राम मंदिर दान घोटाले में नए तथ्य सामने आए। कैश गिनने, बैंक में जमा करने के लिए 6-6 लोगों की दो टीमें थीं। तिजोरी और मुख्य दरवाजे पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे जानबूझकर ऐसे लगाए गए जो काम नहीं कर रहे थे।
क्या होगी निष्पक्ष जांचः राम मंदिर अयोध्या के दान में हेराफेरी
अयोध्या में राम मंदिर के गर्भगृह/तिजोरी से पिछले एक साल से अधिक समय से चढ़ावे और दान की राशि चोरी होने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित करके कार्रवाई तेज कर दी है। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस महाघोटाले में अब तक पुलिस ने कोई औपचारिक आधिकारिक FIR दर्ज नहीं की है। इसके बावजूद SIT संदिग्धों को हिरासत में लेकर लगातार छापेमारी कर रही है। इससे तमाम सवाल उठ रहे हैं कि बिना एफआईआर किस तरह संदिग्ध हिरासत में लिए जा रहे हैं और अदालत में क्या मुकदमा बिना एफआईआर चलेगा।
लगभग ₹3 करोड़ का कैश बरामद
लखनऊ के एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस महाघोटाले में करीब 7 करोड़ रुपये की चोरी का अनुमान है, जिसमें से अब तक कुल 2.98 करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं। शनिवार रात को पुलिस ने दो अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की थी।
- मीनापुर ठाकुरान फगौली: यहाँ एक घर पर मारे गए छापे में पुलिस ने 12 लाख रुपये नकद बरामद किए।
- मिल्कीपुर: इसके बाद मिल्कीपुर में एक अन्य घर पर छापेमारी की गई, जहाँ से लाखों रुपये की नकदी हाथ लगी।
मंदिर प्रबंधन समिति के बड़े चेहरों पर शक
जांच में सामने आया है कि मंदिर में चढ़ावे को इकट्ठा करने, उसकी गिनती करने और उसे बैंकों में जमा करने के लिए 6-6 लोगों की दो टीमें बनाई गई थीं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तिजोरी और उसके मुख्य दरवाजे पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की जिम्मेदारी जिन लोगों को दी गई थी, उन्होंने जानबूझकर ऐसे कैमरे लगाए जो काम ही नहीं कर रहे थे (नॉन-फंक्शनल थे)।इससे साफ संकेत मिलता है कि इस पूरी साजिश में राम मंदिर प्रबंधन समिति के वरिष्ठ सदस्य और ऊंचे पदों पर बैठे लोग शामिल हैं। पुलिस ने मंदिर प्रबंधन समिति से जुड़े कम से कम पांच लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
बिना FIR के जांच पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा कानूनी सवाल यह खड़ा हो रहा है कि बिना FIR दर्ज किए आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कैसे की जाएगी और उन्हें सजा कैसे मिलेगी? अयोध्या के 45 वर्षीय निवासी विक्रम तिवारी, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राम सेवा और मंदिर निर्माण कार्यों में लगाया है, ने इस घटना को लेकर रविवार को पुलिस में अर्जी दी। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए अपनी गहरी निराशा व्यक्त की।विक्रम तिवारी ने कहा- "मैंने अपना पूरा जीवन भगवान राम की सेवा में बिताया। मंदिर के दैनिक चढ़ावे और दान की चोरी देखकर मुझे गहरा दुख हुआ है। मैंने पुलिस में शिकायत दी, लेकिन उन्होंने इसे बहुत हल्के में लिया और कहा कि जांच पहले से ही चल रही है। मेरा सवाल है कि बिना पुलिस केस (FIR) दर्ज किए कोई जांच कैसे हो सकती है? ऐसी चोरियों के बारे में हमने कभी नहीं सुना था। हम सोचते थे कि राम मंदिर बनने से देश में स्वर्ण युग आएगा, लेकिन हमें क्या पता था कि यहाँ चारों तरफ चोर बैठे हैं।"
विक्रम तिवारी ने सरकार से मांग की है कि एक ऐसी टीम लगाई जाए जो इस चोरी के पैसे के लेन-देन (मनी ट्रेल) को ट्रैक कर सके, क्योंकि आरोपियों ने इस पैसे से कई संपत्तियां खरीदी हैं और यात्राएं की हैं।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
इस मामले की जांच लखनऊ के मंडल आयुक्त (Divisional Commissioner) विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली SIT कर रही है, जिसे 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है। इस कानूनी उलझन पर राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) अरविंद जैन ने कहा कि सरकार अभी SIT की प्राथमिक जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। जैसे ही SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी, उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ आधिकारिक तौर पर FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है।