विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 का दुरुपयोग होने के आरोप लगातार बढ़ रहे हैं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ बीजेपी मुस्लिम और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को टारगेट कर रही है। पिछले दो दिनों में एक्स पर ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां लोग सबूतों के साथ दावा कर रहे हैं कि उनके नाम फॉर्म 7 के जरिए झूठी शिकायत कर बेवजह उड़ा दिए गए हैं। कुछ मामलों में बीजेपी नेताओं के नाम सीधे सामने आए, जो ब्लॉक लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को फॉर्म 7 के बंडल सौंपकर मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटवा रहे हैं। समाजवादी पार्टी (एसपी) अध्यक्ष अखिलेश यादव प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसे मतदाताओं ने सामने आकर खुलकर आरोप लगाए हैं।
चंदौली जिले के पांच गांवों से प्राप्त फॉर्म 7 के दस्तावेजों से पता चलता है कि छह बीएलओ को 84 मुस्लिम नामों को हटाने की मांग वाले आवेदन मिले थे। इनमें से कई आवेदन जाली थे, जहां आवेदक के विवरण गलत थे। एक बीएलओ अंजना देवी ने बताया कि उन्हें एक लिफाफे में सात मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के फॉर्म मिले, जो पहले ही एसआईआर प्रक्रिया में सत्यापित हो चुके थे। इटावा जिले में बीएलओ अश्विनी कुमार पर बीजेपी नेताओं ने दबाव डाला कि वे मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाएं, और इनकार करने पर उन्हें धमकी और मारपीट का सामना करना पड़ा। 
कांग्रेस ने चुनाव आयोग को शिकायत की है कि बीजेपी फॉर्म 7 का इस्तेमाल करके एसआईआर वाले राज्यों में लाखों मतदाताओं को हटा रही है, खासकर एससी, एसटी, अल्पसंख्यक और वरिष्ठ नागरिकों को। उत्तर प्रदेश में ये आरोप चंदौली, सीतापुर, कन्नौज और मेरठ जैसे जिलों से उभरे हैं, जहां मुस्लिम बहुल इलाकों को टारगेट किया गया है।
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समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग पर बीजेपी के साथ सांठगांठ का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग बीजेपी के साथ मिलकर फॉर्म 7 के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) मतदाताओं के नाम हटा रहा है। उन्होंने कुछ फॉर्म दिखाते हुए कहा, "लोकतंत्र में वोटिंग सबसे बड़ा अधिकार है, लेकिन चुनाव आयोग बीजेपी के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश में पीडीए मतदाताओं के नाम फॉर्म 7 से हटा रहा है।" यादव सुल्तानपुर के नंदलाल को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेश किया। अखिलेश ने सीतापुर का उदाहरण दिया, जहां मुस्लिम मतदाताओं के खिलाफ जाली फॉर्म 7 जमा किए गए, और एक गरीब मजदूर का नाम बिना हस्ताक्षर के इस्तेमाल किया गया। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी एक करोड़ से ज्यादा वोट हटाने की साजिश रच रही है।
अखिलेश ने एक अन्य वीडियो पोस्ट में फॉर्म 7 की धांधली का सबूत साझा किया, जहां एक एसपी नेता ने गांववालों से बातचीत की और दिखाया कि एक व्यक्ति के नाम पर बिना सहमति के दो मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की शिकायत दर्ज की गई थी, जबकि शिकायतकर्ता ने इनकार किया। वीडियो में नेता कहते हैं, "बीजेपी अधिकारी एक-दूसरे को लड़ा रहे हैं, लेकिन नंदलाल ने कोई शिकायत नहीं की।"
पिछले दो दिनों में एक्स पर फॉर्म 7 से जुड़े वीडियो की बाढ़ आई है। एक वायरल वीडियो में मेरठ के बड़ा गांव से बीजेपी कार्यकर्ता मनवीर और उनके बेटे आकाश ने 200 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 दाखिल किया, दावा किया कि वे मृत हैं। जांच में सभी जिंदा पाए गए, और 99% मुस्लिम थे। वीडियो में ग्रामीण कागज दिखाते हुए विरोध करते नजर आते हैं, और भीड़ में बहस होती है। एक अन्य वीडियो में चंदौली से 86 मुस्लिम नामों को हटाने की कोशिश दिखाई गई, जहां बीएलओ पुजारी प्रसाद यादव ने मीडिया से कहा कि सभी मतदाता जिंदा और मौजूद हैं, और फॉर्म धर्मेंद्र मौर्य द्वारा दिए गए थे। उन्होंने कहा, "एक भी हिंदू नाम नहीं, सभी मुस्लिम हैं।"
फतेहपुर से एक वीडियो में बीजेपी नेता ने 72 नाम हटवाए, जिससे प्रभावित लोग दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। ये वीडियो बताते हैं कि फॉर्म 7 का इस्तेमाल मतदाता दमन के लिए हो रहा है, और एक्स पर हजारों लाइक्स और शेयर हो चुके हैं।
पत्रकार अजीत अंजुम सोमवार को मेरठ के एक गांव में पहुंचे जहां फॉर्म 7 से मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। ऐसे दो दर्जन से ज्यादा मतदाताओं से बात की, जिनके नाम फॉर्म 7 के जरिए हटा दिए गए थे। अजीत अंजुम की ग्राउंड रिपोर्टिंग से पता चलता है मेरठ में उन्होंने जिन प्रभावित मतदाताओं से बात की, वे ज्यादातर मुस्लिम नाम थे। उन्होंने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

चुनाव आयोग की चुप्पी

सोशल मीडिया पर फॉर्म 7 के जरिए नाम कटवाने वाले वीडियो वायरल हैं। लेकिन चुनाव आयोग इस पर स्थिति साफ नहीं कर रहा है। हालांकि उसने हाल ही में एसआईआर प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। ऐसा यूपी के संदर्भ में खासतौर पर किया गया। ये आरोप लोकतंत्र की बुनियाद पर सवाल उठाते हैं। चुनाव आयोग को पारदर्शी जांच करनी चाहिए ताकि कोई मतदाता वंचित न हो। विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं, जबकि बीजेपी ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है।