अयोध्या के राम मंदिर में दान का चढ़ावा, कैश आदि चोरी के आरोपों के बीच देश-विदेश से राम भक्तों द्वारा भेजी गईं लगभग 1250 बहुमूल्य श्रीराम शिलाएं भी अब अपने स्थान पर नहीं हैं। उनका हिसाब-किताब भी नहीं मिल रहा।
अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद अब चढ़ावे और दान को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में एक नया और बेहद गंभीर मोड़ तब आया जब हिंदूवादी नेता संतोष दुबे ने मंगलवार को पुलिस थाने में एक लिखित शिकायत सौंपकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई प्रमुख लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की। इस बीच सारे मामले की जांच कर रही एसआईटी मौके पर पहुंच गई हैं। कांग्रेस विधायक दल की नेता अराधना मिश्रा मोना और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय रॉय ने मंगलवार 16 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस मामले को उठाया है। उन्होंने कहा कि आरएसएस और बीजेपी ने श्रीराम के नाम पर जनता को संगठित तरीके से लूटा है।
इस शिकायत में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और टीनू यादव को नामजद किया गया है। इन सभी पर मंदिर को मिलने वाले चढ़ावे और दान की राशि में हेराफेरी (गबन) करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। टीनू यादव लंबे समय से चंपत राय के ड्राइवर हैं।
श्रीराम शिलाएं गायब होने का आरोप
चढ़ावा विवाद के बीच अब एक और चौंकाने वाला आरोप सामने आया है, जिसने इस पूरे मामले को और गरमा दिया है। आरोप है कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान देश और विदेश से राम भक्तों द्वारा भेजी गईं लगभग 1250 बहुमूल्य श्रीराम शिलाएं अब अपने स्थान पर नहीं हैं और उनका कोई हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है।आरोप है कि इन गायब शिलाओं में कई ऐसी थीं जो सोने, चांदी और बेशकीमती रत्नों से जड़ी हुई थीं। इनमें सबसे मूल्यवान शिला मॉरीशस से भेजी गई थी, जबकि मुंबई के एक बड़े व्यापारी ने हीरे से जड़ी एक अत्यंत कीमती शिला दान में दी थी। इस खुलासे के बाद अयोध्या में कई तरह के सवाल तैर रहे हैं कि इन ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की भेंटों का रिकॉर्ड कहां है? ये किसकी कस्टडी में थीं और इनकी सुरक्षा व निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी?
अयोध्या के संतों का कहना है कि वे इस पूरे मामले में सामने आकर जांच टीम को चढ़ावा चोरी से जुड़े एक संगठित गिरोह (Organized Gang) के बारे में अहम जानकारियां सौंपना चाहते हैं। फिलहाल पुलिस के पास कई लिखित शिकायतें पहुंची हैं लेकिन अभी तक एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
मंदिर परिसर में SIT का दूसरा दिन
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) ने अयोध्या पहुंचकर मामले की कमान संभाल ली है। तीन सदस्यीय एसआईटी जांच टीम ने मामले से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रिकॉर्ड को अपने कब्जे में ले लिया है। सरकार ने इस तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन खुद 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के लिखित अनुरोध पर 13 जून 2026 को किया था, ताकि दान राशि में कथित हेराफेरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सके और भ्रामक जानकारियों पर लगाम लगाई जा सके। हालांकि एसआईटी का पहला फोकस दान राशि और कैश काउंटिंग सिस्टम पर है, लेकिन यदि सरकार के निर्देश (Terms of Reference) में शामिल होता है, तो जांच टीम इन 1250 गायब श्रीराम शिलाओं के इनपुट और रिकॉर्ड की भी गहराई से पड़ताल कर सकती है।
हाईकोर्ट के जज से मामले की जांच कराई जाएः कांग्रेस
कांग्रेस विधायक दल की नेता अराधना मिश्रा मोना और प्रदेश अध्यक्ष अजय रॉय ने मंगलवार को इस मामले को उठाया। अराधना मिश्रा ने कहा कि प्रभु श्रीराम में आस्था रखने वाले लोगों की आस्था पर BJP ने आघात किया है। ये लोग प्रभु श्रीराम के पुजारी नहीं, बल्कि उनके नाम पर व्यापार करने वाले लोग हैं। आज चढ़ावे में घोटाले का मामला सामने आया है, लेकिन अगर पृष्ठभूमि देखें तो जमीन अधिग्रहण के समय भी मेयर के परिवार के लोगों ने सस्ती जमीन खरीदकर ट्रस्ट को महंगे दामों पर बेची थी। हम सभी ने देखा था कि मंदिर के आसपास मौजूद सेना की जमीनों को कैसे नियम बदलकर बड़े-बड़े लोगों को सौंपा गया था। मंदिर निर्माण के समय पहली बारिश में करोड़ों की लागत से बनी सड़क धंस गई थी और गर्भगृह में पानी टपक रहा था। क्या ये सनातन में विश्वास रखने वालों के साथ धोखा नहीं था?
अराधना मिश्रा ने कहा- BJP-RSS ने श्रीराम मंदिर परिसर के निर्माण से लेकर चढ़ावे तक में घोटाला किया है। इससे साबित होता है कि BJP-RSS के लोगों की नीयत न पहले साफ थी और न आज साफ है। BJP ने हमेशा प्रभु श्रीराम के नाम का व्यापार किया है। इस मामले में उच्च न्यायालय के सिटिंग जज के द्वारा समयबद्ध जांच हो और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। आज ही एक प्रकरण और सामने आया है कि 1250 श्री राम शिलाएं गायब हो चुकी हैं। BJP-RSS ने जिस तरह से प्रभु श्री राम पर आस्था रखने वालों को धोखा दिया है, उससे पर्दा उठ चुका है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय रॉय ने भी इस मामले को उठाते उन्हीं बातों को दोहराया। अजय ने कहा- इस मामले में हाईकोर्ट के सिटिंग जज के द्वारा समयबद्ध जांच कराई जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। इस संगठित लूट के जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं।