इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि गंगा नदी में नॉनवेज (मांसाहारी) भोजन का कचरा फेंकने से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गंभीर ठेस पहुंच सकती है। कोर्ट ने यह टिप्पणी वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने और कथित तौर पर नॉनवेज कचरा नदी में फेंकने के आरोपी आठ मुस्लिम युवकों को जमानत देते हुए की।
हाईकोर्ट में दो अलग-अलग बेंच ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की। जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला ने पांच आरोपियों को जमानत दी, जबकि जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने तीन अन्य आरोपियों की जमानत याचिका को स्वीकार किया। मामले के कुल 14 आरोपियों में से 8 को जमानत मिल चुकी है, जबकि 6 अन्य को अभी जमानत मिलना बाकी है।
जस्टिस शुक्ला ने अपने 16 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि हालांकि इस कृत्य से "हिंदू धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है", लेकिन आरोपी अपने किए पर बेहद शर्मिंदा (apologetic) हैं और उनके परिवार भी समाज को पहुंचे इस दर्द के लिए गहरा खेद व्यक्त कर रहे हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, "मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों, आवेदकों का कोई पिछला आपराधिक इतिहास न होना, उनके द्वारा पहले ही काटी जा चुकी जेल की अवधि और कोर्ट के समक्ष व्यक्त की गई उनकी माफी को ध्यान में रखते हुए, प्रथम दृष्टया जमानत का मामला बनता है।"

इन्हें मिली जमानत

जस्टिस शुक्ला की पीठ से: मोहम्मद आज़ाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल अफरीदी, मोहम्मद तौसीफ अहमद और मोहम्मद अनस को बेल मिली। जबकि जस्टिस सिन्हा की पीठ से: मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रज़ा और मोहम्मद फैजान बेल पर बाहर आए।

भाजपा नेता की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ

यह घटना इसी साल 17 मार्च की है, जब वाराणसी पुलिस ने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के जिला अध्यक्ष रजत जायसवाल की शिकायत पर सभी 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि इन लोगों ने गंगा नदी में एक नाव पर इफ्तार पार्टी का आयोजन किया, वहां नॉनवेज भोजन का सेवन किया और बचा हुआ खाना व कचरा गंगा नदी में फेंक दिया। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया था।
वाराणसी की सत्र अदालत (Sessions Court) ने 1 अप्रैल को इन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 24 के तहत मामला दर्ज किया गया था। इनमें प्रमुख धाराएं शामिल थीं: धारा 196(1)(b) (शत्रुता को बढ़ावा देना), धारा 270 (सार्वजनिक उपद्रव/खतरा फैलाना),  धारा 279 (सार्वजनिक जल स्रोत या जलाशय को दूषित करना), धारा 298 (पूजा स्थल को अपवित्र करना या नुकसान पहुंचाना), धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से किया गया जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य), धारा 308 (जबरन वसूली) और धारा 223(b)।

सरकारी पक्ष की दलील

जमानत याचिका का विरोध करते हुए अपर महाधिवक्ता (Additional Advocate General) अनूप त्रिवेदी ने अदालत में दलील दी थी कि आरोपियों ने न केवल नॉनवेज कचरा फेंककर गंगा नदी को अपवित्र किया, बल्कि सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने और अशांति फैलाने के उद्देश्य से इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर अपलोड किया था। हालांकि, आरोपियों द्वारा मांगी गई बिना शर्त माफी और उनके साफ रिकॉर्ड को देखते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया।
हालांकि सोशल मीडिया पर लोगों ने वीडियो सामने आने पर लोगों ने लिखा था कि गंगा नदी में न जाने कितने शव बहा दिए जाते हैं। मरे हुए लोगों को जलाने के बाद बची राख को लोग गंगा में प्रवाहित करते हैं। इसी तरह गंगा में तमाम तरह का कूड़ा कतरा फेंका जाता है। जिसमें मेडिकल कचरा भी शामिल है। लेकिन इसके बावजूद गंगा की पवित्रता कभी भंग नहीं हुई। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर बहस अभी भी जारी है। गंगा को साफ करने की योजना नवामि गंगे पर सरकार आगे नहीं बढ़ पाई है। गंगा की सफाई के लिए करोड़ों का बजट है। लेकिन गंगा आज भी प्रदूषित नदियों में गिनी जाती है।