इलाहाबाद विश्वविद्यालय में यूजीसी नियमावली 2026 पर चर्चा के दौरान बड़ा बवाल हो गया। दिशा छात्र संगठन का कहना है कि इसने बरगद लॉन में शांतिपूर्ण परिचर्चा रखी थी, लेकिन दूसरे छात्रों ने विवाद खड़ा कर दिया। फिर दो छात्र गुटों में झड़प हो गई। मारपीट में कई छात्र-छात्राएं घायल हुए। दिशा संगठन ने इसे संघ से जुड़े 'बदमाशों' का हमला बताया है, जबकि दूसरे पक्ष ने आरोप लगाया कि दिशा के लोग आपत्तिजनक नारे लगा रहे थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

दिशा छात्र संगठन ने मंगलवार को यूजीसी नियमावली 2026 पर चर्चा का आयोजन किया था। यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण चल रहा था। संगठन का आरोप है कि अचानक 30-40 युवक वहां पहुंचे और गाली-गलौज शुरू कर दी। दिशा के छात्रों का कहना है कि इन लोगों ने जातिसूचक गालियाँ दीं, लड़कियों के साथ बदतमीजी की, बाल खींचे और पेट में घूँसे मारे।
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घायलों में पूजा, निधि, सौम्या, चंद्रप्रकाश और संजय शामिल हैं। संजय को नाक पर मुक्का मारा गया, जिससे खून बहने लगा। निधि के नाक पर गंभीर चोट आई। पूजा ने बताया, 'वे लड़कियों को बहुत गंदी-गंदी गालियां दे रहे थे। बाल पकड़कर घसीट रहे थे। विरोध करने पर मारने लगे।' छात्र संगठन के चंद्रप्रकाश ने आरोप लगाया, 'ये अराजक तत्व विश्वविद्यालय का माहौल खराब कर रहे हैं। प्रशासन चुपचाप देखता रहा।'

दिशा संगठन का आरोप है कि हमलावर एक खास संगठन से जुड़े थे। वे बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ी से आए और हमला किया। छात्रों के मुताबिक, जब ज्यादा छात्र इकट्ठा हुए तो हमलावर भाग गए। संगठन की ओर से आरोप लगाया गया है कि प्रॉक्टर आए, लेकिन उन्होंने हमलावरों को जाने दिया और घायल छात्रों को अपने ऑफिस ले गए। संगठन ने इसे शर्मनाक बताया और प्रशासन व जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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दूसरे पक्ष का दावा

दूसरे छात्र गुट का कहना है कि दिशा के लोग आपत्तिजनक और उकसाने वाले नारे लगा रहे थे। वे क्लास जा रहे थे और शांति से रुकने को कहा, लेकिन दिशा वालों ने गालियां दीं और मारपीट शुरू कर दी। दोनों तरफ से घायल होने की बात कही गई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया

विश्वविद्यालय की तरफ़ से जनसंपर्क अधिकारी प्रो. जया कपूर ने कहा कि कार्यक्रम बिना अनुमति के था। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि बरगद लॉन में यूजीसी नियमावली-2026 विषय पर बिना किसी पूर्व अनुमति के दिशा छात्र संगठन के लोग कार्यक्रम और नारेबाजी कर रहे थे। दूसरे छात्रों ने विरोध किया तो दो गुटों में झड़प हुई, जिसमें हिंसा और जातिसूचक भाषा का इस्तेमाल हुआ। प्रशासन ने घायलों का इलाज कराया और जांच शुरू की है। उन्होंने चेतावनी दी कि कैंपस में हिंसा, गाली-गलौज या महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू की है।
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यूजीसी नियमावली 2026 क्या है?

यूजीसी नियमावली 2026 भारत के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव को रोकने और समानता को बढ़ावा देने के लिए लाई गई है। इसमें खासकर जाति-आधारित भेदभाव पर फोकस है, जो एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ होता है। यह 2012 की पुरानी एंटी-डिस्क्रिमिनेशन गाइडलाइंस की जगह लेने वाली ज्यादा सख्त और अनिवार्य व्यवस्था है। इसमें हर उच्च शिक्षा संस्थान में समानता समिति का गठन अनिवार्य है। केवल एससी,एसटी, ओबीसी के खिलाफ जाति के आधार पर भेदभाव को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

जनरल कैटेगरी से आने वाले छात्रों का आरोप है कि जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा सिर्फ एससी, एसटी, ओबीसी तक सीमित होने से यह एक तरफा है और दुरुपयोग की आशंका है। देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए, सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी। 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि प्रावधान अस्पष्ट हैं और दुरुपयोग की आशंका है। फिलहाल 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे, जब तक कोर्ट अंतिम फैसला नहीं दे देती। कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC से जवाब मांगा है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इसी मुद्दे पर एक छात्र संगठन ने चर्चा आयोजित की थी। इससे पहले भी इस मुद्दे पर बहस और विरोध हुए हैं। यह घटना दिखाती है कि विश्वविद्यालयों में विचारों की बहस हिंसा में बदल जाती है।