चुनाव आयोग ने मतदाता सूची विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान उत्तर प्रदेश के मतदाताओं के लिए 'बीएलओ से कॉल बुक करें' सुविधा शुरू की है। सवाल है कि करोड़ों वोटरों के नाम कटने के बाद ये बात क्यों समझ आई। बिहार में तो ऐसा नहीं किया था।
उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग (ECI) ने ‘बुक-ए-कॉल विद बीएलओ’ सेवा शुरू की है। इस सुविधा के तहत मतदाता अपने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से फोन पर सीधे बात कर मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से जुड़ी सहायता ले सकेंगे। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया 6 फरवरी 2026 तक जारी रहेगी। हालांकि यह सुविधा बाकी एसआईआर वाले राज्यों के लिए भी दी गई है। लेकिन सिर्फ यूपी में इसका प्रचार ज्यादा किया जा रहा है। यूपी के मुख्य चुनाव अधिकारी ने इस सर्विस के बारे में मीडिया को बाकायदा सूचित किया है। लेकिन पीआईबी की प्रेस रिलीज बता रही है कि यह सुविधा सभी 36 राज्यों में शुरू की है। इसके लिए टोल फ्री नंबर 1800-11-1950 जारी किया गया है।
चुनाव आयोग के अनुसार, यह सेवा voters.eci.gov.in वेबसाइट और ECINET मोबाइल एप के माध्यम से उपलब्ध है। मतदाता पंजीकृत मोबाइल नंबर से लॉग-इन या ओटीपी आधारित साइन-अप के बाद अपने ईपीआईसी नंबर, रेफरेंस नंबर या फिर विधानसभा क्षेत्र और बूथ विवरण दर्ज कर कॉल बुक कर सकते हैं। कॉल बुक होने के बाद संबंधित बीएलओ को 48 घंटे के भीतर मतदाता से संपर्क करना अनिवार्य होगा।
इस सुविधा ने सवाल भी खड़े किए
पूरे देश में अभी जिन राज्यों में एसआईआर हुए हैं, वहां ड्राफ्ट मतदाता सूची में 6.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं। बिहार में एसआईआर के दौरान भी लाखों नाम कटे थे, तब चुनाव आयोग ने इस तरह की कोई सुविधा नहीं दी थी। लेकिन अकेले यूपी में करीब तीन करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं हैं। इस पर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन्हें बीजेपी का मतदाता बताते हुए चिन्ता जता चुके हैं। यूपी की सूची आने के बाद योगी आदित्यनाथ और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बीजेपी के मंडल पदाधिकारियों, विधायकों, सांसदों और मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की और उन्हें हर बूथ में मतदाता बढ़ाने का टारगेट दिया। ड्राफ्ट सूची आने के बाद बीजेपी सबसे ज्यादा परेशान दिखाई दी।
चुनाव आयोग का बीएलओ से मतदाताओं से फोन पर बातचीत कराने की मुहिम यूपी के संदर्भ में ज्यादा महत्वपूर्ण लग रही है। क्योंकि यूपी को छोड़कर किसी भी राज्य की बीजेपी यूनिट या वहां के नेताओं ने ड्राफ्ट लिस्ट को लेकर कोई बयानबाज़ी नहीं की। यूपी में 2027 में विधानसभा चुनाव हैं लेकिन वहां चुनाव आयोग हर कदम को निश्चित समय सीमा में बांधकर अंजाम दे रहा है। हालांकि यूपी में एसआईआर के लिए उसे दो बार अपनी तारीखें आगे बढ़ानी पड़ी। एसआईआर के बाद जो वोटर लिस्ट आई है, उसे 6 फरवरी तक दुरुस्त करने का टारगेट दिया गया है।
यूपी की ड्राफ्ट मतदाता सूची मंगलवार को प्रकाशित हुई थी। सूची में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम बाहर कर दिए गए हैं, जबकि सूची में कुल 12.55 करोड़ नाम बनाए रखे गए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मतदाताओं से अपील की है कि वे प्रक्रिया के बीएलओ से फोन पर मिलने का समय लेने की सुविधा का अधिकतम लाभ उठाएं।
यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी एसआईआर डेली बुलेटिन के अनुसार, दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक खुली है। इस दौरान पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जोड़ने के लिए दावा और नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि सत्यापन और आवश्यक घोषणापत्र प्राप्त होने के बाद ही नाम अंतिम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे।
बुलेटिन में बताया गया है कि राजनीतिक दलों ने बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त किए हैं, जो जनता से फॉर्म-6 (नाम जोड़ने) और फॉर्म-7 (नाम हटाने) के जरिए दावे और आपत्तियां लेकर आवश्यक घोषणापत्र के साथ जमा कर रहे हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित फॉर्म और घोषणापत्र के बिना की गई सामान्य शिकायतों की गणना नहीं की जाएगी।
राजनीतिक दलों की ओर से प्राप्त दावों और आपत्तियों के आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय दलों में बहुजन समाज पार्टी ने 1,53,469 नाम जोड़ने के दावे और 19 आपत्तियां दाखिल की हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने 1,60,605 दावे और 1,214 आपत्तियां दर्ज कराई हैं। कांग्रेस ने 94,591 दावे और 19 आपत्तियां दी हैं, वहीं आम आदमी पार्टी ने 5,262 दावे जमा किए हैं।
राज्य स्तरीय दलों में समाजवादी पार्टी ने 1,56,972 दावे और 82 आपत्तियां दाखिल की हैं, जबकि अपना दल (एस) ने 5,397 दावे प्रस्तुत किए हैं। बुलेटिन के अनुसार, प्रारूप सूची के प्रकाशन के बाद अब तक 32,290 दावे और आपत्तियां सीधे मतदाताओं से भी प्राप्त हुई हैं।
यूपी के लिए बीजेपी की खास रणनीति
यूपी में सबसे ज्यादा मतदाता नाम लखनऊ में हटाए गए, लगभग 30 प्रतिशत, उसके बाद गाजियाबाद में 28 प्रतिशत। इसी तरह, उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे बलरामपुर, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, गौतम बुद्ध नगर, हापुड़, सहारनपुर और आगरा में भी बड़ी संख्या में मतदाता नाम हटाए गए। अनुमान है कि भाजपा को मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी वोटों का नुकसान हुआ है। खबरों के अनुसार, पार्टी ने कई विधानसभा क्षेत्रों में लगभग 100,000 वोट खो दिए हैं, जहां उसने पिछले विधानसभा चुनाव में 5,000 से 20,000 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी।
पार्टी नेतृत्व ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि पार्टी को नुकसान से बचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। इसने केंद्रीय कार्यालय को बूथ स्तर की दैनिक रिपोर्ट अनिवार्य रूप से जमा करने का निर्देश दिया है और शहरी वोटों पर विशेष ध्यान देने को कहा है। जिला अध्यक्षों को 10 सदस्यीय दल बनाकर हर शाम प्रगति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। सभी पदाधिकारियों को चुनाव प्रचार के दौरान बूथों पर उपस्थित रहने के लिए कहा गया है और 17 जनवरी को एक व्यापक समीक्षा तय की गई है।