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वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट।

ऐसी नफ़रत! बच्चा पानी पीने मंदिर में घुसा तो बेरहमी से पीटा

पानी पीने के लिए बच्चे की बेरहमी से पिटाई! आख़िर ऐसा क्या हो गया था? 14 साल का बच्चा प्यासा था। नल दिखा तो पानी पीने चला गया। शायद वह उस मंदिर को नहीं देख पाया जो उस बच्चे के धर्म से जुड़ा नहीं था। उसकी पिटाई हो गई। अब उस पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक युवक एक बच्चे से उसका और उसके पिता का नाम पूछता है। बच्चा नाम बताता है जिससे लगता है कि वह मुसलिम धर्म से है। फिर युवक पूछता है कि वह मंदिर में क्या करने आया था। बच्चा कहता है कि वह पानी पीने आया था। इसके बाद युवक उस बच्चे को बेरहमी से पिटने लगता है। उसके बाद कथित तौर पर आरोपी युवक ने ही वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल किया।

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वीडियो के वायरल होने के बाद ग़ाज़ियाबाद पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया और दो लोगों को गिरफ़्तार किया है। इसमें से मुख्य आरोपी शृंगी नंदन यादव है और उसका दूसरा साथी शिवानंद। पुलिस ने कहा है कि दोनों के ख़िलाफ़ शांति भंग करने के इरादे से अपमान), हमला, सार्वजनिक दुराचार वाला बयान के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने जबर्दस्त प्रतिक्रिया दी है। लोगों ने अपने ट्वीट के साथ उस बच्चे से माफ़ी मांगने वाला हैशटैग जोड़ा है। पत्रकार रोहिणी सिंह ने लिखा कि 'पानी पीने के लिए एक बच्चे को पीटना कितना अमानवीय है? एक आदमी इतनी नफ़रतों से भरा है कि वह आधारभूत मानवीयता के प्रति भी अंधा है और उसे भगवान के प्रति भी प्रेम नहीं हो सकता।'

कविता कृष्णन ने लिखा है, 'एक प्यासे बच्चे को एक मंदिर में पीने के पानी के लिए शृंगी यादव नामक एक व्यक्ति ने पीटा - क्योंकि उसका नाम... उसे मुसलिम के रूप में पहचान दिलाता था। सांप्रदायिक छुआछूत - बहुत हद तक उस तरह ही है जिस तरह की जातिगत छुआछूत प्रथा, जहाँ सामुदायिक जल स्रोतों का उपयोग करने के लिए दलितों की पिटाई की जाती है।'

आरफा खानम शेरवानी ने ट्वीट किया है, 'मैं एक ऐसे भारत का सपना देखती हूँ जहाँ पानी पाने के लिए मंदिर जाने के लिए पीटे जा रहे एक मुसलिम बच्चे की प्रतिक्रिया में उन सभी के लिए मसजिदें खोली जाएँ जिन्हें पानी या भोजन की ज़रूरत है (चाहे वे किसी भी धर्म के हों)। मुझे इस नफरत और अंधेरे से लड़ने का कोई अन्य तरीक़ा नहीं पता है।'

14 वर्षीय बच्चे को पिटने की घटना गुरुवार की बताई जाती है। पुलिस का कहना है कि जैसे ही यह मामला सामने आया आरोपियों की गिरफ़्तारी हुई।

रिपोर्ट के अनुसार आरोपी मंदिर में ही कुछ महीनों से सेवा कार्य में जुटे थे। पुलिस के अनुसार आरोपी शृंग नंदन यादव बिहार से है और वह ग़ाज़ियाबाद में पिछले छह महीने से रह रहा था। ग़ाज़ियाबाद में वह डासना देवी मंदिर में 'सेवा' कर रहा था और ख़ुद को मंदिर के केयरटेकर यति नरसिंहानंद सरस्वती के शिष्य के रूप में पहचानता है।

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'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार मंदिर के एक स्वयंसेवक ने कहा, 'दूसरे कई लोगों की तरह शृंगी घंटों मंदिर में रहते हैं। प्रसाद बांटने से लेकर अनुष्ठान के आयोजन तक में वे सहयोग करते हैं।' उन्होंने कहा कि मंदिर के बाहर निर्देश के बावजूद मुसलिम लड़का मंदिर में घुसा था। 

बता दें कि जिस मंदिर में यह घटना हुई है उसके बाहर लिखा हुआ है- 'ये मंदिर हिंदुओं का पवित्र स्थल है, यहाँ मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है। नरसिंहानंद सरस्वती की आज्ञा से।'

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शृंगी नंदन यादव के सोशल मीडिया पेज पर नफ़रत फैलाने वाली पोस्टें हैं। उसमें उसकी ऐसी तसवीरें हैं जिसमें वह चाकू, बंदूक़ें और दूसरे हथियार लिए दिख सकता है। उसने कुछ ऐसे भड़काऊ बयान भी शेयर किए हैं जो कथित तौर पर नरसिंहानंद सरस्वती के हैं। 

मंदिर प्रबंधन समिति के अनिल यादव ने कहा कि वे क़ानूनी सहायता से शृंगी यादव की मदद करेंगे। उन्होंने कहा, 'शृंगी एक इंजीनियर है जिसकी कोरोना के दौरान नौकरी चली गई। उसने हमारे वीडियो देखे और हमारे आईटी सेल का प्रबंधन करके मंदिर में हमारी मदद करने का फ़ैसला किया। वह एक अच्छा व्यक्ति है; हम यह सुनिश्चित करेंगे कि वह रिहा हो।'

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