तेलंगाना पुलिस ने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे बंडी साई भगीरथ को POCSO यानी बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण मामले में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने लंबे समय तक तलाशी अभियान चलाने के बाद शाम 8:15 बजे उन्हें पकड़ा। साइबराबाद के पुलिस आयुक्त एम. रमेश ने बताया कि भगीरथ को पेटबशीराबाद पुलिस स्टेशन ले जाया गया है। वहां उनका मेडिकल टेस्ट होगा और फिर उन्हें लोकल मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री का दावा- मैंने बेटे को सौंपा

बंडी संजय कुमार ने कहा कि उनका बेटा अपनी मर्जी से पुलिस के सामने पेश हुआ। उन्होंने कहा, 'कानून का पूरा सम्मान करते हुए हमने अपने वकील के जरिए बेटे को पुलिस को सौंप दिया।' तो सवाल उठता है कि मंत्री ने आख़िर अपने बेटे को पुलिस को सौंपने में देरी क्यों की? मंत्री ने आगे बताया कि भगीरथ बार-बार कह रहा है कि उसने कोई गलत काम नहीं किया। शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद उसे पुलिस को सौंपने का इरादा था, लेकिन वकीलों से सलाह ली गई। वकीलों को सबूत देखकर भरोसा था कि केस खारिज हो सकता है और जमानत मिल जाएगी, इसलिए थोड़ी देरी हुई।
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हालाँकि, पुलिस की यह गिरफ़्तारी की कार्रवाई तब हुई है जब तेलंगाना पुलिस ने शनिवार को दिन में भगीरथ के ख़िलाफ़ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया था। इससे पहले भगीरथ को तेलंगाना हाई कोर्ट ने गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ राहत देने से मना कर दिया था। यानी भगीरथ के सामने अब कोई भी रास्ता नहीं बचा था।

भगीरथ पर क्या हैं आरोप?

शिकायत के मुताबिक़ भगीरथ पर जून 2025 में एक 17 साल की लड़की से दोस्ती के बाद अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच बार-बार यौन शोषण का आरोप है। लड़की की मां ने 8 मई को पेटबशीराबाद पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता की मां ने आरोप लगाया कि भगीरथ ने लड़की का बार-बार यौन शोषण किया, भावनात्मक ब्लैकमेल किया, उसे अलग-थलग किया और उसकी पढ़ाई के फ़ैसलों पर भी नियंत्रण करने की कोशिश की। 

पुलिस ने पहले महिला की गरिमा भंग करने, यौन उत्पीड़न और POCSO एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया। बाद में लड़की का बयान दर्ज होने के बाद गंभीर यौन हमले की धारा भी जोड़ दी गई।

हाई कोर्ट से झटका

तेलंगाना हाई कोर्ट ने शुक्रवार रात ही भगीरथ को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। उनके वकील सीनियर एडवोकेट एस. निरंजन रेड्डी ने दो घंटे से ज्यादा चली सुनवाई में कहा कि पुलिस को गिरफ्तारी न करने का निर्देश दिया जाए और सख्त शर्तें लगाई जा सकती हैं। लेकिन जस्टिस टी. माधवी देवी ने लड़की के बयान को देखते हुए कहा, 'इस स्टेज पर मैं कोई अंतरिम राहत देने के पक्ष में नहीं हूं।'
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सोशल मीडिया पर चल रहे 'स्मियर कैंपेन' पर नाराजगी जताई। जज ने कहा कि कुछ लोग यह अफवाह फैला रहे थे कि जज पर दबाव डाला गया है। कोर्ट ने साफ़ कहा कि वह इस मामले की सुनवाई से नहीं हटेगी। भगीरथ के वकील ने दलील दी कि मूल शिकायत में 'penetrative assault' का आरोप नहीं था, बाद में बयान में सुधार किया गया। उन्होंने कहा कि POCSO के कुछ मामलों में अंतरिम राहत दी गई है, इसलिए यहां भी दी जा सकती है। राज्य सरकार के वकील ने कहा कि पीड़िता नाबालिग है, POCSO मामले में अग्रिम जमानत नहीं मिल सकती। साथ ही आरोपी का प्रभावशाली परिवार होने का जिक्र करते हुए पूछा, 'पीड़िता के मन में कितना डर होगा?'

भगीरथ का पलटवार

भगीरथ ने भी लड़की के परिवार पर 5 करोड़ रुपये की मांग करने और जबरन शादी कराने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने इसे ब्लैकमेलिंग का मामला बताया। पुलिस ने गिरफ्तारी से पहले भगीरथ के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया था। उनके पिता के करीमनगर वाले घर, हैदराबाद के बंजारा हिल्स में रिश्तेदार के घर और यूसुफगुड़ा में दोस्तों के घरों पर छापेमारी की गई थी।
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भगीरथ अब पुलिस हिरासत में हैं। आगे की जांच चल रही है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आरोपी एक केंद्रीय मंत्री का बेटा है। मंत्री परिवार ने कानून का सम्मान करते हुए सहयोग करने की बात कही है, जबकि पीड़िता पक्ष न्याय की उम्मीद जता रहा है।