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रिहाई मंच : नागरिकता क़ानून विरोधी प्रदर्शनों में आरएसएस-बीजेपी ने कराई हिंसा

नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश में चले आन्दोलन में क्या आरएसएस और बीजेपी के लोगों ने जानबूझ कर हिंसा की? क्या किसी साजिश के तहत इन विरोध प्रदर्शनों में हिंसा फैलाई गई ताकि उसे कुचलने के लिए सरकार को बहाना मिल जाए? 

ग़ैर-सरकारी संगठन रिहाई मंच ने ये आरोप लगाए हैं। रिहाई मंच के प्रमुख और मशहूर वकील मुहम्मद शोएब ने अंग्रेज़ी वेबसाइट ‘द वायर’ से कहा, ‘हमारे पास यह मानने की ठोस वजहें है कि यह सोची समझी साजिश थी।’

तकरीबन एक महीने तक जेल में रहने के बाद उन्हें ज़मानत मिली तो उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बातें कहीं। शोएब ने कहा : 

मुझे इमर्जेंसी के दौरान भी गिरफ़्तार किया गया था, पर जेल से छूटने के बाद मेरा स्वागत आज़ादी के सिपाही की तरह किया गया। लेकिन आज मुझे दंगाई और साजिशकर्ता के रूप में पेश किया जा रहा है।


मुहम्मद शोएब, अध्यक्ष, रिहाइ मंच

मुहम्मद शोएब ने 'द वायर' से यह भी कहा कि प्रशासन और सत्तारूढ़ दल के इशारे पर अख़बारों में रिहाई मंच और उसके कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ नियमित रूप से बेबुनियाद ख़बरें छपवाई जा रही हैं।
रिहाई मंच के एक और कार्यकर्ता रॉबिन वर्मा को पुलिस ने गिरफ़्तार किया था। मंच का कहना है कि पुलिस ने रॉबिन को बुरी तरह पीटा।
संगठन ने प्रेस बयान में कहा, ‘पुलिस के सर्कल अफ़सर ने वर्मा और उनके घरवालों को भद्दी गालियाँ दीं और धमकाया कि उन्हें ऐसे मामलों में फंसा दिया जाएगा कि उनकी जि़न्दगी हमेशा के लिए तबाह हो जाएगी। पुलिस उन लोगों को निशाना बना रही है जो आम जनता के पक्ष में बोल रहे हैं और उनकी आवाज़ उठा रहे हैं।’
बता दें कि नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर हिंसात्मक हो गया था। इसके बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की। कई लोगों ने आरोप लगाए कि उनका विरोध-प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है इसके बावजूद गिरफ़्तार किया गया है। हालाँकि इस बीच उत्तर प्रदेश की पुलिस ने दावा किया कि बिना किसी सबूत के किसी को भी गिरफ़्तार नहीं किया गया है। तब पुलिस ने हिंसा के दौरान के कुछ वीडियो और तसवीरें भी जारी की थीं। कई जगहों पर पुलिस के ख़िलाफ़ नाबालिगों को गिरफ़्तार करने के भी आरोप लगे हैं। हालाँकि पुलिस ने नाबालिगों की गिरफ़्तारी के आरोपों को खारिज किया है। 
नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ देश भर में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान कहीं पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों को पीटते दिखे तो कहीं पर प्रदर्शनकारी पुलिस पर पत्थर फेंकते दिखे। लेकिन हैरान करने वाले कुछ वीडियो सामने आये हैं, जिनमें आम लोग पत्थरबाज़ी कर रहे हैं, तोड़फोड़ कर रहे हैं, दुकान में आग लगा रहे हैं और पुलिस उनके साथ खड़ी है। इस ख़बर को पढ़कर आपको पता चलेगा कि इस क़ानून के विरोध में हुए प्रदर्शनों को लेकर पुलिस क़ानून के रखवाले की तरह नहीं बल्कि गुंडों की तरह बर्ताव करती दिखी है।
बता दें, नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश में बहुत जगह विरोध प्रदर्शन हुए और कई जगहों पर ये प्रदर्शन हिंसक भी हो गए। तकरीबन 20 लोग इसमें मारे गए। हालांकि पुलिस कहती है कि उसने गोली चलाई ही नहीं और जो मारे गए, वे प्रदर्शनकारियों की गोली से ही मारे गए। पर पुलिस ने मारे गए लोगों में से सिर्फ 4 का पोस्ट मार्टम सार्वजनिक किया। बाकी के बारे में पुलिस गोलमोल बातें ही कर रही है। इससे पूरे मामले पर कई तरह के सवाल रहे हैं। 
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