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त्रिपुरा सीएम बिप्लब देब ने पंजाबी, जाटों को कम बुद्धिमान बताया, फिर माफ़ी माँगी

बिप्लब कुमार देब त्रिपुरा के मुख्यमंत्री हैं। इस तथ्य से अनजान व्यक्ति यदि उनके बयान सुने तो शायद विश्वास न कर पाए कि ऐसा बयान कोई मुख्यमंत्री भी दे सकता है! मुख्यमंत्री जैसे पद पर ज़िम्मेदार व्यक्ति भला ऐसे कैसे कह सकता है कि पंजाबी और जाट ताक़तवर होतें हैं लेकिन उनके पास कम दिमाग़ होता है! कौन ऐसा मुख्यमंत्री होगा जो यह कहेगा कि महाभारत काल में इंटरनेट और सैटेलाइट थे! क्या मुख्यमंत्री बेरोज़गारों को पान की दुकान खोलने और गाय पालने की नसीहत दे सकता है? ऐसा कौन कहेगा कि मिस यूनिवर्स डायना हेडन इंडियन ब्यूटी नहीं हैं। 

यह किसी गली-मोहल्ले में मटरगश्ती कर रहे लोगों की भाषा नहीं है। ये सारे बयान बिप्लब देब के हैं। क्या मुख्यमंत्री जैसे ज़िम्मेदार पद पर व्यक्ति को भाषा की मर्यादा नहीं रखनी चाहिए? यह हो सकता है कि कभी किसी नेता की ज़ुबान फिसल जाए। लेकिन यदि बार-बार ऐसी ही भाषा बोली जाए तो क्या हर बार उसे ज़ुबान फिसलना कहा जाएगा?

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बहरहाल, बिप्लब देब का जो ताज़ा बयान आया है वह बेहद ही ख़राब है। आप ख़ुद ही पढ़िए। सीएम बिप्लब कुमार देब ने कहा था, 'अगर हम पंजाब के लोगों की बात करें तो हम कहते हैं, वह एक पंजाबी हैं, एक सरदार हैं! सरदार किसी से नहीं डरता। वे बहुत मज़बूत होते हैं लेकिन दिमाग़ कम होता है। कोई भी उन्हें ताक़त से नहीं बल्कि प्यार और स्नेह के साथ जीत सकता है।' वह अगरतला प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। 

इसके आगे बिप्लब कुमार देब ने कहा, 'मैं आपको हरियाणा के जाटों के बारे में बताता हूँ। तो लोग जाटों के बारे में कैसे बात करते हैं... वे कहते हैं... जाट कम बुद्धिमान हैं, लेकिन शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं। यदि आप एक जाट को चुनौती देते हैं, तो वह अपनी बंदूक़ अपने घर से बाहर ले आएगा।'

यह बयान ग़लत है, हर कोई यह जानता है। शायद मुख्यमंत्री को यह पता नहीं था। लेकिन जब आलोचना हुई तो उनकी आँखें खुलीं। जब आँखें खुली तो उन्होंने माफ़ी माँगी। ट्विटर पर सफ़ाई दी। वह भी हिंदी में। 

वैसे उनकी आँखें तब खुलीं जब देश भर में उनकी ज़बरदस्त आलोचना हुई। हालाँकि लगता है कि उनको इन आलोचनाओं से ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता। यदि ऐसा होता तो एक के बाद एक वह लगातार ऐसे ही विवादित बयान नहीं देते रहते क्योंकि हर बार ऐसे बयानों पर उनकी आलोचना होती रही है। इसके बावजूद जब तब उनका ऐसा ही बयान आ जाता है। 

'महाभारत काल में इंटरनेट और सैटेलाइट'

बिप्लब देब के सबसे चर्चित बयानों में से एक 'महाभारत काल में इंटरनेट और सैटेलाइट होने' का है। उन्होंने अप्रैल 2018 में अगरतला में आयोजित कार्यक्रम में कहा था कि देश में महाभारत युग में भी तकनीकी सुविधाएँ उपलब्ध थीं, जिनमें इंटरनेट और सैटेलाइट भी शामिल थे। उन्होंने कहा था- 

महाभारत के दौरान संजय ने हस्तिनापुर में बैठकर धृतराष्ट्र को बताया था कि कुरुक्षेत्र के मैदान में युद्ध में क्या हो रहा है। संजय इतनी दूर रहकर आँख से कैसे देख सकते हैं, सो, इसका मतलब है कि उस समय भी तकनीक, इंटरनेट और सैटेलाइट था।


बिप्लब देब, मुख्यमंत्री, त्रिपुरा

बेरोज़गारों को नसीहत

बिप्लब देब ने युवाओं को नौकरियों के बदले पान की दुकान खोलने की सलाह दी थी। 2018 में ही अप्रैल महीने में उन्होंने कहा था कि युवा सरकारी नौकरी तलाश करने के लिए राजनीतिक पार्टियों के पीछे भागने की बजाय पान की दुकान लगा ले तो उसके बैंक खाते में अब तक 5 लाख रुपए जमा होते। उन्होंने पशु पालने की भी नसीहत दी थी।

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'मैकेनिकल नहीं सिविल इंजीनियर दें सिविल सर्विसेज की परीक्षा'

बिप्लब देब ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले लोगों को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा कि, ‘मैकेनिकल इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले लोगों को सिविल सेवाओं का चयन नहीं करना चाहिए। समाज का निर्माण करना है। ऐसे में सिविल इंजीनियरों के पास यह ज्ञान है क्योंकि जो लोग प्रशासन में हैं उनको समाज का निर्माण करना है।'

मिस यूनिवर्स डायना हेडन पर भी विवादित बयान

बिप्लब देब ने मिस वर्ल्ड डायना हेडन को लेकर भी विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था, 'डायना हेडन इंडियन ब्यूटी नहीं हैं। डायना हेडन की जीत फिक्स थी। डायना हेडन भारतीय महिलाओं की सुंदरता का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। ऐश्वर्या राय करती हैं।' हालाँकि बाद में उन्होंने अपने इस बयान पर ख़ेद भी जताया था। 

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