अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान (कैश, सोना और चांदी) में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और गबन के आरोपों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में अब दो बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। एक तरफ जहां राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले की उच्च स्तरीय और एसआईटी (SIT) जांच कराने की मांग की है। इस ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय हैं, जो तमाम आरोपों से घिर गए हैं। वहीं दूसरी तरफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच और कैग (CAG) से स्पेशल फॉरेंसिक ऑडिट कराने की गुहार लगाई गई है।

राम मंदिर ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखा

विवाद को बढ़ता देख और सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों व कयासों पर विराम लगाने के लिए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। ट्रस्ट ने मांग की है कि इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए और उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। 

आरोपों में घिरे चंपतराय ने क्या कहा

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि दान के कलेक्शन, गिनती और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत, पारदर्शी और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अधिकारियों की देखरेख में ऑडिटेड है। हालांकि, देश-विदेश के करोड़ों भक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ट्रस्ट ने खुद जांच की मांग की है। इस बीच ट्रस्ट ने साल 2024 से अब तक के वित्तीय रिकॉर्ड्स और सीसीटीवी फुटेज की आंतरिक जांच भी शुरू कर दी है। दान हेराफेरी के मामले में खुद चंपतराय शुरू से आरोपों में घिरे हुए हैं।

पूर्व मुख्य लेखा अधिकारी के गंभीर खुलासे

हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व मुख्य लेखा अधिकारी (Head of Accounts) महिपाल सिंह द्वारा किए गए चौंकाने वाले दावों का हवाला दिया गया है। महिपाल सिंह जनवरी 2021 से अप्रैल 2022 तक ट्रस्ट के पद पर थे। उनके आरोप इस तरह हैंः
  • कैश काउंटिंग में हेरफेर: मंदिर के दानपात्रों से निकलने वाले कैश की गिनती के दौरान हेराफेरी की जाती थी। उदाहरण के लिए, अगर 12 लाख रुपये गिने जाते थे, तो वाउचर में केवल 9 से 10 लाख रुपये ही दर्ज किए जाते थे और बाकी का कैश बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से गायब कर दिया जाता था।
  • शिकायत करने पर पद से हटाया: महिपाल सिंह ने दावा किया कि जब उन्होंने एक बार वाउचर से 5 लाख रुपये अधिक (सरप्लस) कैश पकड़ा और इसकी शिकायत चंपत राय व गोपाल राव से की, तो उन पर कार्रवाई करने के बजाय खुद महिपाल सिंह को ही उनके पद से हटा दिया गया।
  • CCTV फुटेज डिलीट करने का आरोप: याचिका के अनुसार, इस हेराफेरी के सबूत मिटाने के लिए करीब 7 से 8 महीने पुराने सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को डिलीट कर दिया गया।
  • सोने-चांदी के बक्से गायब करने का आरोप: श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने और चांदी से भरे 10 चेस्ट-बॉक्स (तिजोरियां) बिना किसी आधिकारिक रसीद, रिकॉर्ड या एंट्री के 'टिन्नू' नाम के व्यक्ति द्वारा ले जाए गए। विरोध करने पर अधिकारी को सिर्फ चुप रहने की सलाह दी गई।

कर्मचारी हिरासत में लिए गए, कैश बरामद, फिर भी निष्पक्ष जांच नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि संदिग्ध गतिविधियों के आरोप में पुलिस ने मंदिर के 4 कर्मचारियों को हिरासत में लिया था। एक कर्मचारी के बैंक खाते से जुड़े लिंक से करीब 5 लाख रुपये बरामद भी किए गए थे। इसके बावजूद, ट्रस्ट के प्रवक्ता गोपाल राव और सुरक्षा अधिकारी बलरामचारी दुबे ने मीडिया की इन खबरों को 'महज अफवाह' बताकर खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब पुलिस बरामदगी कर चुकी है, तब भी ट्रस्ट द्वारा मामले को दबाने की कोशिश (संस्थानिक इनकार) यह दर्शाता है कि ट्रस्ट आंतरिक रूप से निष्पक्ष जांच नहीं करना चाहता।

मामले पर गहराया सियासी घमासान

राम मंदिर के दान में धांधली की खबरों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है:

अखिलेश यादव (सपा): समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि यह घोटाला करीब 5 से 7 करोड़ रुपये का हो सकता है। उन्होंने न्यायपालिका से इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने की मांग की है।
भाजपा नेता की मांग: भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. रजनीश सिंह ने इस मामले में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीबीआई (CBI) या प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग की है।
PMO ने मांगी रिपोर्ट: विवाद के तूल पकड़ने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इन आरोपों पर एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
संत समाज में आक्रोश: ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के घोषित उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास और अयोध्या के अन्य संतों ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार ट्रस्ट की मांग पर एसआईटी (SIT) गठन करने पर विचार कर रही है, वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) में दाखिल की गई इस जनहित याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई होने की संभावना है, जिसमें अदालत कैग (CAG) ऑडिट या सीबीआई जांच पर अपना रुख साफ कर सकती है।

राम मंदिर अयोध्या में रोज़ाना कितना दान आता है

22 जनवरी 2024 को मंदिर के उद्घाटन के बाद से अब तक 15 करोड़ श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं और मंदिर को 500 करोड़ रुपये से ज़्यादा का दान मिला है। इसमें से लगभग 150 करोड़ रुपये दान पेटियों से मिले, जबकि बाकी 350 करोड़ रुपये ऑनलाइन माध्यमों और काउंटरों से प्राप्त हुए। ट्रस्ट द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राम मंदिर को अभी अपनी दान पेटियों और काउंटरों के माध्यम से रोज़ाना 8 से 10 लाख रुपये का दान मिल रहा है। दान की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए छह बड़ी दान पेटियां लगाई गई हैं और परिसर के भीतर मौजूद अन्य मंदिरों में भी एक दर्जन और दान पेटियां रखी गई हैं। चार कलेक्शन काउंटर भी बनाए गए हैं, जहां श्रद्धालु अपनी इच्छा के अनुसार नकद दान कर सकते हैं और कंप्यूटर से बनी रसीद प्राप्त कर सकते हैं।