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नागरिकता क़ानून: यूपी में नाबालिगों को जेल भेजा, बंदूक़ की गोली भी लगी

नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन और हिंसा में उत्तर प्रदेश में जिन हज़ारों लोगों को गिरफ़्तार किया गया, हिरासत में लिया गया, जो घायल हुए हैं और जिन्हें नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें से कई नाबालिग हैं। इन नाबालिगों में अधिकतर स्कूली छात्र हैं। हालाँकि पुलिस ने गिरफ़्तार लोगों में नाबालिग के होने से साफ़ तौर पर इनकार किया है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ पिछले हफ़्ते शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन और इस दौरान हुई हिंसा में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई है। राज्य की पुलिस ने गुरुवार को ही कहा है कि इसमें 327 केसों में 1113 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। इसके साथ ही 5558 लोगों को हिरासत में लिया गया है। गिरफ़्तार किए गए लोगों में सामाजिक कार्यकर्ता और कांग्रेस कार्यकर्ता सदफ जफर, रिहाई मंच के रिटायर्ड आईपीएस अफ़सर एस. आर. दारापुरी, वकील मुहम्मद शुएब व रॉबिन वर्मा, थियेटर कलाकार दीपक कबीर, पवन राव आंबेडकर आदि शामिल हैं। सार्वजनिक संपत्ति के नुक़सान पर वसूली के लिए अब तक 372 लोगों के ख़िलाफ़ नोटिस जारी किए गए हैं।

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संभल में जिन 42 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है उनमें से दो लोगों के परिवार वालों ने दावा किया है कि उनके बच्चे 16 और 17 साल के थे। इन दोनों को पिछले गुरुवार को गिरफ़्तार किया गया था। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार इसमें के एक बच्चे के आधार कार्ड पर जन्म तिथि 2003 दर्ज है। 

हालाँकि पुलिस दावा करती रही है कि किसी भी नाबालिग को नहीं पकड़ा गया है, दो परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनके बच्चे बरेली जेल में एक हफ़्ते से बंद हैं। बता दें कि पिछले गुरुवार को संभल में विरोध-प्रदर्शन हिंसात्मक हो गया था और इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी।

मुज़फ़्फ़रनगर में भी ऐसे मामले पाए गए। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम तीन घायल नाबालिग थे। उनमें से एक 16 साल का था। रिपोर्ट के अनुसार, उसने दावा किया कि 20 दिसंबर को घुटने से ऊपर 'पुलिस ने गोली मारी'। कपड़े की दुकान में काम करने वाले उस नाबालिग ने कहा कि दुकान मालिक ने कहा था कि यदि वह हिंसा के कारण रास्ते में फँसा है तो घर लौट जाए। 

पाँचवीं कक्षा में पढ़ने वाले 12 साल का छात्र और मदरसा में पढ़ने वाले 14 साल के एक नाबालिग ने कहा कि उन्हें पुलिस द्वारा पीटा गया। दोनों ने दावा किया कि उनका प्रदर्शन से कोई लेनादेना नहीं था। 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने रिपोर्ट में लिखा है कि 14 साल के नाबालिग ने कहा कि उसे तब पकड़ा गया था जब वह अपने दोस्तों के साथ मदरसा से लौट रहा था और 'थाने में छह पुलिसकर्मियों द्वारा उसे पीटा गया'।

संभल के दो मामलों में, परिवारों ने दावा किया कि उन्हें एफ़आईआर की एक प्रति भी नहीं दी गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दोनों लड़कों को पिछले एक हफ़्ते में चार अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया।

'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों मामलों में इस डर से कि परिवार के दूसरे पुरुषों को झूठे केस में न फँसा दिया जाए, दोनों को छुड़ाने के लिए उनके अपने-अपने घरों की महिलाएँ लड़ाई लड़ रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा आठवीं में पढ़ने वाले 16 वर्षीय नाबालिग पिछले गुरुवार को ट्यूशन से लौटने के बाद पास की दुकान से दूध खरीदने के लिए शाम क़रीब 7.30 बजे घर से निकला था, लेकिन उसके बाद से वह लापता हो गया। संभल में राजमिस्त्री का काम करने वाले नाबालिग के पिता ने कहा, ‘हमने तीन घंटे तक उसकी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं लगा सके।’

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नाबालिग के भाई ने कहा, ‘पाँच दिन बाद उसका नाम एक अख़बार की रिपोर्ट में दिखाई दिया, जिसमें कहा गया था कि उसे बरेली जेल भेज दिया गया है।’

'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार संभल के एसपी यमुना प्रसाद ने दावा किया कि प्रदर्शन के संदर्भ में 42 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और उसमें कोई नाबालिग नहीं है। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि वह फिर भी इसकी जाँच करेंगे कि कोई नाबालिग तो नहीं है, और ऐसा पाए जाने पर उन्हें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के पास भेज दिया जाएगा।

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