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लखीमपुर: ‘थार भैया के साथ थी’, बताने वाला शख़्स कहां ग़ायब हो गया?

लखीमपुर खीरी में किसानों के साथ हुई अमानवीय घटना के बाद सामने आए एक वीडियो में जिस शख़्स ने बताया था कि ‘थार भैया के साथ थी’, वह ग़ायब हो गया है। यह वही थार गाड़ी है जिसने किसानों को बुरी तरह रौंद दिया था और यह गाड़ी केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के परिवार के नाम पर है। 

आशीष मिश्रा के समर्थक इस शख़्स का नाम शेखर भारती है। शेखर भारती का जो वीडियो सामने आया था, उसमें एक पुलिसकर्मी उससे पूछता है कि वह वहां क्या कर रहा था, तो वह जवाब देता है, “मैं पीछे की सीट पर बैठा था। कार लोगों को कुचलते हुए आगे बढ़ रही थी। थार गाड़ी भैया के साथ थी।”

हालांकि यह साफ नहीं है कि इसमें भैया किसके लिए कहा गया। लेकिन बताया जाता है कि अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा के समर्थक उन्हें 'भैया' कहकर ही बुलाते हैं। 

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किसान नेताओं का कहना है कि उन्होंने शेखर भारती को पुलिस के हवाले किया था, अब वह कैसे भाग गया। एक दूसरे वीडियो में शेखर भारती यह भी कहता है कि वह लखनऊ का रहने वाला है और कार में बैठा था। 

किसान नेताओं का कहना है कि दो वीडियो सामने आए थे, जिनसे साफ पता चला था कि शेखर भारती को पकड़ लिया गया है। 

जो पुलिसकर्मी शेखर भारती से पूछताछ कर रहा था, उसकी पहचान सर्किल अफ़सर संजय नाथ तिवारी के रूप में हुई थी। जब टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने तिवारी से पूछा कि क्या वही शेखर भारती से पूछताछ कर रहे थे तो उन्होंने कहा कि हां, वही थे। उन्होंने कहा कि वह इससे ज़्यादा कुछ नहीं बता सकते क्योंकि यह जांच का हिस्सा है। 

जबकि एडीजी (लखनऊ ज़ोन) एसएन साबत का कहना है कि शेखर भारती कहां है, इस बारे में केवल एसआईटी ही कोई टिप्पणी कर सकती है। 

कहां गया शेखर भारती?

पुलिस का कहना है कि वह उसे ढूंढ रही है और उससे पूछताछ करेगी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि शेखर भारती कहां चला गया है। शेखर भारती का यह कहना कि ‘थार भैया के साथ थी’, इस मामले में बहुत बड़ा सबूत है। क्योंकि पुलिस इसी बात की जांच कर रही है कि घटना के वक़्त क्या आशीष मिश्रा थार गाड़ी में मौजूद थे। 

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अजय मिश्रा टेनी का लगातार कहना है कि घटना के दौरान आशीष मिश्रा गाड़ी में मौजूद नहीं था। आशीष मिश्रा ने भी यही कहा है। 

किसानों को थार ने कुचला है, यह साफ हो गया है और ‘थार भैया के साथ थी’ यह बात कहने वाला पुलिस को सौंपे जाने के बावजूद ग़ायब हो गया है, यह पुलिस के कामकाज पर बेहद गंभीर सवाल है। 

अगर पुलिस के काम करने का यही ढंग रहा तो इस घटना का सच कभी सामने नहीं आ पाएगा। 

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