपनी प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं की आवाज दबाने और राजनीतिक बदला लेने के लिए कर रहे हैं। वहीं, टीवीके समर्थकों का कहना है कि मुख्यमंत्री के पद और गरिमा पर की गई किसी भी अमर्यादित टिप्पणी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होना बिल्कुल लाज़मी है।
- आगामी चुनावों पर असर: इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने राज्य में दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच जमीनी स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में डीएमके इस मुद्दे को 'दमन' और 'तानाशाही' के रूप में जनता के बीच ले जाएगी, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्माने की उम्मीद है।