अयोध्या में जीएसटी कमिश्नर ने यूजीसी नियमों पर मोदी-योगी को बुरा-भला कहे जाने पर रोते हुए नौकरी से इस्तीफा दे दिया। उधर, बरेली के निलंबित नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने डीएम दफ्तर बरेली के बाहर प्रदर्शन किया।
अयोध्या के जीएसटी कमिश्नर प्रशांत सिंह का इस्तीफा
UGC और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में यूपी में दूसरा इस्तीफा: जीएसटी उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने सीएम योगी-पीएम मोदी के अपमान का हवाला देकर त्यागपत्र दिया। उन्होंने बाकायदा मीडिया को बुलाकर अपनी पत्नी को फोन पर रोते हुए नौकरी से इस्तीफा देने की घोषणा की। दूसरी तरफ 26 जनवरी को बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दिया था। उन्हें यूपी सरकार ने रात को ही निलंबित कर दिया और बंगला खाली करा लिया। निलंबन के विरोध में अलंकार ने मंगलवार 27 जनवरी को डीएम बरेली के दफ्तर के बाहर धरना दिया।
उत्तर प्रदेश में इस विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। अयोध्या में तैनात उत्तर प्रदेश जीएसटी विभाग के उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया है। सिंह ने कहा है कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी निष्ठा के कारण शंकराचार्य द्वारा लगाए गए आरोपों को बर्दाश्त नहीं कर सके। उन्होंने इस्तीफा पत्र राज्यपाल को भेज दिया है।
प्रशांत सिंह का इस्तीफा बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के ठीक बाद आया है, जिन्होंने शंकराचार्य के साथ कथित अपमान और नए यूजीसी नियमों (Promotion of Equity in Higher Education Regulations 2026) के विरोध में पद छोड़ा था। अग्निहोत्री ने इन नियमों को ब्राह्मणों के खिलाफ अत्याचार का माध्यम बताया था, जो सामाजिक अशांति पैदा कर सकते हैं। उन्होंने माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्यों और वृद्ध संतों के साथ कथित मारपीट का जिक्र किया था, जिसमें त्रिवेणी संगम पर पवित्र स्नान से रोके जाने और ज्योतिषपीठ के संतों पर लात-घूंसे-जूते चलाने की घटना शामिल है।
बरेली में निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट का धरना
बरेली में तहलका मचा हुआ है, जहां निलंबित और इस्तीफा दे चुके पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। अग्निहोत्री, जो 2019 बैच के प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) अधिकारी हैं, ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनका निलंबन एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है और उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के खिलाफ अभियान चल रहा है।
अग्निहोत्री ने मीडिया को बताया कि इस्तीफा देने के बाद सोमवार को जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के कैंप कार्यालय में उन्हें रात भर रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा, "डीएम सर को लखनऊ से फोन आया कि इस 'पंडित' को यहां ही बैठाकर रखें और रात भर न जाने दें।" उन्होंने बार एसोसिएशन के सचिव दीपक पांडे को सूचित किया कि मीडिया को इस 'बंधक' बनाने की साजिश के बारे में बताया जाए। मीडिया को जानकारी मिलते ही उन्हें जाने दिया गया।
अग्निहोत्री ने धरने के दौरान गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह साजिश उन्हें कोई बयान देने के लिए मजबूर करने और फिर किसी अन्य आरोप में निलंबित करने की थी। उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की जाए और फोन पर हुई पूरी बातचीत की जांच हो। साथ ही, उन्होंने निलंबन आदेश के खिलाफ अदालत का रुख करने की बात कही है।
ब्राह्मण विरोधी अभियान का आरोप
पूर्व मजिस्ट्रेट ने राज्य सरकार पर ब्राह्मण विरोधी अभियान चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा, "उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। कहीं डिप्टी जेलर ब्राह्मण को पीट रहा है, तो कहीं पुलिस स्टेशन में विकलांग ब्राह्मण की मौत हो गई।" उन्होंने प्रयागराज के माघ मेले का हवाला देते हुए कहा कि मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज और उनके शिष्यों तथा वृद्ध संतों को लात-घूंसे और जूतों से पीटा गया। अग्निहोत्री ने सवाल उठाया, "जब प्रशासन इस तरह मारपीट करता है, तो क्या संदेश दिया जा रहा है? क्या ब्राह्मणों का नरसंहार करवाना चाहते हैं?"
उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए और उत्तर प्रदेश में संवैधानिक मशीनरी की विफलता मानते हुए यहां राष्ट्रपति शासन लगाया जाए।
उल्लेखनीय है कि अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा नए यूजीसी नियमों के विरोध में दिया था, जिन्हें उन्होंने 'काले कानून' करार दिया और सामान्य वर्ग के छात्रों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। राज्य सरकार ने उन्हें 'अनुशासनहीनता' के आरोप में निलंबित कर दिया और शामली जिले के डीएम कार्यालय से संबद्ध किया।
धरना स्थल पर ब्राह्मण संगठनों और समर्थकों की भीड़ जुट रही है। अग्निहोत्री ने कहा है कि अगला कदम जल्द तय किया जाएगा। यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद में तब्दील हो चुका है, जहां विपक्षी दल इसे संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं।