रामपुर जेल से रिहाई के कुछ मिनट बाद ED ने आज़म खान को जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया। इसी महीने कुछ दिन पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जेल में जाकर आज़म से मुलाकात की थी। उसके बाद उन पर कार्रवाई जारी है।
रामपुर जेल से 11 महीने बाद बाहर आए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया। बेटे अब्दुल्ला आज़म के साथ जेल से बाहर निकलते ही ED की टीम उन्हें अपने साथ ले गई। आज़म खान ने गिरफ्तारी के दौरान कहा कि कानून का अस्तित्व खत्म हो गया है और एक मुसलमान द्वारा विश्वविद्यालय और बच्चों के लिए स्कूल बनाने की सजा दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस घटनाक्रम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज़म खान को इलाहाबाद हाई कोर्ट से दो पैन कार्ड रखने के मामले में जमानत मिलने के बाद रिहाई मिली थी। लेकिन जेल के दरवाजे से बाहर निकलते ही उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के एक अलग मामले में ED ने गिरफ्तार कर लिया।
यह मामला रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ियों का है। ED रविवार को आज़म खान को गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश कर रिमांड की मांग करेगी।
जेल से बाहर आते ही ED की कार्रवाई
समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आज़म खान शनिवार, 31 अक्टूबर को रामपुर जिला जेल से रिहा हुए। उनके साथ उनके बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आज़म भी जेल से बाहर आए। दोनों पिता-पुत्र को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 29 अक्टूबर को दो पैन कार्ड रखने से जुड़े मामले में जमानत दी थी। अदालत ने उनकी सजा पर रोक लगाई थी, जिसके बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ।हालांकि, आज़म खान की रिहाई से पहले ही ED की टीम रामपुर जेल पहुंच गई थी। जेल के बाहर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। केंद्रीय सुरक्षा बलों और उत्तर प्रदेश पुलिस की मौजूदगी में आज़म खान जेल से बाहर आए। रिहाई के कुछ ही मिनट बाद ED अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस दौरान आज़म खान और ED अधिकारियों के बीच कुछ देर तक बहस भी हुई। उनके समर्थक जेल के बाहर नारेबाजी कर रहे थे। आज़म खान के बेटे अब्दुल्ला आजम रिहाई के बाद अपने घर चले गए, जबकि आज़म खान को ED की टीम अपने साथ ले गई। ED अधिकारियों के मुताबिक, आज़म खान को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया है। उन्हें रविवार को गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत में पेश किया जाएगा, जहां एजेंसी उनकी हिरासत की मांग करेगी।
‘कानून का अस्तित्व खत्म हो गया है’- जेल से बाहर निकलने के बाद आजम खान ने मीडिया से बातचीत में अपनी गिरफ्तारी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं बचा है। आजम खान ने कहा: “कहने को क्या है? क्या कहने को है? कहने को रहा क्या है? कानून का अस्तित्व खत्म हो गया है। क्या यह मुसलमान होने की सजा है? हमारी गलती यह है कि एक मुसलमान ने विश्वविद्यालय बनाया। यही हमारा गुनाह है। हमने बच्चों के लिए स्कूल बनाए। क्या यह हमारा गुनाह है?” आजम खान ने अपने हाथ उठाकर जेल के बाहर मौजूद समर्थकों का अभिवादन भी किया। उनकी गिरफ्तारी के बाद समाजवादी पार्टी और विपक्षी राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या है ED का मामला?
