अयोध्या राम मंदिर चंदे में हेराफेरी विवाद में एसआईटी रिपोर्ट, एफ़आईआर दर्ज होने और 8 आरोपियों की गरिफ़्तारी के बाद एएनआई के अनुसार अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने पद छोड़ दिया है।
अयोध्या राम मंदिर में चंदे और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी मामले में आख़िरकार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। एएनआई ने यह रिपोर्ट दी है। ये इस्तीफ़े तब हुए हैं जब राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे में हेराफेरी विवाद पर एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद एफ़आईआर दर्ज हुई और इस मामले में 8 आरोपियों को गरिफ़्तार किया गया। रिपोर्ट है कि एसआईटी की शुरुआती जांच में दान राशि के प्रबंधन में कई गंभीर खामियों की ओर संकेत किया गया है।
चंदे में कथित गड़बड़ी को लेकर कार्रवाई किए जाने का भारी दबाव था। भक्तों में इसको लेकर काफी ग़ुस्सा है। इसको लेकर विपक्षी दलों का भी सरकार पर चौतरफा दबाव था। और इतना होने के बाद दो इस्तीफे हुए। मीडिया में सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट है कि उन्होंने 'नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने-अपने पदों से इस्तीफा दिया है'। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि 'ट्रस्ट के दोनों वरिष्ठ पदाधिकारियों ने जांच पूरी होने तक संगठन की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पद छोड़ने का फैसला किया है'।
एसआईटी जांच के बाद बढ़ा दबाव
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। जांच का उद्देश्य मंदिर में आने वाले नकद दान, सोना-चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं के संग्रह, सुरक्षा, लेखा-जोखा और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया की जांच करना था। इंडिया टूडे ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में कई प्रशासनिक और प्रक्रियागत कमियां सामने आई हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती जांच में पाया गया कि कर्मचारियों के सत्यापन की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। संवेदनशील क्षेत्रों में आने-जाने वालों की निगरानी कमजोर थी। सीसीटीवी निगरानी में कई खामियां थीं। मंदिर से ट्रस्ट कार्यालय और वहां से बैंक तक दान राशि पहुंचाने की प्रक्रिया में अनियमितताएं मिलीं। दान की गिनती और बैंकिंग व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। हालाँकि, अभी तक एसआईटी की रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आई है।
पहली FIR दर्ज, आठ आरोपी गिरफ्तार
रिपोर्टों में कहा गया है कि एसआईटी की सिफारिश के आधार पर इस मामले में पहली एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई, जिन्हें सितंबर 2025 में पूर्व ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद ट्रस्ट में शामिल किया गया था।
एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही घंटों बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने नामजद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति छिपाना, आपराधिक साजिश और साझा आपराधिक मंशा के तहत अपराध जैसे प्रमुख आरोप हैं।सोना-चांदी के रिकॉर्ड भी जाँच के दायरे में
एसआईटी केवल नकद दान की ही नहीं, बल्कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोना, चांदी, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड की भी जाँच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, इन वस्तुओं के स्टॉक और दस्तावेजों में भी कुछ विसंगतियाँ मिलने के बाद उनकी अलग से जांच की जा रही है।
अखिलेश ने उठाया मुद्दा
सबसे पहले राजनीतिक स्तर पर इस मामले को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उठाया था। इसके बाद यह मामला देश भर में सुर्खियों में आया। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दान राशि में कथित गड़बड़ी की खबरों का हवाला देते हुए न्यायिक जांच की मांग की थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कार्रवाई केवल निचले स्तर के लोगों तक सीमित रहेगी या वरिष्ठ जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच होगी।
अखिलेश की आवाज उठाने के बाद बवाल मचा तो बीजेपी के कुछ लोगों ने भी इस मांग का समर्थन किया। बीजेपी कार्यकर्ता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। उन्होंने इंडिया टुडे से कहा कि केवल इस्तीफा देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और एसआईटी की जांच पर भरोसा है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होनी चाहिए।
अब योगी आदित्यनाथ क्या बोले?
विपक्षियों के निशाने पर चौतरफ़ा घिरे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब इस मुद्दे पर जोर-शोर से बोला है। देवरिया में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि राम मंदिर और अयोध्या से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट मिलते ही सरकार ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। अयोध्या की गरिमा और श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बहरहाल, एसआईटी की जांच जारी है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और दान की पूरी व्यवस्था, बैंक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज तथा ट्रस्ट की प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी जांच की जा रही है। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को इस पूरे विवाद में अब तक का सबसे बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। हालाँकि यह देखना बाकी है कि अंतिम जांच रिपोर्ट में किस स्तर तक जिम्मेदारी तय होती है और आगे क्या कार्रवाई होती है।