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राशन कार्ड: वरुण बोले- चुनाव से पहले पात्र और बाद में अपात्र

बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने राशन कार्ड के नए नियमों को लेकर योगी सरकार को घेरा है। वरुण गांधी ने कहा है कि जन सामान्य के जीवन को प्रभावित करने वाले सभी मानक अगर चुनाव देखकर तय किए जाएंगे तो सरकारें अपनी विश्वसनीयता खो बैठेंगी।

बता दें कि राशन कार्ड का पात्र बनने के लिए नए नियम जारी किए गए हैं। इन नियमों के मुताबिक़, राशन कार्ड का पात्र होने के लिए खुद के नाम जमीन ना होना, पक्का मकान ना होना, ट्रैक्टर ट्रॉली ना होना आदि शामिल हैं।

इसके अलावा राशन कार्ड बनवाने वाला शख्स मुर्गी पालन, गौ पालन आदि न करता हो, शासन की ओर से उसे कोई वित्तीय सहायता न मिलती हो, उसका बिजली का बिल ना आता हो और जीविकोपार्जन के लिए कोई आजीविका का साधन ना हो, इस तरह के नियम भी सरकार ने बनाए हैं।

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वरुण गांधी ने पूछा है कि चुनाव खत्म होते ही राशन कार्ड खोने वाले करोड़ों देशवासियों की याद सरकार को अब कब आएगी। 

उन्होंने इस सवाल का जवाब भी खुद ही देने की कोशिश की है और कहा है कि शायद अगले चुनावों में।

सरकारी राशन के लिए ऐसा ही एक आदेश उत्तर प्रदेश में बांदा जिले के जिलाधिकारी ने निकाला है। जिलाधिकारी के आदेश में कहा है, 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत जनपद में प्रचलित अन्त्योदय राशन कार्ड लाभार्थी के ऐसे सभी परिवार जिनके पास मोटर साइकिल, पक्का मकान, कृषि योग्य भूमि, रंगीन टीवी, कोई निश्चित व्यवसाय आदि है, वह अपात्र हैं।' 

आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि ऐसे परिवार 7 दिन में अपना राशन कार्ड सरेंडर यानी समर्पित कर दें। ऐसा नहीं करने पर और सत्यापन के दौरान अपात्र पाए जाने पर गेहूं 24 रुपये प्रति किलो, चावल 32 रुपये प्रति किलो और चीनी, खाद्य तेल, चने व नमक की वसूली बाजार दर पर की जाएगी। 

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बीते साल हुए लखीमपुर खीरी कांड के दौरान व उसके बाद से ही वरुण गांधी कई बार बीजेपी की केंद्र व राज्य सरकार पर सवाल उठा चुके हैं। कुछ महीने पहले वरुण गांधी के फिर से कांग्रेस में लौटने या ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी में जाने की चर्चा उठी थी। वरुण गांधी आम लोगों की समस्याओं को लेकर मुखर रहे हैं और बेरोजगारी, महंगाई पर भी बोल चुके हैं। 

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चुनाव निकल गया पहचानते नहीं

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस मामले में ट्वीट किया था। अखिलेश ने कहा था, “मुफ़्त राशन देते समय तो कोई घोषणा नहीं हुई पर अब कुछ परिस्थितियों की शर्त रखकर राशन-कार्ड को वापस कार्यालय में सरेंडर करने की मुनादी की जा रही है अन्यथा इन राशन-कार्ड से लिये गए गेहूं, चावल, चना, तेल व नमक तक को बाज़ार भाव से वसूलने की धमकी दी जा रही है।” उन्होंने कहा था कि चुनाव निकल गया और अब पहचानते तक नहीं।

बता दें कि बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र व राज्य सरकार करोड़ों लोगों को मुफ्त राशन देने का दावा करती रही है। लेकिन लगता है अब जो नए नियम सामने आए हैं, उससे बड़ी संख्या में लोग सरकारी राशन नहीं ले पाएंगे। 

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