उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड पर मचे बवाल के बीच उत्तराखंड बीजेपी के पूर्व प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने का विरोध करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत समेत कांग्रेस के 30 नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। कांग्रेस ने गौतम की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं, जबकि उत्तराखंड सरकार के मंत्री सुबोध उनियाल ने विपक्ष पर अंकिता की हत्या के मामले में राजनीति करने का आरोप लगाया है।
FIR में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत और वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह सहित कांग्रेस के 30 नेताओं का नाम शामिल है। इसके अलावा 10 से 15 अज्ञात लोगों का भी जिक्र किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने गौतम की नियुक्ति का विरोध करते हुए आरोप लगाया था कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवालों और परिवार की ओर से उठाए गए संदेहों के बीच उन्हें संवैधानिक पद पर नियुक्त करना सही नहीं है। अंकिता के परिवार की ओर से कथित VIP की भूमिका का सवाल उठाया गया है। हालांकि, गौतम ने मामले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है और उन पर आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है।

देहरादून में क्या हुआ था?

पुलिस के मुताबिक़ गुरुवार को कांग्रेस कार्यकर्ता देहरादून में राजपुर रोड स्थित पार्टी के प्रदेश मुख्यालय के बाहर जुटे थे। उनका उद्देश्य दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल नियुक्ति के विरोध में कैंडल मार्च निकालना और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपना था। FIR में दर्ज शिकायत के अनुसार, पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि प्रदर्शनकारी लोक भवन की ओर बढ़ रहे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कई बार बैरिकेड पार नहीं करने और व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए, लेकिन उन्होंने इन निर्देशों का पालन नहीं किया।
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पुलिस की शिकायत के मुताबिक़ प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार करके आगे बढ़े, दुष्यंत गौतम के खिलाफ नारे लगाए और लोक भवन का मुख्य दरवाजा जबरन खोलने की कोशिश की। इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस ने कांग्रेस नेताओं और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की दो धाराओं में मामला दर्ज किया है। धारा 132 यानी किसी लोक सेवक को उसके आधिकारिक कामकाज से रोकने के लिए हमला करने या आपराधिक बल का इस्तेमाल करने से संबंधित है। जबकि धारा 223 किसी लोक सेवक की ओर से विधिवत जारी आदेश का उल्लंघन करने से संबंधित है।

दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर सवाल क्यों?

कांग्रेस का कहना है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में परिवार की ओर से उठाए गए सवालों और कथित VIP की भूमिका से जुड़े आरोपों के बीच दुष्यंत कुमार गौतम को राज्यपाल जैसा संवैधानिक पद दिया जाना कई सवाल खड़े करता है। कांग्रेस महासचिव और उत्तराखंड की पार्टी प्रभारी कुमारी शैलजा ने शुक्रवार को गौतम की नियुक्ति को लेकर बीजेपी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शुरुआत से ही अंकिता के परिवार के साथ खड़ी रही है और परिवार की न्याय की मांग का समर्थन करती है।

कुमारी शैलजा ने अंकिता भंडारी मामले की जारी सीबीआई जांच और इससे जुड़े आरोपों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब मामला जांच के दायरे में है तब गौतम को संवैधानिक पद पर नियुक्त करने का फैसला क्यों लिया गया। उन्होंने कहा कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शिता जरूरी है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड क्या है?

अंकिता भंडारी उत्तराखंड की 19 वर्षीय युवती थीं। उनकी हत्या 18 सितंबर 2022 को हुई थी और पांच दिन बाद उनका शव बरामद किया गया था। इस मामले ने उत्तराखंड में आक्रोश पैदा किया था। जांच के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मामले में आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद विशेष जांच दल यानी SIT गठित की गई थी। राज्य सरकार ने मामले में गैंगस्टर कानून के तहत भी कार्रवाई की थी और बाद में आरोपियों को दोषी ठहराया गया।
इसके बावजूद अंकिता के परिवार की ओर से एक अज्ञात VIP की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। परिवार ने दुष्यंत कुमार गौतम का नाम भी अपने आरोपों में लिया है। गौतम ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।

राहुल की राष्ट्रपति से गुहार

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आग्रह किया था कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच पूरी होने तक गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए।
राहुल गांधी की मांग का आधार यह है कि मामले में परिवार की ओर से उठाए गए सवालों और जांच से जुड़े विवादों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि अंकिता के परिवार को न्याय मिलने और मामले के सभी पहलुओं की जाँच होने तक सवालों का जवाब मिलना ज़रूरी है।

उत्तराखंड सरकार के मंत्री क्या बोले?

कांग्रेस के विरोध के बीच उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस पर 'गिद्ध राजनीति' करने का आरोप लगाया। उनियाल ने कहा कि विपक्ष अंकिता की हत्या जैसी गंभीर घटना का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ लेने के लिए कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि घटना सामने आने के बाद राज्य सरकार ने तेजी से कार्रवाई की थी।
उनियाल ने कहा कि आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया गया, विशेष जांच दल का गठन किया गया और गैंगस्टर कानून के तहत कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपियों को बाद में दोषी ठहराया गया। उनियाल ने दावा किया कि राज्य सरकार ने अंकिता के परिवार को आर्थिक सहायता और रोजगार से संबंधित मदद भी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता के परिजनों से मुलाकात के बाद मामले की CBI जांच के आदेश दिए थे। सुबोध उनियाल ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस के एक सांसद और दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के एक पूर्व प्रोफेसर से जुड़े यौन उत्पीड़न के आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने उस मामले में पीड़ितों के प्रति वैसी चिंता नहीं दिखाई, जैसी वह अंकिता भंडारी मामले में जता रहा है।