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मुज़फ्फरनगर में किसान महापंचायत, जुटे हज़ारों लोग

किसान नेता राकेश टिकैत के भावुक होने वाले वीडियो के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन जोर पकड़ रहा है। शुक्रवार को मुज़फ्फरनगर में हुई किसान महापंचायत में हज़ारों की संख्या में लोग जुटे और आंदोलन को जारी रखने का फ़ैसला लिया। 

किसानों को हटाने के लिए जैसे ही उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरूवार शाम को ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर फ़ोर्स लगाई तो किसान नेता राकेश टिकैत इसके विरोध में खड़े हो गए। टिकैत ने कहा कि किसानों को मारने की साज़िश हो रही है और इस दौरान उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। टिकैत के भावुक होने का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इतना जबरदस्त असर हुआ कि 24 घंटे से कम वक़्त में ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर हज़ारों की संख्या में किसान इकट्ठा हो गए। 

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महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे और किसानों के साथ अगर ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर कोई घटना होती है तो उसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार होगी। 

विपक्षी दलों का मिला साथ 

इस महापंचायत को विपक्षी दलों का भी साथ मिला है। महापंचायत में पहुंचे राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने कहा कि किसानों की मांगें सही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार दो महीने के बाद भी किसानों की मांग नहीं मान रही है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी महापंचायत में पहुंचे। इसके अलावा भी कुछ अन्य दलों ने इस महापंचायत में पहुंचकर किसानों के प्रति समर्थन व्यक्त किया। 

किसान आंदोलन पर देखिए वीडियो- 

किसान महापंचायत में पहुंचे लोगों ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के समर्थन में नारेबाज़ी की। 

राकेश टिकैत का भावुक होने वाला वीडियो वायरल होने के बाद ग़ाज़ियाबाद के गांवों से लेकर बाग़पत, बड़ौत, मुज़फ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बिजनौर तक में किसान एकजुट होने लगे थे। इसके बाद रात में ही कई गांवों में पंचायत हुई थी और किसान कई गांवों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लेकर ग़ाज़ीपुर बॉर्डर के लिए निकल पड़े थे।

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सिंघु बॉर्डर पर बवाल 

उधर, कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों के ख़िलाफ़ स्थानीय लोग उग्र हो गए हैं। शुक्रवार को नरेला और बवाना के आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग सिंघु बॉर्डर पर पहुंचे और बॉर्डर को खाली कराने की मांग की। 

हालात उस वक़्त तनावपूर्ण हो गए जब दोनों ओर से पत्थर चलने लगे। यानी किसान आंदोलनकारी और स्थानीय लोग आमने-सामने आ गए। पुलिस ने हालात को संभालते हुए स्थानीय लोगों पर लाठीचार्ज कर दिया, इसके बाद वे पीछे हटे। पत्थरबाज़ी में कुछ लोग और पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। एसएचओ, अलीपुर पर हमला किया गया है। दोनों ओर से जमकर नारेबाज़ी भी हुई। पुलिसकर्मियों ने स्थानीय लोगों को दूर तक खदेड़ दिया। 

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