कांग्रेस और सपा ने उत्तर प्रदेश में हाल की घटनाओं को लेकर बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला- बनारस में मणिकार्णिका घाट पर मूर्तियाँ तोड़ने और प्रयागराज में साधुओं के साथ मारपीट के आरोप लगाए हैं।
बनारस में मणिकार्णिका घाट और प्रयागराज में साधु पर कथित हमला
बनारस में मणिकार्णिका घाट पर तोड़फोड़ के बाद अब प्रयागराज में कथित तौर पर शंकराचार्य से बदसलूकी, साधु-संतों से धक्का-मुक्की व मारपीट के विवाद में बीजेपी सरकार फँस गई है। कथित तौर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शाही स्नान से रोका गया। साधु-संतों को बाल पकड़कर घसीटा गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि माघ मेले में 'शाही स्नान' की पुरानी परंपरा को आज तक न अंग्रेजों ने रोका, न मुगलों ने रोका, लेकिन अब रोक दिया गया। अखिलेश यादव ने भी बीजेपी सरकार को सभ्य व्यवहार करने की नसीहत दी।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेला चल रहा है। मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अपनी पालकी पर संगम तट पर शाही स्नान करने से रोक दिया गया। उनके शिष्यों और साधु-संतों के साथ पुलिस और प्रशासन की ओर से धक्का-मुक्की और मारपीट की शिकायतें आई हैं। इस घटना के बाद शंकराचार्य ने स्नान करने से मना कर दिया और धरना शुरू कर दिया, जो सोमवार को दूसरे दिन भी जारी है। इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है, जहां कांग्रेस और सपा नेता अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोला है।
क्या हुआ घटना के दिन?
माघ मेला हर साल गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर लगता है। लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं। मौनी अमावस्या को शाही स्नान की पुरानी परंपरा है, जिसमें साधु-संत विशेष तरीके से स्नान करते हैं। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी पर स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। आरोप है कि प्रशासन ने पैदल चलने का आदेश दिया, जिससे विवाद बढ़ गया। शंकराचार्य के शिष्यों का कहना है कि पुलिस ने उनके बाल पकड़कर घसीटा, मुक्के मारे और उन्हें चौकी में ले जाकर पीटा। एक वीडियो में साफ दिख रहा है कि साधुओं को खींचा जा रहा है और धक्का-मुक्की हो रही है।
मेरी हत्या की साजिश: शंकराचार्य
शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे 40 साल से यहां स्नान करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'पहले लोग उन्हें छूने और आशीर्वाद लेने के लिए टूट पड़ते थे, जिससे भगदड़ का ख़तरा रहता था। इसलिए पिछले दो साल से पालकी पर जाता था, ताकि लोग दूर से देख सकें। लेकिन इस बार मुझे रोका गया।' उन्होंने आरोप लगाया कि यह उनकी हत्या की साजिश है और पुलिस संतों पर अत्याचार कर रही है। शंकराचार्य ने प्रशासन पर शिष्यों से मारपीट का आरोप लगाया। घटना के बाद वे अनशन पर बैठ गए और उनका धरना जारी है।जूते से कुचला, बहुत मारा: एक साधु
एक बुजुर्ग साधु ने बुरी तरह पीटे जाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने एक पोस्ट में कहा, "'जूते से कुचला है, बहुत बुरी तरह मारा गया है। दोबारा मारते तो मर ही जाता।' - ये कहना है 85 साल के बुजुर्ग साधु का, जिन्हें बीजेपी सरकार की पुलिस ने बूटों तले रौंदा है। कल जब शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ दुर्व्यवहार किया गया, उस वक़्त इन साधु की भी पिटाई की गई। ये शर्मनाक है। नरेंद्र मोदी को माफी मांगनी चाहिए।"प्रशासन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से पालकी को रोका गया था, ताकि भीड़ में कोई हादसा न हो। हालाँकि, साधु-संतों की ओर से इसे परंपरा का अपमान बताया जा रहा है।
कांग्रेस और अखिलेश का हमला
इस घटना पर बीजेपी सरकार घिर गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि माघ मेले में 'शाही स्नान' की पुरानी परंपरा को रोका गया। कांग्रेस ने कहा, "बीजेपी सरकार में हर जगह 'कुव्यवस्था' का आलम है। माघ मेले में 'शाही स्नान' की परंपरा पुरानी है, जिसे आज तक न अंग्रेजों ने रोका, न मुगलों ने रोका। इस स्नान को उन्होंने रोका, जिसके नाम पर पिक्चर बनी थी- 'नमक हराम'। शाही स्नान करने से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी को एक ऐसी सरकार द्वारा रोक दिया गया, जो मोहन भागवत को Z+ सिक्योरिटी देती है। शंकराचार्य को उनकी पालकी पर नहीं जाने दिया गया। क्या मोहन भागवत शंकराचार्य से बड़े हो गए? Z+ सिक्योरिटी, 50 गाड़ियों का काफिला.. आखिर कौन हैं मोहन भागवत? महाकुंभ के दौरान बड़े-बड़े अमीर लोगों के लिए अलग व्यवस्था थी। सच्चाई ये है कि इनकी आस्था व्यापार है और व्यापार ही इनकी आस्था है। ये धर्म के पीछे छिपकर, सबको मूर्ख बनाते हैं और सिर्फ अमीरों का ध्यान रखते हैं। ये वो लोग हैं जो शंकराचार्य जी के शिष्यों को बाल खींचकर घसीटते हैं, जिसे देख मन में पीड़ा होती है। हम धर्म की राजनीति नहीं करते हैं और न ही इसे बर्दाश्त करेंगे। मौनी अमावस्या का शाही स्नान, एक अखंड परंपरा है। इसमें 'असुर' विध्न डालते हैं- यह इंसानों का काम नहीं है।"
