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मायावती बोलीं- बाहुबली, माफिया को टिकट नहीं, मुख्तार अंसारी दरकिनार

मायावती इस बार जेल में बंद विधायक मुख्तार अंसारी को टिकट नहीं देंगी। उन्होंने इसकी घोषणा शुक्रवार को की। उन्होंने कहा है कि बीएसपी की इस बार कोशिश होगी कि बाहुबली और माफिया को टिकट नहीं मिले। मायावती ने यह भी साफ़ कर दिया कि इसी वजह से आगामी विधानसभा चुनाव में मौजूदा विधायक मुख्तार अंसारी की जगह मऊ से बीएसपी के राज्य अध्यक्ष भीम राजभर को उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया गया है। 

इस मामले में मायावती ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए।

बीएसपी प्रमुख मायावती ने एक ट्वीट में कहा है, 'जनता की कसौटी व उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के प्रयासों के तहत ही लिए गए इस निर्णय के फलस्वरूप पार्टी प्रभारियों से अपील है कि वे पार्टी उम्मीदवारों का चयन करते समय इस बात का खास ध्यान रखें ताकि सरकार बनने पर ऐसे तत्वों के विरूद्ध सख़्त कार्रवाई करने में कोई भी दिक्कत न हो।'

राजभर 2012 के विधानसभा चुनावों के दौरान इसी सीट पर अंसारी से चुनाव हार गए थे। अंसारी की पहली चुनावी जीत 1996 के चुनावों में मऊ से बसपा उम्मीदवार के रूप में हुई थी। तब से लेकर अब तक उन्होंने कई चुनाव जीते हैं। यहाँ तक ​​कि वह जेल से भी चुनाव जीत चुके हैं। 

1996 के बाद अगले दो विधानसभा चुनावों- 2002 और 2007 में अंसारी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी। 2009 के लोकसभा चुनावों से पहले अंसारी फिर से बसपा में शामिल हो गए थे। लेकिन पार्टी ने उन्हें वाराणसी से मैदान में उतारा, जहाँ वह बीजेपी के दिग्गज मुरली मनोहर जोशी से हार गए।

बाद में अप्रैल 2010 में मायावती ने आपराधिक गतिविधियों में कथित संलिप्तता का हवाला देते हुए मुख्तार को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। 

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अब ताज़ा रिपोर्टों से लगता है कि मुख्तार अंसारी को बीएसपी से बाहर भी किया जा सकता है। माना जा रहा है कि सत्तारूढ़ बीजेपी और योगी आदित्यनाथ को बाहुबली और अपराधियों की पार्टी बताकर हमले करने से रोकने के लिए मायावती ने यह क़दम उठाया है। मुख्तार अंसारी ने पिछले यूपी चुनाव से पहले 2017 में 7 साल बाद बीएसपी में फिर से वापसी की थी। बीएसपी में शामिल होने से पहले अंसारी की समाजवादी पार्टी के साथ बातचीत चल रही थी, लेकिन वह विफल हो गई थी। 

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बता दें कि मुख्तार अंसारी पर हत्या और अपहरण सहित 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। पंद्रह मामलों की सुनवाई चल रही है। वह 2005 से विभिन्न आरोपों में यूपी की जेलों में बंद हैं। इस साल की शुरुआत में उन्हें पंजाब से यूपी की जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है जहाँ उन्हें जबरन वसूली के आरोप में जेल में रखा गया था।

2017 में योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आने के बाद मुख्तार अंसारी के नेटवर्क के ख़िलाफ़ कार्रवाई तेज की गई। उनके कई साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और कुछ पुलिस मुठभेड़ में मारे गए।

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