आजम खान के खिलाफ ED की जांच मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर से जुड़ी है। यह विश्वविद्यालय आजम खान द्वारा स्थापित मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के नियंत्रण में है। ED ने आजम खान और उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से दर्ज 58 FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी परियोजनाओं के लिए आवंटित धन और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में किया गया। ED का दावा है कि आजम खान ने उत्तर प्रदेश में शहरी विकास मंत्री और उत्तर प्रदेश जल निगम से जुड़े मंत्री के रूप में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कथित अनियमितताओं को अंजाम दिया। ED के मुताबिक, सरकारी परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री और धन को विश्वविद्यालय के निर्माण में लगाए जाने की आशंका है। जांच एजेंसी ने इस मामले में अगस्त में छापेमारी भी की थी और आजम खान से पूछताछ की थी।जौहर विश्वविद्यालय की 1,170 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क
ED ने 28 अक्टूबर को मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों को मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत कुर्क करने की कार्रवाई की घोषणा की थी। एजेंसी के मुताबिक, कुर्क की गई संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये है। ED का आरोप है कि सरकारी धन का कथित दुरुपयोग कर विश्वविद्यालय का निर्माण कराया गया। एजेंसी ने आजम खान पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने मंत्री पद और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके कथित वित्तीय अनियमितताओं को बढ़ावा दिया। रामपुर विकास प्राधिकरण ने जुलाई में विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को गिराने का आदेश भी दिया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की है। ED की जांच में विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च और उसके मूल्यांकन के बीच बड़ा अंतर सामने आने का दावा किया गया है।विश्वविद्यालय के खर्च में 416 करोड़ रुपये का कथित अंतर
ED की जांच के मुताबिक, विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। एजेंसी के अनुसार, आयकर विभाग की 10 नवंबर 2023 की मूल्यांकन रिपोर्ट में विश्वविद्यालय परिसर की इमारतों की निर्माण लागत करीब 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
इसके विपरीत, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के आयकर रिटर्न में वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 के बीच केवल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च घोषित किया गया। ED के मुताबिक, इन दोनों आंकड़ों के बीच करीब 416.14 करोड़ रुपये का अंतर है, जिसका स्रोत जांच एजेंसी के अनुसार स्पष्ट नहीं है। एजेंसी इस अंतर को कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच का महत्वपूर्ण आधार मान रही है। हालांकि, ये ED के आरोप और जांच के निष्कर्ष हैं, जिन्हें अदालत में साबित किया जाना बाकी है।दो पैन कार्ड मामले में मिली थी जमानत
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को जिस मामले में जेल से रिहाई मिली, वह दो पैन कार्ड रखने से जुड़ा है। इस मामले में भाजपा नेता और रामपुर विधायक आकाश सक्सेना ने 2019 में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम ने अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड बनवाए थे। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, दूसरे पैन कार्ड का इस्तेमाल अब्दुल्ला आजम को 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में चुनाव लड़ने के योग्य दिखाने के लिए किया गया था। रामपुर की अदालत ने नवंबर 2025 में आजम खान और अब्दुल्ला आजम को धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश के आरोपों में दोषी ठहराया था। दोनों को सजा सुनाए जाने के बाद जेल में रखा गया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 29 अक्टूबर को उनकी सजा पर रोक लगाते हुए जमानत दे दी। हालांकि, अदालत ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई। इसका अर्थ है कि दोषसिद्धि अभी भी कायम है और चुनाव लड़ने से संबंधित अयोग्यता पर इसका असर बना रहेगा।अखिलेश यादव ने बताया राजनीतिक प्रतिशोधः समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आजम खान के खिलाफ दर्ज मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार आजम खान को निशाना बना रही है और उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं। अखिलेश यादव ने 22 अक्टूबर को रामपुर जेल में आजम खान से मुलाकात भी की थी। आजम खान की रिहाई और उसके तुरंत बाद ED की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आजम खान का जेल में रहने का घटनाक्रम
आजम खान को पिछले कुछ वर्षों में कई बार जेल जाना पड़ा है।
- - 26 फरवरी 2020: आजम खान पहली बार जेल भेजे गए।
- - 20 मई 2022: सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद रिहा हुए।
- - 18 अक्टूबर 2023: दूसरी बार जेल गए।
- - 23 सितंबर 2025: दूसरी बार जेल से रिहा हुए।
- - 17 नवंबर 2025: तीसरी बार जेल भेजे गए।
- - 31 अक्टूबर 2026: करीब 11 महीने बाद रामपुर जेल से बाहर आए, लेकिन कुछ ही मिनट बाद ED ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया।
इस तरह आजम खान की जेल से रिहाई का घटनाक्रम एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।