अयोध्या राम मंदिर चंदे में कथित गबन के मामले में भारी दबाव के बीच दर्ज एफ़आईआर में चंपत राय के ड्राइवर रहे रमाशंकर यादव उर्फ टीनू, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष व करुणेश व एक अन्य आरोपी बनाए गए हैं।
राम मंदिर चंदे में कथित गबन के मामले में चौतरफा दबाव के बीच आख़िरकार गुरुवार को एफ़आईआर दर्ज हो गई। राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में 8 नामजद आरोपियों और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोपियों में चंपत राय का ड्राइवर रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू भी शामिल हैं। यह FIR श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य श्री कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज हुई। ट्रस्ट ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की मांग की थी। इस कार्रवाई के बाद अखिलेश यादव ने बड़े लोगों को बचाए जाने का आरोप लगाया है। अखिलेश ने क्या आरोप लगाया है, ये जानने से पहले यह जान लें कि आख़िर एफ़आईआर में क्या आरोप लगाए गए हैं और किनको आरोपी बनाया गया है।
FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 306 यानी आपराधिक विश्वास भंग करना, धारा 316(5), 317(4), 317(5) यानी धोखाधड़ी, धारा 61 और 3(5) यानी आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर यह मुकदमा दर्ज किया गया है।
कौन-कौन हैं आरोपी?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार नामजद आरोपियों में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, रामशंकर मिश्रा, सुभाष और करुणेश हैं। एक आरोपी का नाम अभी तक पता नहीं चल सका है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने बताया कि रामशंकर यादव ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर हुआ करते थे और 2022 में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद से ही मंदिर के मैनेजमेंट से जुड़े हुए थे।फुनगी को फाँसी, शाखाओं को मिलेगी माफ़ी: अखिलेश
मंदिर के चढ़ावे और चंदे में गड़बड़ी के आरोपों पर एफ़आईआर दर्ज किए जाने के बाद अखिलेश यादव ने बड़े लोगों के बचाए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'भाजपा राज में नाइंसाफ़ी की दिखेगी ये झांकी- फुनगी को फाँसी, शाखाओं को मिलेगी माफ़ी!'
उन्होंने आगे कहा, 'जनता कह रही है कि पहले SIT के बहाने सारे सबूत साफ़ कर दिये गये होंगे और ये निश्चित कर लिया गया होगा कि किन बड़ी मछलियों को बचाना है और किसको फँसाना है, उसके बाद FIR हो रही है। लगता है SIT को पहले रिपोर्ट बनाकर दे दी गई होगी और उसके हिसाब से जाँच की गई होगी मतलब निष्कर्ष पहले निकाल लिया गया होगा।'एसआईटी रिपोर्ट के बाद कार्रवाई
राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान की रकम में करोड़ों रुपये गबन होने के आरोप लगे थे। कार्रवाई करने के लिए विपक्षी दलों के भारी राजनीतिक दबाव के बाद इन आरोपों को लेकर ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से एसआईटी गठित करने की मांग की। बिना कोई एफ़आईआर दर्ज हुए ही 13 जून 2026 को सरकार ने एसआईटी बनाई थी। इसको लेकर सरकार को काफी आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा।लखनऊ डिविज़नल कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी लखनऊ रेंज किरण एस और वित्त विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी नील रतन वाली तीन सदस्यों की एसआईटी ने मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को शुरुआती रिपोर्ट सौंपी थी।
पता चला है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह इस रिपोर्ट की समीक्षा की, क्योंकि वे पिछले दो दिनों से लखनऊ से बाहर थे। कुछ रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि एसआईटी ने अपनी शुरुआती जाँच रिपोर्ट में एफ़आईआर दर्ज करने की सिफारिश की। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर एफ़आईआर दर्ज की गई।
कार्रवाई के लिए चौतरफा दबाव
यह विवाद 7 जून को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान के बाद तेज हुआ। अखिलेश यादव ने कहा था कि मंदिर में दिए गए करोड़ों रुपये गायब हैं और अदालत को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस पर तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'पूरी दुनिया देख रही है। राम मंदिर आंदोलन के समय जब सपा सरकार थी, तब गोली चलाई गई थी।' हालाँकि, बाद में जब दबाव बढ़ा तो वीएचपी ने भी जाँच की मांग की।
क्या गिरफ़्तारियाँ होंगी?
मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि जाँच आगे बढ़ने पर बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कहा है कि मंदिर में आने वाले दान का सही उपयोग हो और किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि राम मंदिर करोड़ों हिंदू भक्तों की आस्था का केंद्र है। अब एफ़आईआर के बाद केस तेजी से आगे बढ़ सकता है।राम मंदिर जमीन 'घोटाले' का आरोप भी उछला
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने गुरुवार को अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम को अहम दस्तावेज सौंपे। संजय सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भूमि खरीद के माध्यम से करोड़ों रुपये का घोटाला किया है। उन्होंने लिखा, 'मैंने एसआईटी को सभी दस्तावेज सौंप दिए हैं। आगे क्या कार्रवाई होगी, यह तो केवल भगवान राम ही जानते हैं।'एसआईटी के समक्ष पेश होने के बाद संजय सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'मेरा उद्देश्य SIT के सामने अपनी बात रखना और अपने पास मौजूद दस्तावेज जमा करना था। ये दस्तावेज मामले के विभिन्न पहलुओं को उजागर करने में मदद कर सकते हैं।' उन्होंने दावा किया कि SIT चेयरमैन ने स्वयं उनसे संपर्क किया था और जांच में सहयोग करने के लिए आमंत्रित किया था।
इसी बीच, आप ने बताया कि पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल अयोध्या जाएंगे। वह 26 जून को राम मंदिर तथा हनुमानगढ़ी मंदिर का दौरा करेंगे। यह पूरा मामला राम मंदिर ट्रस्ट की भूमि खरीद और दान प्रबंधन को लेकर उठे विवादों के बीच राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।