उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक बार फिर धार्मिक स्थल से जुड़ा विवाद सुर्खियों में है। कसेरुआ गांव में स्थित एक मस्जिद की जमीन पर तहसील रिकॉर्ड में कब्रिस्तान दर्ज होने का खुलासा हुआ है। सर्वे में पाया गया कि वो ज़मीन कब्रिस्तान के लिए आरक्षित थी, लेकिन वहां बनाई गई। 

संभल तहसील के लेखपाल खबर हुसैन ने इसकी शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मस्जिद की प्रबंधन समिति के सात सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी हैं- जाकिर हुसैन, तसलीम, भूरे अली, शरफुद्दीन, दिल शरीफ, मोहब्बद अली और नन्हे। इस मस्जिद को तोड़े जाने की आशंका है। यूपी में कई मस्जिदों और दरगाहों को मामूली शिकायत पर बुलडोज़र से गिराया जा चुका है। इस विवाद के सामने आने के बाद गांव वाले आशंका में हैं कि मस्जिद को गिराया जा सकता है।

राजस्व विभाग की पैमाइश और सर्वे में खुलासा हुआ कि गाटा संख्या संबंधित भूमि कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है, लेकिन उस पर मस्जिद का निर्माण किया गया। मस्जिद को 19 जून 2023 को उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में पंजीकृत कराया गया था। आरोप है कि प्रबंधन समिति ने वक्फ बोर्ड को गुमराह करने के लिए फर्जी दस्तावेज पेश किए और जमीन के कब्रिस्तान होने का उल्लेख छिपाया।

ताज़ा ख़बरें
स्थानीय प्रशासन ने इस नए मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। लेखपाल खबर हुसैन ने पीटीआई को बताया कि सर्वे में साफ तौर पर कब्रिस्तान वाली जमीन पर मस्जिद पाई गई।यह घटना संभल जिले में हाल के महीनों में जारी भूमि अतिक्रमण और धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों की कड़ी है, जहां कब्रिस्तान या तालाब जैसी सार्वजनिक जमीनों पर अवैध निर्माण के कई मामले सामने आए हैं। प्रशासन ने ऐसे मामलों में सख्ती बरतने का संकेत दिया है।

यह मामला संभल के उस बड़े विवाद से अलग है, जिसमें शाही जामा मस्जिद को हिंदू पक्ष प्राचीन श्री हरिहर मंदिर बताता है। पिछले साल नवंबर में इस विवाद ने जोर पकड़ा था, जब कोर्ट के आदेश पर दो चरणों में सर्वे हुआ। मस्जिद समिति ने सर्वे के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। उस मामले की सुनवाई 8 जनवरी तक स्थगित की गई थी।

नवंबर 2024 में चंदौसी की सिविल कोर्ट (सीनियर डिवीजन) ने हिंदू याचिकाकर्ताओं (जिनमें हरि शंकर जैन और महंत ऋषिराज गिरि शामिल हैं) की याचिका पर मस्जिद का सर्वे आदेश दिया, जिसके तहत एएसआई टीम ने दो चरणों में सर्वे किया। पहले चरण में कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ, लेकिन दूसरे चरण में 24 नवंबर 2024 को हिंसा भड़क गई, जिसमें पांच लोगों की मौत हुई और कई पुलिसकर्मी घायल हुए।

हिंसा के बाद मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा। मस्जिद प्रबंधन समिति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में सर्वे के खिलाफ चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में हस्तक्षेप करते हुए सर्वे और निचली अदालत की कार्यवाही पर स्टे लगा दिया तथा शांति बनाए रखने का निर्देश दिया। स्टे के कारण सुनवाई कई बार स्थगित हुई, जिसमें जनवरी 2026 तक की तारीखें आईं। वर्तमान में (जनवरी 2026) मुख्य मुकदमा लंबित है और विवादित स्थल पर स्टेटस क्वो बरकरार है। यह मामला पूजा स्थल अधिनियम (1947 की स्थिति में बदलाव न करने) के दायरे में आता है, लेकिन दावों पर बहस जारी है।

हिंसा के बाद कई कानूनी मोड़ आए हैं। पुलिस ने 1100 पेज की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क समेत कई नाम शामिल हैं। हाल ही में चंदौसी सीजेएम कोर्ट ने हिंसा के दौरान कथित पुलिस फायरिंग (जिसमें युवक आलम की मौत हुई) पर तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी (अब एएसपी), एसएचओ अनुज तोमर और 10-12 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। हालांकि, संभल पुलिस ने इसे 'अवैध' बताते हुए उच्च अदालत में चुनौती देने की बात कही है। यह विवाद संभल में अन्य भूमि अतिक्रमण मामलों से जुड़ा हुआ है और सांप्रदायिक संवेदनशीलता का केंद्र बना हुआ है।