loader
दिलशाद नामक इस छात्र की पिटाई से मौत हो गई

यूपी में घड़ी चोरी के आरोप में मुस्लिम छात्र की कथित पिटाई से मौत

कन्नौज के छिबरामऊ कथित तौर पर छात्र की पिटाई से मौत हो गई। इस मामले में कॉलेज टीचर पर आरोप लगा लेकिन कन्नौज पुलिस ने इस बात से इनकार किया कि पिटाई से छात्र की मौत हुई है। छात्र के परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है।

जानकारी के मुताबिक छिबरामऊ में आर एस इंटर कॉलेज में शिव कुमार नामक टीचर की घड़ी गायब हो गई। इस पर टीचर ने छात्रों से पूछताछ शुरू कर दी। इसी क्रम में 9वीं क्लास के छात्र दिलशाद को भी शिवकुमार ने पूछताछ के लिए बुलाया। 

ताजा ख़बरें

दिलशाद के परिवार का आरोप है कि टीचर शिव कुमार एक बंद कमरे में छात्रों से पूछताछ कर रहे थे। दिलशाद जब वहां पहुंचा तो शिव कुमार ने दिलशाद को बर्बरता से पीटा। दिलशाद के साथी छात्रों ने परिवार को बताया था कि कमरे से दिलशाद के रोने-चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं लेकिन शिव कुमार पर इतना गुस्सा सवार था कि वो काफी देर तक दिलशाद को पीटते रहे। घर आने पर दिलशाद की मौत हो गई।

दिलशाद के पिता दिव्यांग हैं और मजदूरी करके परिवार को पालते हैं। दिलशाद के पिता का मीडिया के सामने बयान है कि टीचर शिवकुमार, प्रभाकर व विवेक ने घड़ी चोर बताकर बहुत पिटाई की। 

इस घटना के संबंध में एसपी कन्नौज का पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहना है कि थाना छिबरामऊ क्षेत्र में हुई बच्चे की मृत्यु का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्रॉनिक लंग डिसीज़ पाया गया है। बच्चे के शरीर में किसी भी प्रकार के चोट के निशान नही पाए गए है। पिटाई व मारपीट से मृत्यु का आरोप असत्य है।

बहरहाल, दिलशाद के परिवार ने पुलिस की कहानी को सच मानने से इनकार कर दिया है। परिवार का कहना है कि स्कूल के बाकी बच्चे झूठ नहीं बोल रहे हैं। बाकी बच्चों ने जो जानकारी बन रही है, उसमें इन्हीं तीन टीचरों का नाम आया है। जिसमें शिव कुमार मुख्य है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से करना संभव नहीं है। कॉलेज प्रशासन और पुलिस इस मामले में पिटाई के आरोप से ही इनकार कर रहे हैं। अगर दिलशाद की मौत पिटाई से नहीं भी हुई है तो भी परिजनों के आरोप के आधार पर जांच और एफआईआर बनती है लेकिन गरीब परिवार होने की वजह से इन लोगों की कोई सुनवाई कहीं भी नहीं हो रही है।

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

उत्तर प्रदेश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें