अंकिता भंडारी केस में सीबीआई जांच की घोषणा के बाद मामला फिर गरमाया है। सीबीआई जाँच की घोषणा के बाद ‘वीआईपी’ के खिलाफ नयी एफआईआर क्यों? क्या गुमराह करने के लिए?
उत्तराखंड में अंकिता भंडारी को इंसाफ के लिए रैली
उत्तराखंड में 2022 में हुई 19 साल की अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में नया मोड़ आ गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सीबीआई जांच की सिफारिश की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद ही पद्म भूषण से सम्मानित पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने देहरादून के वसंत विहार थाने में एक शिकायत दर्ज कराई और एक नयी एफ़आईआर दर्ज की गई है। इसमें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऑडियो-वीडियो क्लिप्स के आधार पर अज्ञात 'वीआईपी' पर आरोप लगाया गया है। इस नयी एफ़आईआर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि आख़िर यह नयी एफ़आईआर क्या आरोपियों को बचाने के लिए दर्ज की गई है। इधर, न्याय की मांग के लिए आज उत्तराखंड बंद बुलाया गया है।
ताज़ा शिकायत के कुछ घंटों बाद ही पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली। रिपोर्टों के अनुसार गढ़वाल आईजी राजीव स्वरूप ने बताया कि इस नयी एफआईआर को पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया है, जहाँ से इसे सचिवालय के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इसके बाद सीबीआई इस 'वीआईपी' एंगल की जांच करेगी।
अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में वह गायब हो गईं थीं। छह दिन बाद उनका शव मिला। जांच में पता चला कि रिसॉर्ट मैनेजर और पूर्व बीजेपी नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य और उसके दो साथियों ने अंकिता की हत्या की थी। मई 2025 में कोटद्वार की सत्र अदालत ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
'वीआईपी' के ख़िलाफ़ शिकायत में क्या कहा गया?
हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ ऑडियो-वीडियो क्लिप्स वायरल हुए, जिनमें दावा किया जा रहा है कि हत्या में कुछ अज्ञात 'वीआईपी' बड़े लोग भी शामिल थे। आरोप है कि सबूत छिपाए या नष्ट किए गए। इसी को लेकर डॉ. अनिल जोशी ने शिकायत की। डॉ. जोशी देहरादून में हिमालयन एनवायरनमेंटल स्टडीज एंड कंजर्वेशन ऑर्गनाइजेशन चलाते हैं और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में पद्म श्री व पद्म भूषण से सम्मानित हैं।
उन्होंने अपनी शिकायत में कहा, 'अपराधियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन सोशल मीडिया पर 'वीआईपी' के शामिल होने और सबूत नष्ट करने की बातें हो रही हैं। पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए अलग से निष्पक्ष जांच जरूरी है।'
विपक्ष का हमला
कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि सरकार पहले सीबीआई जांच की बात करती है और साथ ही 'वीआईपी' को बचाने की कोशिश भी करती दिख रही है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, 'पुराना केस पहले से चल रहा था, उसमें चार्जशीट दाखिल हुई, ट्रायल हुआ और सजा हुई। नयी एफ़आईआर की ज़रूरत नहीं थी। यह पुरानी जांच को प्रभावित करने की कोशिश लगती है।'
सीपीआई(एमएल) के इंद्रेश मैखुरी ने भी सरकार पर संदेह जताया और कहा कि अनिल जोशी का इस मामले में पहले कोई रोल नहीं था और वे सरकार के पक्ष में रहते हैं। उन्होंने कहा, 'वह आम तौर पर सरकार समर्थक रुख के लिए जाने जाते हैं। इससे शक होता है कि उत्तराखंड सरकार एक बार फिर इस मामले में गुमराह करने की कोशिश कर रही है।'पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आरोप लगाया कि सरकार पिछले साढ़े तीन साल से 'वीआईपी' को बचा रही है। उन्होंने कहा, 'सीसीटीवी में छेड़छाड़ हुई, सबूत नष्ट किए गए। पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए।'
पुलिस क्या कहती है?
रिपोर्ट के अनुसार आईजी राजीव स्वरूप ने कहा कि मुख्यमंत्री ने शुरू से ही सक्रिय जांच के निर्देश दिए थे। एसआईटी ने अच्छी जांच की और सजा दिलाई। लेकिन नए आरोपों के कारण सीबीआई जांच की जरूरत पड़ी। नई एफआईआर के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।
यह मामला अब पूरे उत्तराखंड में गर्म है। रविवार को विभिन्न संगठनों ने 'उत्तराखंड बंद' का ऐलान किया है। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है।