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कांग्रेस ने आगे कहा, "शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी अनशन पर बैठे हैं, लेकिन सरकार में किसी को फर्क नहीं पड़ रहा है। कोई और सरकार होती तो शर्मसार हो चुकी होती। मोदी सरकार ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के खिलाफ पूरी ट्रोल आर्मी झोंक दी है, क्योंकि वे इनके सामने नतमस्तक नहीं होते। राजा के सामने संत नतमस्तक नहीं होते, संत के आगे राजा नतमस्तक होता है। ये जो शर्मनाक घटना हुई है, इसके खिलाफ प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करना चाहिए। वरना आप 'सनातनी' नहीं... 'धनातनी' ही थे और यही कहलाएंगे।"
पवन खेड़ा ने कहा, "हर धर्म, कर्म की बात करता है। हिन्दू धर्म में कर्म पर विशेष ध्यान दिया जाता है, लेकिन मोदी सरकार को अपने कर्म से डर नहीं है। ओडिशा में पुलिस स्टेशन के बाहर बीजेपी के लोग बैठ कर हनुमान चालीसा पढ़ते हुए मांग कर रहे थे कि जिसने मुसलमान को मारा है, उसे रिहा करो। उदयपुर में कन्हैया लाल जी की हत्या कर दी गई थी, उस समय मुख्यमंत्री रहे गहलोत साहब ने उनके दोनों बच्चों को नौकरी दिलवाई और केस एनआईए को सौंप दिया, लेकिन अभी तक कन्हैया लाल जी को न्याय नहीं मिला। ये ना काम के हैं, ना राम के। ये सिर्फ सत्ता और धन के हैं।"
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी का अपराध क्या है। वे आपकी जय-जयकार नहीं करते, निंदा करते हैं? आधे-अधूरे मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर आपत्ति जताते हैं? महाकुंभ की कुव्यवस्था पर सवाल उठाते हैं? कोविड के दौरान मां गंगा के आंचल में तैरती लाशों पर बात करते हैं? सच्चाई यही है- नरेंद्र मोदी न काम के हैं, न राम के हैं।
सपा नेता अखिलेश यादव ने भी बीजेपी सरकार को सभ्य व्यवहार करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं।
यह विवाद अभी ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है। शंकराचार्य का धरना जारी है और वे माफ़ी की मांग कर रहे हैं। विपक्षी दल इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
मणिकार्णिका घाट पर विवाद क्या?
मणिकार्णिका घाट पर विवाद मणिकर्णिका तीर्थ कॉरिडोर के पुनर्विकास- सौंदर्यीकरण कार्य के दौरान शुरू हुआ। विकास कार्य के दौरान कुछ पुरानी संरचनाओं को हटाने-तोड़ने का काम हुआ। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि कुछ प्राचीन मूर्तियाँ, मंदिर, अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं तोड़ी जा रही हैं। लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद वाराणसी जाकर स्थिति का जायजा लिया और कहा कि ये तस्वीरें व वीडियो पूरी तरह फर्जी और AI से बने हुए हैं। उनका दावा है कि कोई भी प्रमुख मंदिर या मूल मूर्तियां नहीं तोड़ी गईं। सिर्फ पुरानी, टूटी-फूटी और अनावश्यक संरचनाओं को हटाया जा रहा है। पुलिस ने एआई से बनी तस्वीर, वीडियो फैलाने का आरोप लगाते हुए 8 लोगों के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज की है।अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर कहा है, "भाजपाई शासन-प्रशासन पहले मिल बैठकर तय कर ले कि सच को छुपाने के लिए झूठा बयान क्या देना है, नहीं तो ‘दो-बयानी’ से झूठ की कलई खुल जाती है और जनता के बीच उनकी खिल्ली उड़ती है। साथ ही शासन-प्रशासन को नज़र चुरा कर बात करनी पड़ती है। भाजपाई शासन-प्रशासन, झूठ बोलने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बना ले।'
कांग्रेस ने कहा है कि बीजेपी सरकार में धार्मिक स्थलों पर हमले बढ़ रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, "पिछले हफ्ते वाराणसी में देवी अहिल्याबाई होलकर जी की मूर्ति तोड़ी गई। जिसके बाद यूपी के मुख्यमंत्री ने उन लोगों पर एफ़आईआर करवा दिया, जिसने इसका खुलासा किया। मुख्यमंत्री ने कहा- यह वीडियो AI है। लेकिन मुख्यमंत्री जी- यह AI नहीं 'बेहयाई' है।"